AI कंटेंट पर लेबल अनिवार्य: नए नियम लागू़, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को 3 घंटे में डीपफेक हटाना जरूरी नहीं तो कार्रवाई्र

आज से लागू हुआ नया AI कंटेंट नियम: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को डीपफेक फोटो-वीडियो 3 घंटे में हटाना होगा और AI-generated सामग्री पर स्पष्ट लेबल लगाना अनिवार्य है।

AI कंटेंट पर लेबल अनिवार्य:  नए नियम लागू़, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को 3 घंटे में डीपफेक हटाना जरूरी नहीं तो कार्रवाई्र

नए AI कंटेंट नियम लागू, महत्वपूर्ण अपडेट सोशल मीडिया के लिए
डीपफेक फोटो-वीडियो 3 घंटे में हटाना होगा
प्लेटफॉर्म्स को AI-label लगाने और मॉनिटरिंग बढ़ाने के निर्देश


नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने AI-generated सामग्री (generative AI content) को लेकर नए नियम आज से लागू कर दिए हैं। अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को डीपफेक फोटो तथा वीडियो सहित किसी भी AI-जनरेटेड या संशोधित सामग्री पर स्पष्ट AI कंटेंट लेबल लगाना अनिवार्य होगा। नियमों के तहत, किसी भी पहचानहीन, भ्रामक, या डीपफेक संवेदनशील सामग्री को प्लेटफॉर्म पर 3 घंटे के भीतर हटाया जाना होगा। ऐसा न करने पर नियामक प्राधिकरण द्वारा आर्थिक और तकनीकी सजा दी जा सकती है।

डिजिटल सुरक्षा और सूचना मानकों को बढ़ाने के लिए लाए गए इन नियमों का उद्देश्य आम उपयोगकर्ताओं को गलत और भ्रामक AI सामग्री से सुरक्षित रखना और प्लेटफॉर्म्स पर पारदर्शिता सुनिश्चित करना है। अब अगर कोई user या एजेंट कोई फोटो, वीडियो या टेक्स्ट पोस्ट करता है जो AI-generated या AI-manipulated है, तो उसे प्लेटफॉर्म पर स्पष्ट रूप से “AI द्वारा उत्पन्न / AI-modified” के रूप में पहचानना आवश्यक होगा।

सरकार ने यह भी निर्देश दिया है कि सोशल मीडिया कंपनियां AI-डिटेक्शन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करें और लगातार मॉनिटरिंग तथा ऑडिट सिस्टम को मजबूत करें ताकि भ्रामक सामग्री जल्दी से हटाई जा सके। नियमों के अनुसार, अगर कोई प्लेटफॉर्म 3 घंटे के भीतर निर्धारित सामग्री को नहीं हटाता है, तो उसे प्रत्येक उल्लंघन के लिए जुर्माना या सेवा प्रतिबंध का सामना करना पड़ सकता है।

खास बात यह है कि यह नियम आम इंटरनेट उपयोगकर्ताओं के साथ-साथ भारत में ऑपरेटिंग सभी बड़ा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लागू होंगे। सरकार ने कहा है कि समय-समय पर नियमों की समीक्षा और संशोधन भी किया जाएगा ताकि तकनीकी उन्नति के साथ कानून भी अपडेट रहें।

इस कदम को डिजिटल सूचना सुरक्षा और ऑनलाइन पारदर्शिता को बढ़ावा देने वाला बताया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे डीपफेक से फैलने वाली अफवाह, गलत सूचना और पहचान छेड़छाड़ जैसी समस्याओं को काफी हद तक रोका जा सकेगा।