रविंद केजरीवाल के केस से हटी जस्टिस स्वर्णकांता
दिल्ली शराब घोटाला मामले में जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने खुद को सुनवाई से अलग किया, लेकिन केजरीवाल समेत AAP नेताओं के खिलाफ अदालत की अवमानना की कार्यवाही शुरू कर दी।
- दिल्ली शराब नीति केस से जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा हुईं अलग
- केजरीवाल समेत AAP नेताओं के खिलाफ आपराधिक अवमानना कार्रवाई शुरू
- जज बोलीं- सोशल मीडिया पर कोर्ट के खिलाफ चलाया गया सुनियोजित अभियान
दिल्ली के चर्चित शराब नीति घोटाला मामले में गुरुवार को बड़ा कानूनी और राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया। दिल्ली हाईकोर्ट की जज जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने इस मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया। हालांकि, केस से अलग होने से पहले उन्होंने अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया समेत आम आदमी पार्टी के कई नेताओं के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने का आदेश दे दिया।
सुनवाई के दौरान जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने बेहद सख्त टिप्पणियां कीं। उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ सोशल मीडिया और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर अपमानजनक, भ्रामक और बदनाम करने वाली सामग्री फैलाई गई। अदालत के अनुसार यह सिर्फ व्यक्तिगत हमला नहीं, बल्कि न्यायपालिका की संस्था को कमजोर करने की कोशिश थी।
जस्टिस शर्मा ने अपने आदेश में कहा कि उनके खिलाफ एक सुनियोजित डिजिटल अभियान चलाया गया। अदालत के अंदर चल रही कार्यवाही के समानांतर बाहर सोशल मीडिया पर अलग नैरेटिव तैयार किया गया। कोर्ट रूम के वीडियो को एडिट कर प्रसारित किया गया और इसे बड़े स्तर पर फैलाया गया।
उन्होंने विशेष रूप से अरविंद केजरीवाल के उस ट्वीट का भी जिक्र किया, जिसमें उन्होंने जज को पत्र लिखने और वीडियो जारी करने की बात कही थी। अदालत के अनुसार इस सामग्री का इस्तेमाल न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने और अदालत की छवि धूमिल करने के लिए किया गया।
जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ने कहा कि “एक झूठ को हजार बार बोलने से वह सच नहीं बन जाता।” उन्होंने कहा कि उनके चुप रहने को कमजोरी समझा जा रहा था, लेकिन जब न्यायपालिका जैसी संस्था को कटघरे में खड़ा किया जाए, तब अदालत का कर्तव्य बनता है कि वह अपनी गरिमा और निष्पक्षता की रक्षा करे।
उन्होंने स्पष्ट कहा कि उन्हें डराने-धमकाने की कोशिश की गई, लेकिन अदालत किसी भी तरह के दबाव में काम नहीं करेगी। जस्टिस शर्मा ने कहा कि अदालत की अवमानना कानून किसी व्यक्ति विशेष की सुरक्षा के लिए नहीं, बल्कि पूरी न्यायपालिका की गरिमा बनाए रखने के लिए है।
हालांकि जस्टिस शर्मा ने शराब नीति मामले की मुख्य सुनवाई से खुद को अलग कर लिया है। अब यह केस दिल्ली हाईकोर्ट की दूसरी बेंच सुनेगी। लेकिन दिलचस्प बात यह है कि केजरीवाल और अन्य नेताओं के खिलाफ शुरू की गई अवमानना कार्यवाही की सुनवाई खुद जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा ही करेंगी।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद दिल्ली की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला अब सिर्फ शराब नीति तक सीमित नहीं रहा, बल्कि न्यायपालिका और राजनीतिक दलों के बीच बढ़ते टकराव का बड़ा उदाहरण बनता जा रहा है।
Akhil Mahajan