नवजोत सिंह सिद्धू का बड़ा पारिवारिक फैसला: करोड़ों की संपत्ति बच्चों में बराबर बांटी, भावुक पोस्ट ने खींचा ध्यान

नवजोत सिंह सिद्धू ने अपनी करोड़ों की संपत्ति बेटी और बेटे में बराबर बांटने का फैसला लिया है। अमृतसर का आलीशान घर बेटी को और पटियाला का पैतृक घर बेटे को सौंपा गया है।

नवजोत सिंह सिद्धू का बड़ा पारिवारिक फैसला: करोड़ों की संपत्ति बच्चों में बराबर बांटी, भावुक पोस्ट ने खींचा ध्यान

सिद्धू ने बेटी और बेटे में बराबर बांटी संपत्ति
अमृतसर का आलीशान घर बेटी को, पटियाला का पैतृक घर बेटे को
भावुक पोस्ट में मेहनत और आशीर्वाद का जिक्र



पूर्व क्रिकेटर और राजनेता Navjot Singh Sidhu ने एक बेहद निजी लेकिन महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए अपनी करोड़ों की संपत्ति अपने दोनों बच्चों के बीच बराबर बांटने का ऐलान किया है। सोशल मीडिया पर तस्वीरों के साथ साझा किए गए इस फैसले ने न केवल उनके भावुक अंदाज बल्कि संपत्ति के विशाल आकार के कारण भी लोगों का ध्यान आकर्षित किया है।

अपने बयान में सिद्धू ने बताया कि उन्होंने अपनी बेटी राबिया सिद्धू और बेटे करण सिद्धू के बीच संपत्ति का बराबर बंटवारा किया है। इसके तहत अमृतसर स्थित उनका भव्य और आलीशान घर बेटी राबिया को दिया गया है, जबकि पटियाला स्थित पैतृक घर बेटे करण को सौंपा गया है।

सिद्धू ने अपने पोस्ट में इस फैसले के पीछे की भावना को भी विस्तार से साझा किया। उन्होंने लिखा कि पटियाला का पैतृक घर उनके जीवन के शुरुआती 36 वर्षों का गवाह है, जहां उन्होंने अपने जीवन के कई महत्वपूर्ण पल बिताए। यह घर उनके संघर्ष, मेहनत और पारिवारिक जुड़ाव का प्रतीक रहा है। क्रिकेट करियर से लेकर कमेंट्री और टेलीविजन जगत तक की उनकी यात्रा इस घर से जुड़ी यादों से भरी हुई है।

वहीं अमृतसर स्थित उनका घर भी कम चर्चा में नहीं है। यह आलीशान आवास करीब 49,500 वर्ग फुट क्षेत्र में फैला हुआ है और 2014-15 के दौरान लगभग 25 करोड़ रुपये की लागत से बनाया गया था। इस घर में स्विमिंग पूल, जिम, स्पा और एक समर्पित शिव मंदिर जैसी सुविधाएं मौजूद हैं, जो इसे केवल एक लक्ज़री हाउस ही नहीं बल्कि आध्यात्मिक माहौल वाला निवास भी बनाती हैं। इस संपत्ति के चारों ओर देश के अलग-अलग हिस्सों से लाए गए पेड़ इसकी खूबसूरती को और बढ़ाते हैं।

सिद्धू ने अपने संदेश में यह भी कहा कि ये संपत्तियां उन्हें देवी पार्वती के आशीर्वाद से मिली हैं, इसलिए वे इन्हें अपने बच्चों को सौंप रहे हैं। उन्होंने अपने जीवन के विभिन्न पड़ावों का जिक्र करते हुए बताया कि राजनीति से उन्होंने कभी आर्थिक लाभ नहीं लिया, बल्कि यह सब उनकी मेहनत और समर्पण का परिणाम है। इस भावुक और पारिवारिक फैसले ने सोशल मीडिया पर चर्चा छेड़ दी है, जहां लोग इसे एक जिम्मेदार और प्रेरणादायक कदम के रूप में देख रहे हैं।