Video: 900 साल पुराने हिसार के कनोह मंदिर में अनोखा तप: महाराज ऋषिगिरी 41 दिन तक 24 घंटे खड़े रहेंगे

हिसार के कन्नौद गांव स्थित 900 साल पुराने बाबा शंकरनाथ डेरे में महाराज ऋषिगिरी 41 दिनों तक लगातार खड़े रहकर तपस्या कर रहे हैं। 2 मार्च को भंडारे का आयोजन होगा।

Video: 900 साल पुराने हिसार के कनोह मंदिर में अनोखा तप: महाराज ऋषिगिरी 41 दिन तक 24 घंटे खड़े रहेंगे

➤ हिसार के कन्नौद गांव स्थित बाबा शंकरनाथ डेरा में जारी कठिन तपस्या

➤ महाराज ऋषिगिरी बीते 14 दिन से लगातार खड़े, 41 दिन तक तप का संकल्प

➤ तप पूर्ण होने पर 2 मार्च को विशाल भंडारे का आयोजन


हरियाणा के हिसार जिले के कन्नौद गांव में स्थित करीब 900 साल पुराने बाबा शंकरनाथ डेरे में इन दिनों एक अनोखी और कठिन तपस्या लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। यहां महाराज ऋषिगिरी बीते 14 दिनों से लगातार 24 घंटे खड़े रहकर तपस्या कर रहे हैं और उन्होंने संकल्प लिया है कि वह पूरे 41 दिनों तक इसी तरह तप करेंगे।

यह डेरा हिसार और आसपास के इलाकों में गहरी आस्था का केंद्र माना जाता है। मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई मनोकामनाएं पूरी होती हैं। महाराज ऋषिगिरी की यह तपस्या भगवान भजन और आत्मिक साधना से जुड़ी बताई जा रही है। स्वयं महाराज का कहना है कि यह तप शरीर से अधिक मन और आस्था से जुड़ा है। यदि मन भगवान में लगा रहे, तो कठिन से कठिन तप भी संभव हो जाता है।

लगातार खड़े रहने के कारण महाराज के पैरों में सूजन भी दिखाई दे रही है, लेकिन इसके बावजूद उनका संकल्प अडिग है। डेरे में मौजूद भक्तजन लगातार उनकी निगरानी कर रहे हैं ताकि उन्हें किसी प्रकार की परेशानी न हो। गांव और आसपास के क्षेत्रों से श्रद्धालु रोजाना यहां पहुंच रहे हैं और इस अनोखी तपस्या के साक्षी बन रहे हैं।

डेरे के इतिहास की बात करें तो बताया जाता है कि इसकी स्थापना सूर्यनाथ महाराज के शिष्य बाबा शंकरनाथ ने की थी। इसके बाद ऋषिनाथ, हृदयनाथ सहित कई संतों की परंपरा यहां चली आ रही है। यह डेरा सदियों से भक्ति, तप और सेवा का केंद्र रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि पीढ़ियों से यहां भंडारे और धार्मिक अनुष्ठान होते आ रहे हैं, जिनमें दूर-दूर से श्रद्धालु शामिल होते हैं।

स्थानीय भक्त कुलदीप और अन्य ग्रामीणों ने बताया कि उन्होंने अपने जीवन में पहली बार इस तरह की तपस्या देखी है। उनके अनुसार महाराज की साधना से पूरे गांव में सकारात्मक ऊर्जा और आस्था का माहौल बना हुआ है। लोग इसे गांव के लिए सौभाग्य मान रहे हैं।

महाराज ऋषिगिरी ने बताया कि 41 दिनों की तपस्या पूरी होने के बाद 2 मार्च को डेरे में विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा। इस भंडारे में आसपास के गांवों ही नहीं, बल्कि दूर-दराज से श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है। फिलहाल, यह तपस्या पूरे क्षेत्र में आस्था और चर्चा का केंद्र बनी हुई है।