ताऊ देवीलाल के शिष्य धनखड़ अब चौटाला परिवार के साथ, छोड़ा सरकारी बंगला, अभय चौटाला के फार्म हाउस में शिफ्ट

पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सरकारी आवास खाली कर अभय चौटाला के छतरपुर फार्म हाउस में शिफ्ट किया। 41 दिन में बंगला छोड़ा, जबकि 15 महीने बाद खाली करना था।

ताऊ देवीलाल के शिष्य धनखड़ अब चौटाला परिवार के साथ, छोड़ा सरकारी बंगला, अभय चौटाला के फार्म हाउस में शिफ्ट


➤ पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सरकारी आवास खाली कर अभय चौटाला के छतरपुर फार्म हाउस में शिफ्ट किया
➤ इस्तीफे के बाद धनखड़ ने कहा था कि वह ताऊ देवीलाल के शिष्य हैं और उनके सिद्धांतों पर चलना ही राजनीति की असली राह है
➤ महज 41 दिन में बंगला छोड़ा, जबकि नियम के अनुसार 15 महीने बाद खाली करना था


देश के पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ अब दिल्ली के छतरपुर स्थित अभय चौटाला के फार्म हाउस में रहेंगे। सोमवार शाम करीब 6 बजे धनखड़ यहां शिफ्ट हुए। उन्होंने संसद भवन परिसर के पास स्थित उपराष्ट्रपति एन्क्लेव का आधिकारिक आवास महज 41 दिन में खाली कर दिया, जबकि नियम के मुताबिक उन्हें पद से इस्तीफे के 15 महीने बाद घर खाली करना था।

पूर्व उपराष्ट्रपति के शिफ्ट होने की पुष्टि खुद इंडियन नेशनल लोकदल (INLD) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अभय चौटाला ने की। उन्होंने कहा— “यह घर धनखड़ साहब का ही घर है, वह जब तक चाहें यहां रह सकते हैं।”

धनखड़ ने 21 जुलाई को अचानक इस्तीफा देकर सबको चौंका दिया था। उनका कार्यकाल 10 अगस्त 2027 तक का था। इससे पहले 10 जुलाई को ही उन्होंने एक कार्यक्रम में कहा था कि “ईश्वर की कृपा रही तो अगस्त 2027 में रिटायर हो जाऊंगा”, लेकिन ठीक 11 दिन बाद इस्तीफे की घोषणा कर दी।

धनखड़ का चौटाला परिवार से रिश्ता पुराना है। 6 महीने पहले सिरसा में उन्होंने खुद को ताऊ देवीलाल का शिष्य बताया था और कहा था कि उनकी राजनीतिक शिक्षा-दीक्षा देवीलाल के चरणों से शुरू हुई। पिछले साल दिसंबर में जब ओमप्रकाश चौटाला का निधन हुआ तो धनखड़ श्रद्धांजलि देने सिरसा पहुंचे थे और अभय चौटाला को सांत्वना दी थी।

इस्तीफे के बाद अभय चौटाला ने भी सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए लिखा था कि धनखड़ ताऊ की राह पर चलने वाले सिद्धांतवादी नेता हैं। उन्होंने इसे देवीलाल की राजनीतिक विरासत का विस्तार बताया था।

धनखड़ का राजनीतिक करियर कई उतार-चढ़ाव से भरा रहा। वह देश के पहले ऐसे उपराष्ट्रपति बने जिनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाया गया, हालांकि यह तकनीकी कारणों से खारिज हो गया। विपक्ष ने उन पर लगातार पक्षपात और विपक्ष की आवाज दबाने के आरोप लगाए।

अब जब उन्होंने सरकारी बंगला खाली कर चौटाला परिवार का आश्रय चुना है, तो यह सिर्फ आवास बदलना नहीं बल्कि उस राजनीतिक विरासत से जुड़ाव का संकेत है, जिसे चौधरी देवीलाल ने गढ़ा था।