हरियाणा के सुमित ने मंगोलिया में लहराया तिरंगा, उलानबटार ओपन में जीता कांस्य पदक
पानीपत जिले के इसराना विधानसभा और मतलौडा ब्लॉक के अदियाना गांव के पहलवान सुमित ने मंगोलिया में आयोजित 2026 उलानबटार ओपन रैंकिंग सीरीज में 57 किलोग्राम वर्ग में कांस्य पदक जीतकर भारत का नाम रोशन किया।
- सोनीपत के पहलवान सुमित ने मंगोलिया में भारत के लिए जीता कांस्य पदक
- 57 किलोग्राम फ्रीस्टाइल वर्ग में कजाकिस्तान के पहलवान को 6-3 से हराया
- साधारण परिवार से निकलकर अंतरराष्ट्रीय मंच पर चमका हरियाणा का लाल
हरियाणा के पानीपत जिले के इसराना विधानसभा और मतलौडा ब्लॉक के अदियाना गांव के कसांडा गांव के युवा पहलवान सुमित ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन करते हुए भारत का नाम रोशन किया है। सुमित ने मंगोलिया में आयोजित 2026 उलानबटार ओपन रैंकिंग सीरीज में पुरुषों के 57 किलोग्राम फ्रीस्टाइल वर्ग में कांस्य पदक जीतकर देश और प्रदेश को गौरवान्वित किया है। हर कोई बधाई दे रहा है परिवार के सदस्यों को भी लगातार घर पहुंच कर लोग बधाई दे रहे हैं।
चार दिनों तक चले इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट का समापन 7 जून को हुआ। प्रतियोगिता के दौरान सुमित ने कठिन मुकाबलों में शानदार संघर्ष का परिचय दिया। क्वार्टर फाइनल में हार के बावजूद उन्होंने दमदार वापसी करते हुए पोडियम पर जगह बनाई।
कांस्य पदक मुकाबले में सुमित का सामना कजाकिस्तान के पहलवान अब्जल ओकेनोव से हुआ। मुकाबला काफी रणनीतिक और चुनौतीपूर्ण रहा, लेकिन भारतीय पहलवान ने पूरे मैच में नियंत्रण बनाए रखा और तकनीकी अंकों के आधार पर 6-3 से जीत दर्ज कर कांस्य पदक अपने नाम कर लिया।
टूर्नामेंट के शुरुआती दौर में सुमित ने दक्षिण कोरिया के सांगबोम हान को तकनीकी श्रेष्ठता के आधार पर हराया था। इसके बाद क्वार्टर फाइनल में उनका मुकाबला रूस के मूसा मेख्तिखानोव से हुआ, जहां उन्हें 7-1 से हार का सामना करना पड़ा। खास बात यह रही कि मूसा बाद में इस वर्ग के स्वर्ण पदक विजेता बने। हार के बाद सुमित ने वापसी करते हुए रेपेचेज और कांस्य पदक मुकाबले में शानदार प्रदर्शन किया।
सुमित की यह उपलब्धि ऐसे समय आई है जब भारतीय फ्रीस्टाइल कुश्ती दल ने मंगोलिया में शानदार प्रदर्शन करते हुए कुल 16 पदक अपने नाम किए। इनमें 8 स्वर्ण पदक भी शामिल रहे। अंतिम दिन दिनेश ढांखड़ ने 125 किलोग्राम वर्ग में स्वर्ण पदक जीता, जबकि दीपक ने 61 किलोग्राम वर्ग में गोल्ड अपने नाम किया। वहीं मोहित कुमार ने भी कांस्य पदक हासिल किया।
सुमित की सफलता की कहानी संघर्ष और मेहनत से भरी हुई है। वह सोनीपत के कसांडा गांव के रहने वाले हैं और एक बेहद साधारण परिवार से आते हैं। उनके पिता सुरेंद्र मलिक बस चालक हैं। आर्थिक चुनौतियों के बावजूद परिवार ने सुमित के सपनों को उड़ान देने में कोई कमी नहीं छोड़ी।
वर्तमान में सुमित खरखौदा स्थित अश्वनी अखाड़ा में कोच अश्वनी दहिया के मार्गदर्शन में प्रशिक्षण लेते हैं। उनकी मेहनत, अनुशासन और लगन का ही परिणाम है कि उन्होंने कम उम्र में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी मजबूत पहचान बनाई है।
खेल विशेषज्ञों का मानना है कि सुमित की यह सफलता आगामी 2026 एशियाई खेलों से पहले भारतीय कुश्ती दल के लिए बड़ा मनोबल बढ़ाने वाली साबित होगी। हरियाणा के इस युवा पहलवान से भविष्य में और भी बड़ी उपलब्धियों की उम्मीद की जा रही है।
Akhil Mahajan