अब टूटे चावल की स्वीकार्य सीमा 25% से घटाकर 10% हुई, राइस मिलर्स में नाराज़गी

हरियाणा सरकार ने नई CMR पॉलिसी जारी कर दी है। टूटे चावल की स्वीकार्य सीमा 25% से घटाकर 10% कर दी गई है। मिलर्स ने इस फैसले को अनुचित बताया।

अब टूटे चावल की स्वीकार्य सीमा 25% से घटाकर 10%  हुई, राइस मिलर्स में नाराज़गी

हरियाणा सरकार की नई CMR पॉलिसी से राइस मिलर्स में नाराज़गी
➤ टूटे चावल की स्वीकार्य सीमा 25% से घटाकर 10% की गई
➤ पैकेजिंग और प्रोसेसिंग लागत पर मिलर्स ने जताई आपत्ति


हरियाणा सरकार ने राइस मिलर्स को बड़ा झटका देते हुए नई कस्टम मिल्ड राइस (CMR) पॉलिसी लागू कर दी है। इस नई नीति के तहत टूटे चावल (Broken Rice) की स्वीकार्य सीमा को 25% से घटाकर केवल 10% कर दिया गया है। राइस मिलर्स का कहना है कि यह फैसला उनके लिए आर्थिक बोझ बढ़ाने वाला है, क्योंकि मिलिंग के दौरान चावल का टूटना स्वाभाविक प्रक्रिया है।

राइस मिलर्स एंड डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष सौरभ गुप्ता ने कहा कि सरकार को इस पॉलिसी में और स्पष्टता लानी होगी। “15% बचे हुए टूटे चावल का क्या होगा, यह अभी साफ नहीं है। ऐसे में इस पॉलिसी को लागू करना मुश्किल हो जाएगा।”


नई पॉलिसी में क्या है खास?

  • टूटे चावल की सीमा 25% से घटाकर 10% तय।

  • मिलिंग लागत के लिए 2.23 रुपए प्रति क्विंटल।

  • अतिरिक्त भंडारण लागत 1.23 रुपए प्रति क्विंटल।

  • पैकेजिंग शुल्क 3.33 रुपए प्रति क्विंटल।

  • जबकि मिलर्स का दावा है कि असली हैंडलिंग लागत लगभग 25 रुपए प्रति क्विंटल है।


चरणबद्ध डिलीवरी सिस्टम

नई CMR पॉलिसी के तहत मिल मालिकों को चावल की आपूर्ति फेज-वाइज करनी होगी:

  • दिसंबर 2025 तक – 15%

  • जनवरी 2026 तक – 25%

  • फरवरी 2026 तक – 20%

  • मार्च 2026 तक – 15%

  • मई 2026 तक – 15%

  • 30 जून तक – 10%

केंद्र सरकार ने सामान्य धान का MSP ₹2369 प्रति क्विंटल और ग्रेड-A धान का MSP ₹2389 प्रति क्विंटल तय किया है।


मिलर्स को दोहरी मुश्किलें

मिल मालिकों ने सरकार द्वारा धान की ढुलाई (Transport) सुविधा न देने पर भी नाराज़गी जताई है। उनका आरोप है कि अनाज मंडियों से FCI गोदामों तक धान ले जाने के लिए पर्याप्त वाहन उपलब्ध नहीं कराए जाते। कई ट्रांसपोर्टर फर्जी वाहन नंबर देकर ठेके हासिल कर लेते हैं, जिससे किसानों और मिलर्स को परेशानी उठानी पड़ती है।


इस बार धान की बुआई और उत्पादन

  • इस साल 13.97 लाख एकड़ में धान की बुआई हुई।

  • मंडियों में लगभग 84 लाख मीट्रिक टन धान की आवक का अनुमान।

  • इसमें से 54 लाख मीट्रिक टन धान की सरकारी खरीद होगी।

  • लगभग 36 लाख मीट्रिक टन चावल (67%) केंद्रीय पूल में जाएगा।