कोर्ट में फर्जी जमानती गैंग का पर्दाफाश, जज ने कोर्ट रूम से कराया गिरफ्तार

कोर्ट में फर्जी जमानती नेटवर्क का खुलासा हुआ। एक ही जमीन के कागज और अलग-अलग आधार नंबर से कई जिलों में जमानत दिलाने का मामला सामने आया। जज ने कोर्ट रूम से ही गिरफ्तारी के आदेश दिए।

कोर्ट में फर्जी जमानती गैंग का पर्दाफाश, जज ने कोर्ट रूम से कराया गिरफ्तार

➤ एक ही जमीन के कागज पर कई आरोपियों की जमानत
➤ अलग-अलग फर्जी आधार नंबरों का इस्तेमाल
➤ जज के आदेश पर कोर्ट रूम से ही अरेस्ट

हरियाणा के करनाल में अदालत परिसर के भीतर ही एक बड़े फर्जी जमानती नेटवर्क का भंडाफोड़ हुआ है। जमानत प्रक्रिया के दौरान सामने आई गड़बड़ी ने कोर्ट प्रशासन को भी हैरान कर दिया। मधुबन थाना में दर्ज एक मामले में आरोपी को जमानत दिलाने पहुंचे जमानती को ही जज ने मौके पर गिरफ्तार करने के आदेश दे दिए।

मामले के अनुसार, 16 फरवरी को अदालत ने आरोपी वीरभान को जमानत देने का आदेश दिया था। आदेश के अनुपालन में जमानत बांड के साथ जमानती पेश किया गया। आरोपी की ओर से पानीपत जिले के तामसाबाद निवासी अश्वनी कुमार अदालत में जमानती के रूप में उपस्थित हुआ।

उसने शपथ पत्र देकर दावा किया कि वह किसी अन्य मामले में जमानती नहीं है। साथ ही अपनी जमीन की जमाबंदी की कॉपी, मूल आधार कार्ड और उसकी फोटो कॉपी अदालत में जमा कराई।

एसआईएमएस जांच में खुला पूरा खेल

अदालत के रीडर ने जमानती की जानकारी को एसआईएमएस (Surety Information Management Software) के जरिए वेरिफाई किया। जांच में चौंकाने वाला खुलासा हुआ।

पता चला कि अश्वनी कुमार पहले भी कई आपराधिक मामलों में जमानती बन चुका है। ये मामले करनाल, पानीपत, सोनीपत, बहादुरगढ़ और झज्जर की अदालतों में दर्ज पाए गए।

जांच में यह भी सामने आया कि उसने एक ही जमीन की जमाबंदी रिकॉर्ड के आधार पर अलग-अलग मामलों में कई आरोपियों की जमानत दी। इतना ही नहीं, अलग-अलग मामलों में अलग-अलग फर्जी आधार नंबरों का उपयोग भी किया गया।

जज ने तुरंत दिए गिरफ्तारी के आदेश

जैसे ही सॉफ्टवेयर से यह तथ्य सामने आए, अदालत ने इसे गंभीर अपराध मानते हुए तत्काल कार्रवाई की। जज ने कोर्ट रूम से ही आरोपी जमानती को गिरफ्तार करने के आदेश दिए। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर उसे हिरासत में ले लिया।

माना जा रहा है कि यह अकेला मामला नहीं है, बल्कि एक संगठित जमानती नेटवर्क सक्रिय हो सकता है, जो पैसों के बदले आरोपियों को जमानत दिलाने का काम करता था। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है।

अदालतों में सख्ती बढ़ने के संकेत

इस खुलासे के बाद अदालतों में जमानत प्रक्रिया के दौरान दस्तावेजों की जांच और अधिक कड़ी किए जाने के संकेत मिल रहे हैं। एसआईएमएस सॉफ्टवेयर की सक्रियता से एक बड़े फर्जीवाड़े का समय रहते खुलासा हो सका।

यदि जांच में और नाम सामने आते हैं तो कई जिलों में दर्ज मामलों की फाइलें भी खंगाली जा सकती हैं।