क्या फिर लौट रहा है कोरोना ? नया वैरिएंट ‘सिकाडा’ ने बढ़ाई टेंशन, 75 म्यूटेशन! जानें कितना खतरनाक है यह वायरस?
कोरोना का नया वैरिएंट BA.3.2 ‘सिकाडा’ सामने आया है, जिसमें 70-75 म्यूटेशन पाए गए हैं। हालांकि विशेषज्ञों के अनुसार इसके लक्षण अधिकतर मामलों में हल्के हैं।
■ नए वैरिएंट ‘सिकाडा’ में 70–75 म्यूटेशन, वैज्ञानिकों की बढ़ी चिंता
■ 2024 में दक्षिण अफ्रीका में पहली बार मिला, तेजी से बढ़ी निगरानी
■ विशेषज्ञ बोले- अधिकतर मामलों में हल्के लक्षण, घबराने की जरूरत नहीं
दुनिया जहां कोरोना महामारी से उबरकर सामान्य जीवन की ओर लौट रही थी, वहीं अब कोरोना के नए वैरिएंट BA.3.2 ‘सिकाडा’ ने एक बार फिर लोगों की चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट्स के अनुसार इस नए वैरिएंट के स्पाइक प्रोटीन में करीब 70 से 75 म्यूटेशन पाए गए हैं, जो इसे वैज्ञानिकों की नजर में खास और संभावित रूप से संवेदनशील बना रहे हैं। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि अधिकतर मामलों में इसके लक्षण हल्के ही देखे जा रहे हैं।
विशेषज्ञ बताते हैं कि वायरस का स्पाइक प्रोटीन वह हिस्सा होता है, जिसके जरिए वायरस शरीर की कोशिकाओं में प्रवेश करता है। इस हिस्से में ज्यादा म्यूटेशन होने से वायरस की संरचना बदल सकती है, जिससे यह शरीर की इम्युनिटी को आंशिक रूप से चकमा दे सकता है। इसका मतलब यह है कि जिन लोगों को पहले संक्रमण हो चुका है या जिन्होंने वैक्सीन ली है, उनमें भी दोबारा संक्रमण की संभावना बनी रह सकती है।
COVID-19 के इस नए वैरिएंट की पहचान सबसे पहले नवंबर 2024 में South Africa में हुई थी। इसके बाद वैज्ञानिकों ने इसके व्यवहार और म्यूटेशन पैटर्न का अध्ययन शुरू किया। यह वैरिएंट पहले सामने आए ओमिक्रॉन जैसे वैरिएंट से अलग माना जा रहा है, क्योंकि इसमें ज्यादा जेनेटिक बदलाव देखने को मिल रहे हैं।
हालांकि राहत की बात यह है कि विशेषज्ञों के अनुसार दुनिया की बड़ी आबादी में अब हाइब्रिड इम्युनिटी विकसित हो चुकी है। यानी लोगों को वैक्सीन भी लगी है और कई लोग पहले संक्रमण से भी गुजर चुके हैं, जिससे शरीर को वायरस के खिलाफ एक हद तक सुरक्षा मिलती है। इसके अलावा स्वास्थ्य व्यवस्थाएं भी पहले से कहीं अधिक मजबूत और तैयार हैं।
डॉक्टरों का कहना है कि इस वैरिएंट से संक्रमित अधिकांश लोगों में हल्के या मध्यम लक्षण जैसे बुखार, खांसी, थकान, शरीर दर्द और कमजोरी ही देखने को मिलते हैं। कई मरीज घर पर आराम और सामान्य दवाओं से ही ठीक हो सकते हैं और अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत नहीं पड़ती।
फिर भी विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि कुछ वर्गों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए। इनमें बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं, डायबिटीज, हृदय रोग या कमजोर इम्युनिटी वाले लोग शामिल हैं। इन लोगों में संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है, इसलिए सतर्कता जरूरी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि कोरोना अब पूरी तरह खत्म नहीं होगा और यह फ्लू की तरह एक एंडेमिक बीमारी के रूप में समय-समय पर सामने आता रहेगा। ऐसे में लोगों को सावधानी और जागरूकता बनाए रखना ही सबसे बड़ा बचाव है।
उन्होंने सलाह दी है कि समय पर वैक्सीन और बूस्टर डोज लें, लक्षण दिखने पर तुरंत टेस्ट कराएं और भीड़भाड़ वाली जगहों पर मास्क पहनने की आदत बनाए रखें।
Akhil Mahajan