रूस-अमेरिका डील से सोने में बड़ी गिरावट की आशंका: जानें कितने गिर सकते हैं दाम
रूस और अमेरिका के बीच संभावित डॉलर आधारित व्यापार समझौते से सोने की कीमतों में गिरावट आ सकती है। 1.76 लाख प्रति 10 ग्राम तक पहुंचे सोने के भाव 1 लाख से नीचे आने की संभावना जताई जा रही है।
➤ 10 ग्राम सोना 1.76 लाख तक पहुंचने के बाद दबाव में
➤ रूस-अमेरिका के बीच डॉलर में व्यापार की संभावना
➤ BRICS देशों की सोना खरीद रणनीति बदल सकती है
अंतरराष्ट्रीय बाजार में रिकॉर्ड ऊंचाई छूने के बाद अब सोने की कीमतों में बड़ी गिरावट की चर्चा तेज हो गई है। हाल ही में 10 ग्राम सोना 1 लाख 76 हजार रुपये के स्तर तक पहुंच गया था, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि अगर वैश्विक आर्थिक समीकरण बदलते हैं तो यह कीमत 1 लाख रुपये से नीचे भी आ सकती है। इसकी मुख्य वजह रूस और अमेरिका के बीच संभावित आर्थिक समझौता मानी जा रही है।
बताया जा रहा है कि रूस जल्द ही अमेरिकी डॉलर में व्यापार फिर से शुरू कर सकता है। यदि ऐसा होता है तो वैश्विक बाजार में डॉलर की स्वीकार्यता और स्थिरता मजबूत होगी। पिछले कुछ वर्षों में खासकर BRICS देशों ने डॉलर पर निर्भरता कम करने की रणनीति अपनाई थी और अपने विदेशी मुद्रा भंडार में सोने का हिस्सा बढ़ाया था।
भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में भी सोने की हिस्सेदारी लगातार बढ़ी है। वर्ष 2005 में जहां भारत के रिजर्व में सोने की हिस्सेदारी करीब 4.3 प्रतिशत थी, वहीं 2025 तक यह बढ़कर लगभग 15 प्रतिशत तक पहुंच गई। इसी तरह ब्राजील ने 2025 में 16 टन सोना खरीदा, जबकि उससे पहले चार वर्षों तक उसने सोना नहीं खरीदा था।
विशेषज्ञों के अनुसार वैश्विक अनिश्चितता के माहौल में केंद्रीय बैंकों ने सोने को सुरक्षित निवेश के रूप में चुना। पिछले वर्ष अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव के बाद टैरिफ बढ़ाए जाने से वैश्विक व्यापार में तनाव बढ़ा और निवेशकों ने सोने की ओर रुख किया। BRICS देशों के पास अब दुनिया के कुल सोना भंडार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा माना जा रहा है।
लेकिन अगर रूस और अमेरिका के बीच डॉलर आधारित व्यापार समझौता होता है तो इससे वैश्विक वित्तीय प्रणाली में स्थिरता का संकेत जाएगा। इससे अन्य देशों का भी डॉलर पर भरोसा बढ़ सकता है और सोना खरीदने की होड़ कम हो सकती है। मांग कम होने पर कीमतों में गिरावट आना स्वाभाविक माना जाता है।
हालांकि बाजार विशेषज्ञ यह भी चेतावनी दे रहे हैं कि सोने की कीमत केवल एक कारण से तय नहीं होती। इसमें भू-राजनीतिक तनाव, केंद्रीय बैंकों की नीतियां, ब्याज दरें और डॉलर इंडेक्स जैसी कई वैश्विक परिस्थितियां भूमिका निभाती हैं। इसलिए निवेशकों को जल्दबाजी में निर्णय लेने से बचना चाहिए और दीर्घकालिक रणनीति पर ध्यान देना चाहिए।
Akhil Mahajan