अस्पताल गेट के बाहर चबूतरे पर बैठी महिला का हुआ गर्भपात, स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं पर सवाल

घरौंडा CHC के बाहर 6 माह की गर्भवती महिला का गर्भपात। परिजनों ने लापरवाही के आरोप लगाए, डॉक्टरों ने खून की कमी बताई वजह। मामले की जांच की मांग।

अस्पताल गेट के बाहर चबूतरे पर बैठी महिला का हुआ गर्भपात, स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं पर सवाल


➤ परिजनों ने डॉक्टरों पर लापरवाही के लगाए आरोप
➤ डॉक्टर बोले खून की कमी और झटके से हो सकता है गर्भपात

हरियाणा के घरौंडा स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) के बाहर रविवार को एक दर्दनाक घटना सामने आई। करीब छह माह की गर्भवती महिला का अस्पताल गेट के बाहर ही गर्भपात हो गया। घटना के बाद अस्पताल परिसर में अफरा-तफरी मच गई और स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े हो गए।

चेकअप के बाद लौटते वक्त बढ़ा दर्द

महिला की पहचान 20 वर्षीय पिंकी पत्नी अमर कुमार के रूप में हुई है, जो मूल रूप से समस्तीपुर जिले के गांव बबईयां की रहने वाली है। फिलहाल वह घरौंडा में लक्ष्मी धर्मकांटा के पास किराये के मकान में रहती है। पिंकी करीब छह माह की गर्भवती थी और पेट दर्द की शिकायत के चलते परिवार के साथ सरकारी अस्पताल पहुंची थी।

परिजनों के अनुसार, इमरजेंसी में उसे इंजेक्शन लगाया गया और अगले दिन दोबारा आने को कहा गया। इसके बाद उसे ओपीडी में भेजा गया। जब वह ओपीडी से बाहर निकली और अस्पताल गेट के पास पहुंची, तो अचानक पेट में तेज दर्द शुरू हो गया। वह पास के पेड़ के चबूतरे पर बैठ गई। कुछ ही देर में गेट के बाहर ही गर्भ गिर गया।

गेट के बाहर मचा हड़कंप

पिंकी के ससुर रामदयाल ने बताया कि यह उसका पहला बच्चा था। दर्द बढ़ने पर वह अपनी पत्नी को पिंकी के पास छोड़कर जूस लेने चले गए थे। लौटने पर देखा कि गर्भ बाहर आ चुका था और पिंकी की हालत गंभीर थी। आसपास मौजूद लोगों ने तुरंत अस्पताल स्टाफ को सूचना दी।

सूचना मिलते ही डॉक्टर और नर्स अस्पताल से बाहर आए और महिला को प्रसूति गृह में भर्ती किया गया। प्राथमिक उपचार के बाद उसे बेहतर इलाज के लिए करनाल के सरकारी अस्पताल रेफर कर दिया गया।

परिजनों ने लगाए लापरवाही के आरोप

परिजनों का आरोप है कि अस्पताल प्रबंधन ने उचित देखभाल नहीं की। उनका कहना है कि संभव है गलत दवा या पर्याप्त निगरानी न होने के कारण यह स्थिति बनी। रामदयाल ने कहा कि वे ज्यादा पढ़े-लिखे नहीं हैं और अस्पताल स्टाफ के निर्देशों पर ही चलते हैं। यदि समय रहते निगरानी की जाती तो शायद यह हादसा टल सकता था।

घटना के समय मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों ने भी जांच और कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि गर्भवती महिला को अस्पताल परिसर में ही इस स्थिति का सामना करना पड़ा, जो स्वास्थ्य सेवाओं की गंभीर कमी को दर्शाता है।

डॉक्टर का पक्ष

सीएचसी के डॉक्टर राजेंद्र सिंह ने बताया कि महिला को गर्भपात के बाद अस्पताल के अंदर लाया गया था। जांच में उसमें खून की कमी पाई गई। बच्चे का वजन करीब 500 ग्राम था और वह लगभग 5-6 महीने का था। डॉक्टर के अनुसार, चलते समय किसी प्रकार का झटका लगने से भी गर्भपात की संभावना हो सकती है। महिला को प्राथमिक उपचार के बाद रेफर किया गया।

स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर सवाल

इस घटना ने सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में आपातकालीन देखभाल और गर्भवती महिलाओं की निगरानी को लेकर बहस छेड़ दी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि गर्भवती महिलाओं के लिए विशेष प्रोटोकॉल और सतत निगरानी सुनिश्चित की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से बचा जा सके।