हिमाचल में शराब के दाम बढ़े, प्रीमियम ब्रांड्स हुए महंगे

हिमाचल प्रदेश में नई आबकारी नीति के तहत शराब की कीमतों में बढ़ोतरी की गई है। प्रीमियम ब्रांड्स 100 रुपये तक महंगे हुए हैं, जबकि ठेकों पर रेट लिस्ट और शिकायत नंबर अनिवार्य कर दिए गए हैं।

हिमाचल में शराब के दाम बढ़े, प्रीमियम ब्रांड्स हुए महंगे

हिमाचल में नई आबकारी नीति लागू, शराब के दाम बढ़े
प्रीमियम ब्रांड्स 100 रुपये तक महंगे, आम ब्रांड्स पर कम असर
हर ठेके पर रेट लिस्ट और शिकायत नंबर अनिवार्य


हिमाचल प्रदेश में नए वित्त वर्ष 2026-27 की शुरुआत के साथ ही शराब के शौकीनों को बड़ा झटका लगा है। राज्य के कर एवं आबकारी विभाग ने अंग्रेजी शराब के नए रेट जारी कर दिए हैं, जिनके तहत प्रीमियम ब्रांड्स की कीमतों में 100 रुपये तक की बढ़ोतरी की गई है। हालांकि, आम उपभोक्ताओं को राहत देते हुए रेगुलर ब्रांड्स की कीमतों में सीमित बढ़ोतरी की गई है, जो औसतन 10 से 30 रुपये तक ही है।

सरकार ने इस बार भी शराब ठेकों की नीलामी एमआरपी (अधिकतम खुदरा मूल्य) के आधार पर की है। इससे पहले वित्त वर्ष 2025-26 में सरकार ने एमएसपी (न्यूनतम विक्रय मूल्य) व्यवस्था को खत्म कर एमआरपी सिस्टम लागू किया था, जिसे इस बार भी जारी रखा गया है। गौरतलब है कि 2024-25 में पंजाब, हरियाणा और चंडीगढ़ की तर्ज पर एमएसपी मॉडल अपनाया गया था, लेकिन अब सरकार ने फिर से एमआरपी प्रणाली को प्राथमिकता दी है।

नई आबकारी नीति में पारदर्शिता को लेकर सख्त प्रावधान किए गए हैं। अब सभी शराब ठेकों पर हर ब्रांड की रेट लिस्ट लगाना अनिवार्य होगा। इसके साथ ही उस रेट लिस्ट पर संबंधित क्षेत्र के आबकारी निरीक्षक का फोन नंबर भी दर्ज करना जरूरी होगा, ताकि उपभोक्ता अधिक कीमत वसूलने की स्थिति में तुरंत शिकायत कर सकें। नियमों का उल्लंघन करने वाले कारोबारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई है।

सरकार ने इस बार शराब ठेकों की ऑनलाइन नीलामी पिछले साल के बेस प्राइस से करीब 10% अधिक दर पर की है, जिससे साफ है कि राज्य सरकार इस सेक्टर से राजस्व बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है। एक ओर जहां प्रीमियम शराब महंगी कर दी गई है, वहीं आम ब्रांड्स पर कम असर डालकर सरकार ने संतुलन बनाने की कोशिश की है।

अब यह देखना दिलचस्प होगा कि बढ़ती कीमतों का शराब की बिक्री और उपभोक्ताओं के व्यवहार पर क्या प्रभाव पड़ता है। क्या लोग महंगे ब्रांड्स से दूरी बनाएंगे या राजस्व में और बढ़ोतरी होगी—इस पर आने वाले समय में तस्वीर साफ होगी।