पटवारी 15 हजार रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार, जमाबंदी ठीक कराने के नाम पर मांगी थी घूस

करनाल के असंध में ACB ने एक पटवारी को 15 हजार रुपए रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार किया। आरोपी जमाबंदी ठीक कराने के नाम पर घूस मांग रहा था।

पटवारी 15 हजार रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार, जमाबंदी ठीक कराने के नाम पर मांगी थी घूस

➤ करनाल में पटवारी 15 हजार रिश्वत लेते रंगेहाथ गिरफ्तार
➤ जमाबंदी ठीक कराने के नाम पर मांगी थी घूस


हरियाणा के करनाल जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने असंध क्षेत्र में एक पटवारी को रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार कर लिया। आरोपी पटवारी पर आरोप है कि उसने एक व्यक्ति से जमाबंदी दुरुस्त कराने के बदले 15 हजार रुपए की रिश्वत मांगी थी। ACB ने योजनाबद्ध तरीके से ट्रैप लगाकर आरोपी को पकड़ लिया।

गिरफ्तार आरोपी की पहचान पटवारी विजय वीर के रूप में हुई है। शिकायतकर्ता गुरबख्श सिंह ने बताया कि उसने कई साल पहले अपने भाई से 2 कनाल जमीन खरीदी थी। उस समय जमाबंदी में उसका नाम दर्ज था, लेकिन नई जमाबंदी तैयार होने के बाद उसका नाम रिकॉर्ड से गायब हो गया। जब वह अपना नाम दोबारा दर्ज करवाने के लिए पटवारी के पास पहुंचा तो आरोपी ने उससे 25 हजार रुपए की रिश्वत मांग ली।

पीड़ित के अनुसार पटवारी ने बातचीत के दौरान साफ कहा कि “इसमें मेरा बहुत कम हिस्सा है, कुछ बड़े अफसरों को भी हिस्सा देना पड़ता है।” बाद में सौदा 15 हजार रुपए में तय हुआ। लगातार चक्कर काटने और परेशान होने के बाद गुरबख्श सिंह ने मामले की शिकायत एंटी करप्शन ब्यूरो को दे दी।

शिकायत मिलने के बाद ACB टीम ने पूरा जाल बिछाया। टीम ने 15 हजार रुपए के नोटों पर विशेष केमिकल लगाया और शिकायतकर्ता को पटवारखाने भेजा। बाहर पहले से तैनात टीम आरोपी की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए थी। जैसे ही शिकायतकर्ता ने आरोपी पटवारी को रिश्वत की रकम सौंपी, टीम ने तुरंत दबिश देकर उसे रंगेहाथ पकड़ लिया।

ACB ने मौके से रिश्वत की पूरी रकम भी बरामद कर ली। कार्रवाई के बाद पटवारखाने में हड़कंप मच गया और मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई। आरोपी को हिरासत में लेकर उससे पूछताछ की जा रही है।

करनाल ACB टीम के इंचार्ज प्रवीण कुमार ने बताया कि आरोपी के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है। अब यह भी जांच की जाएगी कि उसने पहले भी किसी अन्य व्यक्ति से रिश्वत ली है या नहीं। मामले में शिकायतकर्ता द्वारा कानूनगो और तहसीलदार का नाम लेने के बाद विभागीय हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है।