शनि का मीन राशि में गोचर, 2026 में इन राशियों पर रहेगा सबसे ज्यादा असर
शनि देव मीन राशि में गोचर कर रहे हैं। 2026 में साढ़ेसाती और ढैय्या से प्रभावित राशियों के लिए लाल किताब के सरल और प्रभावी उपाय जानें।
- शनि देव मीन राशि में गोचर कर रहे हैं और 2026 में पूरे वर्ष यहीं रहेंगे
- मेष, कुंभ, मीन पर साढ़ेसाती और सिंह, धनु पर शनि की ढैय्या प्रभावी
- लाल किताब के सरल उपायों से शनि के अशुभ प्रभावों से राहत संभव
शनि देव इस समय मीन राशि में गोचर कर रहे हैं और वर्ष 2026 में पूरे साल इसी राशि में विराजमान रहेंगे। वर्तमान में शनि की साढ़ेसाती मेष, कुंभ और मीन राशियों पर चल रही है, जबकि शनि की ढैय्या सिंह और धनु राशियों पर प्रभाव डाल रही है। ऐसे में इन राशियों के जातकों को आने वाले वर्ष में विशेष सतर्कता रखने की आवश्यकता है।
शनि ग्रह से लोग भय इसलिए खाते हैं क्योंकि शनिदेव व्यक्ति को उसके अच्छे और बुरे कर्मों का फल अवश्य देते हैं। प्रारब्ध के कुछ कर्म ऐसे होते हैं जिनका फल भोगना ही पड़ता है। हालांकि, यदि पूर्व जन्म में कोई बड़ा या जघन्य अपराध नहीं किया गया हो, तो शनिदेव के दंड से बचाव संभव माना जाता है। लाल किताब में ऐसे कई सरल और प्रभावी उपाय बताए गए हैं, जिन्हें अपनाकर शनि के अशुभ प्रभावों को शांत किया जा सकता है।
शनि ग्रह और 12 भावों में प्रभाव की बात करें तो प्रथम भाव में शनि होने पर जातक के व्यक्तित्व पर नकारात्मक असर पड़ता है और तीसरे, सातवें, आठवें और दसवें भाव के फल प्रभावित होते हैं। दूसरे भाव में शनि धन और परिवार से जुड़े सुखों को नुकसान पहुंचाता है। तीसरे भाव में भाग्य को बाधित करता है, जबकि चौथे भाव में शनि अपेक्षाकृत शांत रहता है।
पांचवें भाव में शनि भ्रम और भटकाव उत्पन्न करता है। छठे भाव में घमंड बढ़ाकर नुकसान देता है। सातवें भाव में शनि का प्रभाव अनिश्चित रहता है। आठवें भाव में शनि लंबी आयु देता है, लेकिन घटनाएं अचानक होती हैं। नौवें भाव में शनि का फल बुध और गुरु की स्थिति पर निर्भर करता है।
दशम और एकादश भाव में शनि सामान्यतः अच्छा फल देता है। वहीं द्वादश भाव में शनि नींद, दांपत्य और स्वतंत्रता से जुड़े कष्ट उत्पन्न कर सकता है, यहां तक कि जेल या तलाक जैसी स्थितियां भी बना सकता है।
यदि शनि सूर्य के घर, शत्रु ग्रह के घर, राहु के साथ, या शत्रु ग्रहों की युति में हो, तो वह अशुभ फल देता है। शनि की आठवीं दृष्टि या किसी ग्रह की शनि पर टक्कर भी जीवन में समस्याएं बढ़ाती है। हालांकि, यदि शनि शुभ हो तो वह किसी भी भाव में बैठकर अच्छे परिणाम देता है।
शनिवार को ऐसे कार्यों से दूरी बनाएं जिन्हें शनि के मंदे कर्म कहा गया है। इसमें शराब सेवन, मांसाहार, जुआ-सट्टा, ब्याज का धंधा, पराई स्त्री पर गलत दृष्टि, विधवा महिला से छल, मंदिर या देवताओं का अपमान, गरीब और मजदूर का अपमान, किसी भी प्राणी को कष्ट देना, पिता और दादा से संबंध खराब करना तथा गंदे वस्त्र पहनना शामिल है।
छाया दान के अंतर्गत 11 शनिवार शनि मंदिर जाकर सरसों के तेल में अपना चेहरा देखकर वह तेल शनिदेव के चरणों में अर्पित करें और क्षमा प्रार्थना करें।
यदि शनि अशुभ फल दे रहा हो तो सरसों का तेल, काले तिल, नीले फूल और शमी के पत्ते अर्पित करें। जरूरतमंदों को काले वस्त्र, कंबल, जूते-चप्पल, उड़द दाल या लोहे की वस्तुएं दान करें।
काल भैरव को प्रसाद अर्पित कर शनिदेव से रक्षा की प्रार्थना करें। भैरव मंदिर में शराब या कच्चा दूध में से कोई एक अर्पित किया जा सकता है।
हर शनिवार शाम पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाएं। सात या ग्यारह परिक्रमा करें और जल अर्पित करें।
कौवों और भैंस की सेवा करना भी शनि को प्रसन्न करता है। कौवों को भोजन और भैंस या भैंसे को रोटी खिलाना लाभकारी माना जाता है।
यदि कुंडली में शनि किसी ग्रह को आठवीं दृष्टि से प्रभावित कर रहा हो, तो उस ग्रह के उपाय अवश्य करें। जैसे मंगल प्रभावित हो तो हनुमान चालीसा का नित्य पाठ करें और मंगल से संबंधित वस्तुओं का दान करें।
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