जज की गाड़ी जाम में फंसी, चंडीगढ़ DGP तलब: हाईकोर्ट ने पूछा- संवेदनशील क्षेत्र में मार्च की अनुमति किसने दी?
चंडीगढ़ में हरियाणा विधानसभा घेराव के दौरान जाम में जजों की गाड़ियां फंसने पर पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट ने DGP को तलब किया है और प्रदर्शन की अनुमति व सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं।
■ जजों की गाड़ियां जाम में फंसीं, हाईकोर्ट ने DGP को किया तलब
■ विधानसभा घेराव के दौरान संवेदनशील एरिया में पहुंचा प्रदर्शन
■ HC ने पूछा- परमिशन किसने दी और ट्रैफिक प्लान क्या था
हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र के दौरान सोमवार को चंडीगढ़ में उस समय अफरा-तफरी की स्थिति बन गई, जब विधानसभा का घेराव करने पहुंचे प्रदर्शनकारियों के कारण शहर में भारी जाम लग गया। स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के कई जजों की गाड़ियां भी ट्रैफिक में फंस गईं। मामले को गंभीरता से लेते हुए हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया और चंडीगढ़ DGP को तलब कर लिया।
सुनवाई के दौरान जस्टिस संदीप मोदगिल की बेंच ने कानून-व्यवस्था और सुरक्षा प्रबंधन पर कड़े सवाल उठाए। कोर्ट ने पूछा कि प्रदर्शनकारियों को हाईकोर्ट और विधानसभा जैसे संवेदनशील क्षेत्र तक आने की अनुमति किसने दी। साथ ही यह भी पूछा गया कि ट्रैफिक और सुरक्षा के लिए पहले से क्या इंतजाम किए गए थे। अदालत ने डीजीपी Surendra Singh Yadav (नोट: नाम उदाहरणार्थ) को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के निर्देश दिए।
दरअसल, नेता प्रतिपक्ष Bhupinder Singh Hooda की अगुआई में कांग्रेस विधायकों ने सुबह करीब 10 बजे एमएलए हॉस्टल से विधानसभा तक पैदल मार्च निकाला। प्रदर्शन रोजगार नीतियों, पेंशन और अन्य मुद्दों को लेकर था। हाथों में तख्तियां लेकर नारेबाजी करते प्रदर्शनकारी विधानसभा की ओर बढ़े। पुलिस ने बैरिकेड्स लगाए और भारी बल तैनात किया, लेकिन बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने से हाईकोर्ट के आसपास सड़कों पर लंबा जाम लग गया।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वे सरकार की नीतियों के खिलाफ लोकतांत्रिक तरीके से विरोध दर्ज कराने आए थे। हालांकि, ट्रैफिक व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई और संवेदनशील संस्थानों की सुरक्षा पर भी सवाल खड़े हुए।
हाईकोर्ट के कड़े रुख के बाद अब चंडीगढ़ पुलिस प्रशासन को विस्तृत रिपोर्ट पेश करनी होगी, जिसमें यह स्पष्ट करना होगा कि अनुमति किस स्तर पर दी गई, सुरक्षा और यातायात प्रबंधन के क्या इंतजाम थे, और भविष्य में ऐसी स्थिति से निपटने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे। यह मामला अब केवल राजनीतिक प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि प्रशासनिक जवाबदेही और कानून-व्यवस्था के मुद्दे के रूप में उभर कर सामने आया है।
Akhil Mahajan