महिला अफसरों को सुप्रीम कोर्ट की बड़ी राहत, पेंशन का आदेश स्थायी कमीशन से इनकार भेदभाव

सुप्रीम कोर्ट ने महिला SSC अफसरों को बड़ी राहत देते हुए 20 साल की सेवा मानकर पेंशन देने का आदेश दिया और स्थायी कमीशन से वंचित करना भेदभाव बताया।

महिला अफसरों को सुप्रीम कोर्ट की बड़ी राहत, पेंशन का आदेश स्थायी कमीशन से इनकार भेदभाव

सुप्रीम कोर्ट ने महिला अफसरों को स्थायी कमीशन का हक माना
SSC महिला अफसरों को 20 साल की सेवा मानकर पेंशन देने का आदेश
कोर्ट बोला- PC से वंचित करना सिस्टमिक भेदभाव का नतीजा


सुप्रीम कोर्ट ने भारतीय सेना, नौसेना और वायुसेना में शॉर्ट सर्विस कमीशन (SSC) के तहत कार्यरत महिला अफसरों को बड़ी राहत देते हुए ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि महिला अफसरों को परमानेंट कमीशन (PC) से वंचित करना सिस्टमिक भेदभाव था और यह उनकी योग्यता की कमी नहीं, बल्कि व्यवस्था की खामी का परिणाम था।कोर्ट ने आदेश दिया कि जिन महिला अफसरों को स्थायी कमीशन नहीं मिला और वे सेवा छोड़ चुकी हैं, उन्हें 20 साल की सेवा पूरी मानते हुए पेंशन और अन्य सभी लाभ दिए जाएं।

सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसमें जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस उज्जल भुइयां और जस्टिस एन. कोटिस्वर सिंह शामिल थे, ने महिला अफसरों को तीन प्रमुख राहतें दीं—

  • जिन महिला अफसरों को पहले ही PC मिल चुका है, उनका स्टेटस बरकरार रहेगा
  • जो अफसर सेवा से बाहर हो चुकी हैं, उन्हें 20 साल की सेवा मानकर पेंशन मिलेगी (एरियर नहीं)
  • वर्तमान में कार्यरत महिला अफसरों को 60% कटऑफ पूरा करने पर PC दिया जाएगा

कोर्ट ने सेना, नौसेना और वायुसेना में मूल्यांकन प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए—

  • आर्मी: ACR (परफॉर्मेंस रिपोर्ट) पूर्वाग्रह के साथ लिखी गई, जिससे महिलाओं की मेरिट प्रभावित हुई
  • नेवी: मूल्यांकन प्रक्रिया पारदर्शी नहीं थी, मापदंड स्पष्ट नहीं बताए गए
  • एयरफोर्स: प्रदर्शन मानदंड जल्दबाजी में लागू किए गए, प्रक्रिया में खामियां रहीं

कोर्ट ने कहा कि महिलाओं को जरूरी ट्रेनिंग और अवसर नहीं दिए गए, जिससे उनके करियर पर नकारात्मक असर पड़ा।यह मामला करीब 23 साल पुराना है, जिसकी शुरुआत 2003 में बबीता पुनिया द्वारा दायर याचिका से हुई थी। 2010 में दिल्ली हाईकोर्ट ने महिलाओं के पक्ष में फैसला सुनाते हुए स्थायी कमीशन देने का आदेश दिया था, जिसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।कोर्ट ने 2019 की उस नीति पर भी अप्रत्यक्ष टिप्पणी की, जिसमें केवल मार्च 2019 के बाद भर्ती महिला अफसरों को ही PC का लाभ देने की बात कही गई थी। इससे कई वरिष्ठ महिला अफसर इस अधिकार से वंचित रह गई थीं।

  • थलसेना: महिलाओं को सीमित शाखाओं में ही अवसर, कॉम्बैट रोल अब भी सीमित
  • वायुसेना: फाइटर जेट और फ्लाइंग रोल में महिलाओं की एंट्री
  • नौसेना: लॉजिस्टिक्स, एयर ट्रैफिक कंट्रोल और पायलट जैसे रोल में तैनाती