40 दिन बाद थमी अमेरिका-ईरान जंग, 2 हफ्ते का सीजफायर,होर्मुज स्ट्रेट खुला, तेल कीमतों में बड़ी गिरावट, सोने चांदी में उछाल
अमेरिका और ईरान के बीच 40 दिन की जंग के बाद 2 हफ्ते के सीजफायर पर सहमति बनी, जिसमें पाकिस्तान और चीन की मध्यस्थता अहम रही।
➤ 40 दिन की जंग के बाद अमेरिका–ईरान में 2 हफ्ते का सीजफायर
➤ डोनाल्ड ट्रम्प ने पाकिस्तान की मध्यस्थता को बताया अहम कारण
➤ होर्मुज स्ट्रेट खुलने से तेल बाजार में गिरावट और वैश्विक राहत
दुनिया की सबसे संवेदनशील और खतरनाक मानी जाने वाली भू-राजनीतिक टकरावों में से एक—अमेरिका और ईरान के बीच चल रही जंग—आखिरकार 40 दिनों बाद थमती नजर आई है। दोनों देशों ने 2 हफ्ते के अस्थायी सीजफायर पर सहमति जताई है। इस फैसले ने न सिर्फ मध्य-पूर्व, बल्कि पूरी दुनिया को राहत की सांस लेने का मौका दिया है।
इस युद्ध की शुरुआत तीव्र सैन्य हमलों, एयरस्ट्राइक और समुद्री तनाव से हुई थी, जिसमें इजराइल की सक्रिय भागीदारी भी देखी गई। जंग के दौरान कई अहम सैन्य ठिकानों, कम्युनिकेशन सेंटर और रणनीतिक इलाकों को निशाना बनाया गया, जिससे पूरे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ गई थी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह राहत अस्थायी है और आगे का रुख इस बात पर निर्भर करेगा कि सीजफायर कितना टिकाऊ साबित होता है। इस युद्ध के दौरान तेहरान और अन्य शहरों में भारी तबाही देखने को मिली। कई सैन्य और नागरिक ठिकाने प्रभावित हुए। सीजफायर के ऐलान के बाद तेहरान में लोग सड़कों पर उतर आए और जश्न मनाया। लोगों ने झंडे लहराए और राहत की सांस ली। इसी दिन ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के 40वें दिन श्रद्धांजलि कार्यक्रम भी आयोजित हुए, जिससे इस दिन का राजनीतिक और धार्मिक महत्व और बढ़ गया।
अमेरिका-ईरान युद्धविराम की घोषणा के बाद भारतीय बाजार में तेजी
अमेरिका-ईरान युद्धविराम की घोषणा के बाद भारतीय बाजार में तेजी दिखी। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स में 2,700 से अधिक अंकों का उछाल दिखा। वहीं, दूसरी ओर निफ्टी 815 अंकों की तेजी के बाद 23,900 के पार पहुंच गया। आज आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) के फैसले भी आने हैं। बाजार में निवेश करने वाले लोगों की नजर इस पर भी बनी रहेगी। दो हफ्ते के संघर्ष-विराम की घोषणा का असर रुपये पर भी दिखा। अमेरिका और ईरान के बीच सहमति बनने के बाद शुरुआती कारोबार में रुपया 50 पैसे मजबूत होकर अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 92.56 पर पहुंच गया।
ट्रम्प का बड़ा बयान और पाकिस्तान की भूमिका
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस सीजफायर को लेकर बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि यह समझौता पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और वहां के आर्मी नेतृत्व की अपील के बाद संभव हो पाया।
सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान ने दोनों देशों के बीच मध्यस्थता करते हुए एक “2 सप्ताह के युद्धविराम” का प्रस्ताव रखा था, जिसे ईरान ने स्वीकार कर लिया। इसके बाद अमेरिका और इजराइल ने भी अपने हमले रोकने पर सहमति दी।
इसके अलावा, चीन ने भी अंतिम समय में कूटनीतिक दखल देकर बातचीत को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई।
होर्मुज स्ट्रेट: जंग का सबसे बड़ा केंद्र
इस पूरे संघर्ष का सबसे अहम और संवेदनशील बिंदु रहा होर्मुज स्ट्रेट। यह वही समुद्री मार्ग है, जहां से दुनिया के करीब 20% तेल की सप्लाई होती है। जंग के दौरान इस स्ट्रेट पर शिपिंग लगभग ठप हो गई थी, जिससे वैश्विक तेल बाजार में उथल-पुथल मच गई। तेल की कीमतें तेजी से बढ़ने लगीं और कई देशों की अर्थव्यवस्था पर इसका असर दिखने लगा।
सीजफायर समझौते के तहत:
- अगले 2 हफ्तों तक होर्मुज स्ट्रेट पूरी तरह खुला रहेगा
- जहाजों की आवाजाही “कंट्रोल्ड ट्रांजिट” के तहत होगी
- ईरानी सेना सुरक्षा सुनिश्चित करेगी
- हर जहाज से लगभग 20 लाख डॉलर तक शुल्क वसूला जा सकता है
- यह राशि ओमान के साथ साझा की जाएगी
ईरान का 10 पॉइंट प्लान: रणनीतिक दबाव या कूटनीतिक जीत?
