ईरान जंग में अमेरिका अकेला? NATO ने बनाई दूरी, ट्रम्प की बढ़ी मुश्किलें
ईरान के साथ जंग में अमेरिका को झटका लगा है। NATO देशों ने होर्मुज में मदद से इनकार कर दिया, जिससे ट्रम्प पर कूटनीतिक दबाव बढ़ गया है।
➤ नाटो देशों ने होर्मुज में वॉरशिप भेजने से किया इनकार
➤ तेल सप्लाई रुकने से वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव
➤ ट्रम्प पर बढ़ा कूटनीतिक दबाव, जंग का अंत अभी अनिश्चित
ईरान के साथ जारी संघर्ष में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प अब खुद को कूटनीतिक रूप से घिरा हुआ पा रहे हैं। शुरुआती दिनों में जहां अमेरिका को यह युद्ध बड़ी सफलता की ओर बढ़ता नजर आ रहा था, वहीं अब 17 दिन बाद हालात पूरी तरह बदल चुके हैं और जंग का कोई स्पष्ट अंत दिखाई नहीं दे रहा।
ईरान ने जवाबी कार्रवाई में होर्मुज जलडमरूमध्य के जरिए तेल आपूर्ति पर असर डाला है। यह दुनिया के लिए बेहद अहम मार्ग है, जहां से करीब 20% तेल और गैस की सप्लाई होती है। इसके बाधित होने से वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ गई है।
NATO देशों ने बनाई दूरी
अमेरिका ने अपने सहयोगी नाटो देशों से इस समुद्री रास्ते को खुलवाने के लिए मदद मांगी, लेकिन जर्मनी, ब्रिटेन, इटली समेत कई देशों ने साफ इनकार कर दिया। जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने कहा कि यह यूरोप का युद्ध नहीं है और उनका देश किसी सैन्य कार्रवाई में हिस्सा नहीं लेगा। वहीं ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने भी स्पष्ट किया कि उनका देश इस बड़े युद्ध में नहीं फंसेगा, हालांकि उन्होंने कूटनीतिक समाधान पर जोर दिया। इटली के विदेश मंत्री एंटोनियो ताजानी ने भी साफ कहा कि इस संकट का समाधान बातचीत से ही निकल सकता है, न कि सैन्य कार्रवाई से। इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस और जापान ने भी अपने युद्धपोत भेजने से इनकार कर दिया है।
यूरोपीय यूनियन ने भी ठुकराई अपील
यूरोपीय यूनियन ने भी ट्रम्प की अपील को ठुकराते हुए अपने रेड सी मिशन को होर्मुज तक बढ़ाने से मना कर दिया। ईयू की विदेश नीति प्रमुख काजा कैलस ने कहा कि मिशन का दायरा बढ़ाने की फिलहाल कोई योजना नहीं है।
इजराइल की आक्रामक रणनीति
इस बीच इजराइल ने ईरान के कई शहरों में हमले तेज कर दिए हैं और अगले तीन सप्ताह तक जंग जारी रखने की योजना बनाई है। उनका कहना है कि लक्ष्य ईरान की सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना है।
ईरान की चेतावनी
ईरान ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि अगर अमेरिकी सेना जमीनी स्तर पर उतरी, तो इसके गंभीर परिणाम होंगे। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि उनका देश युद्ध नहीं चाहता, लेकिन जवाब देने में पीछे नहीं हटेगा।
खुफिया रिपोर्ट: सरकार गिरना मुश्किल
अमेरिकी खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट के अनुसार, लगातार हमलों के बावजूद ईरान की मौजूदा सरकार अभी भी मजबूत स्थिति में है और जल्द गिरने की संभावना नहीं है।
तेल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक दबाव के बीच ट्रम्प पर जंग खत्म करने का दबाव भी बढ़ रहा है, लेकिन मौजूदा हालात में इसका रास्ता आसान नहीं दिख रहा।
Akhil Mahajan