हरियाणा के 28 हजार रसोइया सह-सहायकों को बड़ी राहत

हरियाणा में 28 हजार रसोइया सह-सहायकों को राहत। शिक्षा विभाग का आदेश, अब अन्य काम नहीं कराए जाएंगे। साल में दो बार मेडिकल जांच और समायोजन की व्यवस्था।

हरियाणा के 28 हजार रसोइया सह-सहायकों को बड़ी राहत
  • हरियाणा के 28 हजार रसोइया सह-सहायकों को बड़ी राहत, अब अन्य काम नहीं कराए जाएंगे
  • शिक्षा विभाग ने सभी DEEO को पत्र जारी कर सख्ती से आदेश लागू करने को कहा
  • साल में दो बार अनिवार्य चिकित्सा जांच, समायोजन की भी व्यवस्था तय

हरियाणा के सरकारी स्कूलों में कार्यरत रसोइया सह-सहायकों को शिक्षा विभाग ने बड़ी राहत दी है। मध्याह्न भोजन योजना के तहत काम कर रहे करीब 28 हजार रसोइया सह-सहायकों से अब भोजन तैयार करने के अलावा कोई अन्य कार्य नहीं कराया जाएगा। इस संबंध में हरियाणा शिक्षा विभाग ने सभी जिला प्राथमिक शिक्षा अधिकारियों (DEEO) को स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए हैं।

विभागीय पत्र में कहा गया है कि रसोइया सह-सहायकों को सफाई, घास कटवाने, छत साफ करने या अन्य गैर-शैक्षणिक कार्यों में न लगाया जाए। लंबे समय से इस बात की शिकायतें सामने आ रही थीं कि स्कूलों में इन कर्मचारियों से उनके दायित्व से बाहर का काम कराया जा रहा है।

शिक्षा विभाग ने यह भी सुनिश्चित करने को कहा है कि सभी रसोइया सह-सहायकों की साल में दो बार चिकित्सा जांच कराई जाए। यह जांच नियमित रूप से कराना अनिवार्य होगा ताकि भोजन की गुणवत्ता और कर्मचारियों के स्वास्थ्य को लेकर कोई लापरवाही न हो।

नई व्यवस्था के तहत समायोजन का भी प्रावधान किया गया है। यदि किसी स्कूल में छात्रों की संख्या कम होने के कारण किसी रसोइया सह-सहायक को हटाया जाता है और उसी गांव के किसी अन्य स्कूल में उसी अवधि में पद खाली होता है, तो संबंधित कर्मचारी को वहां समायोजित किया जा सकेगा।

मिड-डे मील वर्कर्स यूनियन लंबे समय से अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रही है। यूनियन की प्रमुख ललिता खन्ना का कहना है कि कर्मचारियों से केवल मिड-डे मील से जुड़े काम ही कराए जाने चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कई स्कूलों में रसोइयों से पूरे दिन रुकवाकर सफाई, मैदान में घास कटवाने और अन्य कार्य कराए जाते हैं।

यूनियन ने मानदेय को लेकर भी नाराजगी जताई है। वर्तमान में रसोइया सह-सहायकों को केवल 10 महीने का मानदेय दिया जाता है। कर्मचारी मांग कर रहे हैं कि शिक्षा विभाग के अन्य कर्मचारियों की तरह उन्हें भी 12 महीने का मानदेय दिया जाए।

मिड-डे मील वर्कर्स यूनियन के महासचिव जय भगवान ने बताया कि कर्मचारियों को प्रति माह करीब 7 हजार रुपये मानदेय मिलता है, वह भी समय पर नहीं दिया जाता। उन्होंने कहा कि बच्चों की संख्या घटने, स्कूल बंद होने या स्कूलों के विलय के नाम पर कर्मचारियों को नौकरी से नहीं निकाला जाना चाहिए।

विभागीय अधिकारियों का कहना है कि रसोइया सह-सहायकों से अतिरिक्त काम कराने की शिकायतों को गंभीरता से लिया गया है। इसी कारण स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं और अब आदेशों का सख्ती से पालन कराया जाएगा। हालांकि मानदेय में देरी का मुद्दा अलग स्तर पर विचाराधीन बताया गया है।