ईरान में सत्ता का बड़ा फैसला: अली खामेनेई के बेटे मोजतबा बने नए सुप्रीम लीडर, अमेरिका के धमकी के बावजूद घोषणा

ईरान के दिवंगत सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई को नया सर्वोच्च नेता घोषित किया गया है। धार्मिक विशेषज्ञ सभा के फैसले के बीच अमेरिका ने इस चयन का विरोध जताया है, जबकि मिडिल ईस्ट में युद्ध जारी है।

ईरान में सत्ता का बड़ा फैसला: अली खामेनेई के बेटे मोजतबा बने नए सुप्रीम लीडर, अमेरिका के धमकी के बावजूद घोषणा

ईरान की धार्मिक विशेषज्ञ सभा ने मोजतबा खामेनेई को नया सुप्रीम लीडर चुना
अली खामेनेई की मौत के बाद सत्ता हस्तांतरण, लगभग आधी सदी में दूसरा मौका
अमेरिका और डोनाल्ड ट्रंप ने जताया विरोध, मिडिल ईस्ट युद्ध के बीच बड़ा फैसला


ईरान की सत्ता में बड़ा बदलाव सामने आया है। देश के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई को ईरान का नया सुप्रीम लीडर घोषित कर दिया गया है। ईरानी सरकारी टीवी ने सोमवार तड़के इसकी आधिकारिक घोषणा की। यह फैसला ऐसे समय लिया गया है जब खामेनेई की हत्या के बाद मिडिल ईस्ट में युद्ध तेजी से उग्र होता जा रहा है और क्षेत्रीय तनाव अपने चरम पर है।

जानकारी के मुताबिक ईरान की 88 सदस्यीय धार्मिक विशेषज्ञ सभा (Assembly of Experts) ने मोजतबा खामेनेई को देश का सर्वोच्च नेता चुना। यही संस्था ईरान में सुप्रीम लीडर का चयन करती है। सरकारी टीवी पर पढ़े गए बयान में कहा गया कि उन्हें मजबूत समर्थन के आधार पर चुना गया है और देशवासियों से अपील की गई है कि वे नए नेता के पीछे एकजुट रहें। घोषणा के बाद तेहरान के कई सार्वजनिक स्थानों पर जश्न मनाते लोगों के दृश्य भी दिखाए गए।

विशेषज्ञों के अनुसार लगभग आधी सदी पहले हुई इस्लामी क्रांति के बाद यह केवल दूसरी बार सत्ता का ऐसा हस्तांतरण हुआ है। इससे पहले 1989 में अयातुल्ला खामेनेई सुप्रीम लीडर बने थे। दिलचस्प बात यह है कि मोजतबा खामेनेई ने कभी भी कोई चुनाव नहीं लड़ा और न ही किसी सरकारी पद पर रहे, लेकिन लंबे समय से उन्हें सत्ता का संभावित उत्तराधिकारी माना जाता रहा है।

कुवैत की राजधाकी कुवैत सिटी में शनिवार रात ईरानी ड्रोन अटैक के बाद एक बिल्डिंग में आग लग गई।

अब सुप्रीम लीडर बनने के बाद मोजतबा खामेनेई ईरान की सत्ता व्यवस्था के केंद्र में होंगे। देश के सभी अहम रणनीतिक और राजनीतिक फैसलों पर अंतिम निर्णय उन्हीं का होगा। साथ ही वे ईरानी सेना और शक्तिशाली रिवोल्यूशनरी गार्ड के सर्वोच्च कमांडर भी होंगे, जिससे उनकी भूमिका और प्रभाव बेहद अहम हो जाएगा।

हालांकि उनके चयन को लेकर अमेरिका की कड़ी प्रतिक्रिया सामने आई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही कह चुके हैं कि “खामेनेई का बेटा मेरे लिए स्वीकार्य नहीं है।” ट्रंप ने यह भी कहा था कि ईरान में ऐसा नेतृत्व होना चाहिए जो शांति और स्थिरता लाए। उन्होंने यहां तक कहा कि “मेरी मंजूरी के बिना कोई नया नेता ज्यादा समय तक टिक नहीं पाएगा।”

इस बीच ईरान समर्थित लेबनानी संगठन हिजबुल्लाह और ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने मोजतबा खामेनेई के समर्थन में बयान जारी किया है। हिजबुल्लाह ने टेलीग्राम पर उनकी तस्वीर साझा करते हुए उन्हें इस्लामी क्रांति का नया नेता बताया।

बहरीन पर रविवार रात ईरानी ड्रोन हमले का फुटेज।

दूसरी ओर, ईरान में नए सुप्रीम लीडर को लेकर अटकलें भी तेज रही थीं। मशहद के जुमे की नमाज के इमाम अहमद आलमोलहोदा ने दावा किया था कि विशेषज्ञों की सभा पहले ही मतदान कर चुकी है और नया नेता चुन लिया गया है। उनके अनुसार यह फैसला ईरान के संविधान के तहत अंतिम है और इसे बदला नहीं जा सकता। इस फैसले की औपचारिक घोषणा की जिम्मेदारी असेंबली के सचिवालय प्रमुख आयतोल्लाह होसैनी बुशेहरी के पास थी।

उधर मिडिल ईस्ट में युद्ध लगातार भयानक होता जा रहा है। हाल ही में अमेरिका और इजरायल की सेना ने तेहरान पर जबरदस्त हवाई हमले किए। इन हमलों का मुख्य निशाना ईरान के तेल डिपो और ऊर्जा बुनियादी ढांचे रहे। ईरान की सरकारी एजेंसी IRNA के मुताबिक दक्षिण तेहरान और उत्तर-पश्चिमी इलाके के शहरान ऑयल डिपो पर मिसाइलें गिराई गईं। हमले इतने भीषण थे कि धमाकों की आवाज पड़ोसी शहर करज तक सुनी गई।

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में तेहरान के आसमान में आग के बड़े गोले और काले धुएं के गुबार दिखाई दिए। इजरायली सेना ने दावा किया है कि उन्होंने उन ईंधन भंडारण केंद्रों को निशाना बनाया जिनका इस्तेमाल ईरानी सेना कर रही थी। विश्लेषकों का मानना है कि ऊर्जा ठिकानों पर यह हमला ईरान की आर्थिक और सैन्य क्षमता को कमजोर करने की रणनीति का हिस्सा है।

एपी की रिपोर्ट के अनुसार पिछले एक सप्ताह में जारी संघर्ष में ईरान में 1,230 से अधिक लोग, लेबनान में 290 से ज्यादा और इजरायल में लगभग एक दर्जन लोग मारे जा चुके हैं। ऐसे में मोजतबा खामेनेई के सामने अब युद्ध और अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच देश का नेतृत्व संभालने की बड़ी चुनौती होगी।