ईरान ने अमेरिका के सामने 10 बिंदुओं का विस्तृत प्रस्ताव रखा, जिसने इस समझौते की नींव रखी। इनमें शामिल हैं:
- सभी सैन्य हमलों का तत्काल अंत
- सभी आर्थिक प्रतिबंध हटाना
- विदेशों में फ्रीज संपत्तियों की वापसी
- युद्ध का स्थायी समाधान
- क्षेत्र से अमेरिकी सेना की वापसी
- युद्ध में हुए नुकसान की भरपाई
- होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान का नियंत्रण
- शर्तों के साथ सुरक्षित समुद्री आवाजाही
- प्रति जहाज शुल्क का प्रावधान
- लेबनान समेत क्षेत्रीय संघर्षों का अंत
ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने इसे अपनी “रणनीतिक जीत” बताया है और दावा किया है कि अमेरिका ने इन शर्तों को स्वीकार किया है।
वैश्विक बाजारों में जबरदस्त असर
सीजफायर की खबर आते ही दुनिया के आर्थिक बाजारों में बड़ा बदलाव देखा गया:
- कच्चा तेल 15–16% तक गिरा
- ब्रेंट क्रूड करीब 92 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया
- अमेरिकी तेल 94 डॉलर के आसपास पहुंचा
- जापान का निक्केई 225 इंडेक्स 4% चढ़ा
- दक्षिण कोरिया का कोस्पी 5% उछला
- डॉलर कमजोर हुआ, एशियाई मुद्राएं मजबूत हुईं
सीजफायर के बाद अगला बड़ा कदम 10 अप्रैल को इस्लामाबाद में होने वाली वार्ता है। यहां अमेरिका और ईरान आमने-सामने बैठकर स्थायी समाधान तलाशने की कोशिश करेंगे।
विशेषज्ञ मानते हैं कि:
- अगर यह वार्ता सफल रही, तो मध्य-पूर्व में स्थिरता आ सकती है
- अगर असफल रही, तो तनाव फिर बढ़ सकता ह
इजराइल बोला- लेबनान में जारी रहेगा संघर्ष, सीजफायर सिर्फ ईरान में
अमेरिका और ईरान के बीच हुए 2 हफ्ते के सीजफायर के बीच इजराइल ने साफ कर दिया है कि यह युद्धविराम लेबनान पर लागू नहीं होगा। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के कार्यालय ने इसकी आधिकारिक पुष्टि की है।
इजराइल ने कहा कि वह ईरान के खिलाफ 2 हफ्ते तक हमले रोकने पर सहमत है, लेकिन यह फैसला इस शर्त पर लिया गया है कि ईरान तुरंत होर्मुज स्ट्रेट खोले और अमेरिका, इजराइल व क्षेत्रीय देशों पर सभी हमले बंद करे।
बयान में कहा गया कि यह सीजफायर लेबनान को शामिल नहीं करता, यानी वहां इजराइल और हिजबुल्लाह के बीच संघर्ष जारी रह सकता है। इजराइल ने यह भी कहा कि वह अमेरिका के उस प्रयास का समर्थन करता है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि ईरान भविष्य में परमाणु, मिसाइल और आतंक से जुड़ा खतरा न बने।
साथ ही बयान में यह भी कहा गया कि ईरान के पास फिलहाल परमाणु हथियार नहीं हैं, लेकिन इसके बावजूद इजराइल उसे एक संभावित खतरे के रूप में देखता है।
सीजफायर का असर- एशियाई बाजारों में तेजी
अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर की खबर और तेल की कीमतों में आई गिरावट का असर वैश्विक बाजारों पर साफ दिखा है। एशियाई शेयर बाजारों में ट्रेडिंग की शुरुआत के साथ ही जोरदार तेजी दर्ज की गई।
जापान का निक्केई 225 इंडेक्स शुरुआती कारोबार में 4% से ज्यादा चढ़ गया, जबकि दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स 5% से ज्यादा उछल गया। निवेशकों में भरोसा लौटा है और बाजार ने राहत की सांस ली है।
वहीं, मुद्रा बाजार में अमेरिकी डॉलर कमजोर हो गया। डॉलर जापानी येन और दक्षिण कोरियाई वॉन के मुकाबले गिरा। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, सीजफायर और तेल की कीमतों में गिरावट ने बाजार को मजबूती दी है, हालांकि आगे की स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि यह सीजफायर कितना टिकता है।

Akhil Mahajan