हिसार महापंचायत खत्म, 21 सदस्यीय कमेटी बनी- सरकार को 5 दिन का अल्टीमेटम, खाप का बड़ा ऐलान
हिसार में छात्र हित महापंचायत समाप्त होने के बाद 21 सदस्यीय कमेटी बनाई गई और सरकार को 5 दिन का अल्टीमेटम दिया गया, जिसमें छात्रों की बहाली सहित कई मांगें रखी गईं।
➤ छात्र हित महापंचायत में 21 सदस्यीय कमेटी का गठन
➤ सरकार को 5 दिन का अल्टीमेटम, मांगें नहीं मानी तो बड़ा फैसला
➤ छात्रों की बहाली, केस वापसी और SIT जांच की प्रमुख मांग
हिसार की गुरु जंभेश्वर यूनिवर्सिटी (GJU) में हुए विवाद के बाद सोमवार को क्रांतिमान पार्क में जननायक जनता पार्टी (JJP) की ओर से आयोजित छात्र हित महापंचायत समाप्त हो गई। महापंचायत में कई बड़े फैसले लिए गए, जिनमें सबसे अहम 21 सदस्यीय कमेटी का गठन रहा। यह कमेटी जल्द ही कमिश्नर और एडीजीपी से मुलाकात कर छात्रों की मांगों को उनके सामने रखेगी।
महापंचायत में उपस्थित नेताओं और सामाजिक संगठनों ने सरकार को स्पष्ट रूप से 5 दिन का अल्टीमेटम दिया। चेतावनी दी गई कि यदि तय समय में मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो खाप और छात्र संगठन मिलकर बड़ा फैसला लेंगे।
महापंचायत में छात्रों से जुड़े कई मुद्दों को प्रमुखता से उठाया गया। सबसे पहले सस्पेंड किए गए सभी छात्रों की तुरंत बहाली की मांग रखी गई। इसके साथ ही हिसार और कुरुक्षेत्र में छात्रों पर दर्ज मुकदमों को वापस लेने की बात कही गई।
छात्र संगठनों ने यह भी मांग उठाई कि यूनिवर्सिटी परिसर में सभी संगठनों को गतिविधियों की अनुमति दी जाए। इसके अलावा शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी अहम सुझाव सामने आए। प्रदेश में फीस नियंत्रण के लिए फीस रेगुलेटरी बोर्ड के गठन की मांग की गई।
महापंचायत में छात्रों के लिए एक्टिविटी सेंटर बनाने और मेस में मिलने वाले भोजन की गुणवत्ता की जांच कराने की भी मांग रखी गई। वहीं, पुलिस और छात्रों के बीच हुए विवाद की निष्पक्ष जांच के लिए SIT गठित करने की मांग भी जोर-शोर से उठी।
महापंचायत के दौरान कई नेताओं ने मंच से अपने विचार रखे। दिग्विजय चौटाला ने सवाल उठाते हुए कहा कि क्या यूनिवर्सिटी केवल कुछ संगठनों के लिए ही सीमित है। उन्होंने आरोप लगाया कि छात्रों के खिलाफ कार्रवाई एकतरफा की गई है।
वहीं, पूर्णिया से सांसद पप्पू यादव ने कहा कि इस आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर उठाया जाएगा और देशभर से समर्थन मिलेगा। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ हरियाणा नहीं बल्कि पूरे देश के छात्रों का मुद्दा है।
पूर्व डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला ने भी आरोप लगाया कि यूनिवर्सिटी में एक विशेष विचारधारा को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि छात्रों के अधिकारों के लिए यह लड़ाई जारी रहेगी।
पूरा विवाद 15 अप्रैल को यूनिवर्सिटी में हुए प्रदर्शन के बाद शुरू हुआ था। कार्यक्रम की अनुमति न मिलने पर हुए विरोध प्रदर्शन में तोड़फोड़ के आरोप लगे थे। इसके बाद कई छात्रों और नेताओं पर केस दर्ज हुए और गिरफ्तारियां भी हुईं। हालांकि, बाद में उन्हें जमानत मिल गई।
इस मामले में गठित SIT ने अपनी रिपोर्ट तैयार कर ली है। सूत्रों के अनुसार, संबंधित पुलिस अधिकारी को क्लीन चिट दी गई है। अब सभी की नजरें सरकार के अगले कदम पर टिकी हुई हैं।
Akhil Mahajan