हरियाणा राज्यसभा चुनाव: अभय चौटाला ने बचा ली कांग्रेस की इज्जत!

हरियाणा राज्यसभा चुनाव में इनेलो विधायक अभय चौटाला के वोट न डालने के फैसले ने कांग्रेस को हार से बचा लिया। 5 विधायकों की क्रॉस वोटिंग के बावजूद कांग्रेस के कर्मवीर बौद्ध महज 0.66 वोट से जीत पाए, जिसमें इनेलो की अनुपस्थिति निर्णायक साबित हुई।

हरियाणा राज्यसभा चुनाव: अभय चौटाला ने बचा ली कांग्रेस की इज्जत!

हरियाणा राज्यसभा चुनाव: अभय चौटाला ने बचा ली कांग्रेस की इज्जत!

■ इनेलो की तटस्थता बनी कांग्रेस के लिए 'संजीवनी' और भाजपा के लिए 'रोड़ा'

 ■ 0.66 की फांस में फंसे सतीश नांदल, अभय की रणनीति ने टाली कांग्रेस की तीसरी फजीहत


हरियाणा की सियासत में राज्यसभा चुनाव के नतीजों ने एक ऐसा पन्ना खोल दिया है, जहाँ पर्दे के पीछे की पटकथा किसी और ने ही लिखी थी। चुनावी गलियारों में अब यह चर्चा आम है कि इनेलो विधायक अभय सिंह चौटाला ने अपनी रणनीति से अप्रत्यक्ष रूप से कांग्रेस की डूबती नैया को किनारे लगा दिया। 2016 और 2022 के जख्मों को कुरेदने उतरी भाजपा इस बार भी अपनी 'चाणक्य नीति' के बेहद करीब थी, लेकिन इनेलो के दो विधायकों के वोट न डालने के फैसले ने सारा खेल बिगाड़ दिया। आंकड़ों का गणित साफ गवाही दे रहा है कि यदि अभय चौटाला मैदान में उतरते और उनके 2 वोट निर्दलीय प्रत्याशी सतीश नांदल के पक्ष में जाते, तो कांग्रेस के कर्मवीर बौद्ध की हार तय थी। इस एक फैसले ने कांग्रेस को तीसरी बार राष्ट्रीय स्तर पर फजीहत झेलने से बचा लिया।

विस्तृत राजनैतिक विश्लेषण के अनुसार, चुनाव में जीत का कोटा 27.66 पर सिमट गया क्योंकि इनेलो के 2 विधायक गैर-हाजिर रहे और 5 वोट रद्द हो गए। कांग्रेस के पास अपनी 5 क्रॉस वोटिंग और 4 रद्द वोटों के बाद केवल 28 वोट बचे थे। अगर अभय चौटाला के 2 वोट निर्दलीय नांदल (जिन्हें 27.34 वोट मिले) के खाते में जुड़ जाते, तो नांदल का आंकड़ा 29.34 हो जाता और कांग्रेस महज 28 वोटों के साथ रेस से बाहर हो जाती। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने भी प्रेस वार्ता में साफ कहा कि इनेलो इस चुनाव में 'कांग्रेस की बी-टीम' की तरह नजर आई। हालांकि अभय चौटाला का तर्क था कि वे खरीद-फरोख्त का हिस्सा नहीं बनना चाहते थे, लेकिन उनके इस 'मौन' ने कांग्रेस के लिए संजीवनी का काम किया। इस सियासी दांव ने जहाँ एक ओर हुड्डा की साख बचा ली, वहीं दूसरी ओर भाजपा के उस विजय रथ को रोक दिया जो कांग्रेस के 25% विधायकों को तोड़कर भी अधूरा रह गया।