हरियाणा में भाजपा नेत्री का पति रिश्वत लेते गिरफ्तार! जानें

करनाल में खाद्य एवं आपूर्ति विभाग का सब इंस्पेक्टर 15 हजार रिश्वत लेते गिरफ्तार हुआ। आरोपी पर डिपो होल्डर्स से कमीशन लेने के आरोप हैं, जबकि पत्नी भाजपा में CM विंडो एमिनेंट पर्सन है।

हरियाणा में भाजपा नेत्री का पति रिश्वत लेते गिरफ्तार! जानें
  • करनाल में खाद्य एवं आपूर्ति विभाग का सब इंस्पेक्टर 15 हजार रिश्वत लेते गिरफ्तार
  • पत्नी भाजपा में CM विंडो एमिनेंट पर्सन, परिवार के दो स्कूल भी चर्चा में
  • डिपो होल्डर्स से 10 प्रतिशत कमीशन लेने के आरोपों की भी जांच शुरू

हरियाणा के करनाल में खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के सब इंस्पेक्टर मनोज कुमार की गिरफ्तारी के बाद मामला अब पूरे जिले में चर्चा का विषय बन गया है। स्टेट विजिलेंस और एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) की कार्रवाई में रिश्वत लेते पकड़े गए मनोज कुमार को अदालत में पेश किया गया, जहां से उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। अब एसीबी आरोपी के नेटवर्क, अवैध वसूली और अन्य संभावित शामिल लोगों की जांच में जुटी हुई है।

जांच के दौरान सामने आया कि आरोपी मनोज कुमार रिटायर्ड फौजी है और हाल ही में उसकी पोस्टिंग कुंजपुरा सेंटर पर हुई थी। आरोप है कि पोस्टिंग के कुछ दिनों बाद ही उसने डिपो होल्डर्स पर दबाव बनाकर वसूली का खेल शुरू कर दिया। शिकायतकर्ता डिपो होल्डर विकास के मुताबिक आरोपी सभी डिपो संचालकों से करीब 10 प्रतिशत कमीशन मांगता था और चेकिंग के दौरान अलग से 4 हजार रुपये भी वसूलता था।

मामले ने उस समय और तूल पकड़ लिया जब आरोपी की पत्नी सुनील मोर का राजनीतिक कनेक्शन सामने आया। सुनील मोर वर्तमान में भाजपा के मधुबन मंडल में CM विंडो एमिनेंट पर्सन की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। इससे पहले वह महिला मोर्चा अध्यक्ष जैसी जिम्मेदारियां भी निभा चुकी हैं। सूत्रों के अनुसार निकाय चुनावों में वह भाजपा टिकट की दावेदार भी थीं, हालांकि पार्टी ने उन्हें टिकट नहीं दिया था।

परिवार द्वारा संचालित दो निजी स्कूल भी अब चर्चा में आ गए हैं। पति की गिरफ्तारी के बाद परिवार सदमे में बताया जा रहा है, वहीं राजनीतिक गलियारों में भी इस पूरे घटनाक्रम को लेकर लगातार चर्चाएं हो रही हैं।

बताया जा रहा है कि करीब दो साल पहले सुनील मोर को एमिनेंट पर्सन नियुक्त किया गया था। हरियाणा में एमिनेंट पर्सन ऐसे लोगों को बनाया जाता है जो CM विंडो पर आने वाली शिकायतों के निस्तारण में प्रशासन और जनता के बीच समन्वय का काम करते हैं। उनकी सहमति और रिपोर्ट के आधार पर कई शिकायतों का समाधान माना जाता है। अक्सर यह जिम्मेदारी सत्तारूढ़ दल से जुड़े भरोसेमंद लोगों को दी जाती है।

शिकायतकर्ता विकास ने बताया कि कुछ दिन पहले मनोज कुमार ने उसके डिपो की चेकिंग की थी। जांच में करीब 4 किलो अनाज कम मिलने पर आरोपी ने रिपोर्ट में कई क्विंटल गेहूं कम दिखाने की धमकी दी और मामला ठीक करने के बदले 15 हजार रुपये की मांग कर दी। विकास रिश्वत नहीं देना चाहता था, इसलिए उसने सीधे स्टेट विजिलेंस को शिकायत दी।

शिकायत मिलते ही कुरुक्षेत्र एसीबी टीम सक्रिय हो गई। इंस्पेक्टर नन्ही देवी के नेतृत्व में टीम ने ट्रैप लगाया। 15 हजार रुपये के नोटों पर विशेष पाउडर लगाया गया और शिकायतकर्ता को दिए गए। बाद में आरोपी ने विकास को कुंजपुरा बस अड्डे पर बुलाया। जैसे ही मनोज कुमार ने पैसे लिए, पहले से छिपी विजिलेंस टीम ने उसे मौके पर ही पकड़ लिया।

पूछताछ में आरोपी से कई महत्वपूर्ण जानकारियां मिलने की बात सामने आई है। एसीबी अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस कथित रिश्वतखोरी नेटवर्क में और कौन-कौन शामिल था। अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और आने वाले दिनों में कई और खुलासे हो सकते हैं।