देशभर में SIR की तारीखों का ऐलान:चुनाव आयोग प्रेस कॉन्फ्रेंस करेगा, पहले चरण में 10 से 15 राज्य में होगा रिवीजन

चुनाव आयोग ने देशभर में विशेष इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की घोषणा की, पहले चरण में 10-15 राज्यों में प्रक्रिया लागू होगी और मतदाता सूची में दोहरे वोटर व अवैध प्रवासियों की जांच की जाएगी

देशभर में SIR की तारीखों का ऐलान:चुनाव आयोग प्रेस कॉन्फ्रेंस करेगा, पहले चरण में 10 से 15 राज्य में होगा रिवीजन

➤ देशभर में SIR का ऐलान


➤ पहले चरण में 10-15 राज्यों में विशेष इंटेंसिव रिवीजन
➤ मतदाता सूची में दोहरे वोटर हटाने और अवैध प्रवासियों की जांच



चुनाव आयोग ने देशभर में विशेष इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की तैयारी पूरी कर ली है और सोमवार को शाम 4.15 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस में इसकी घोषणा करेगा। पहले चरण में यह प्रक्रिया 10 से 15 राज्यों में लागू होगी, जिनमें वे राज्य शामिल हैं, जहां अगले एक साल के भीतर विधानसभा चुनाव होने हैं। इनमें असम, तमिलनाडु, पुडुचेरी, केरल और पश्चिम बंगाल प्रमुख हैं।

चुनाव आयोग के अधिकारियों ने बताया कि जिन राज्यों में स्थानीय निकाय चुनाव होने वाले हैं, वहां फिलहाल SIR नहीं होगी क्योंकि चुनाव में कर्मचारियों की व्यस्तता को देखते हुए वे रिवीजन के लिए समय नहीं निकाल पाएंगे। स्थानीय चुनाव के बाद इन राज्यों में SIR की प्रक्रिया लागू होगी।

SIR की रूपरेखा तय करने के लिए आयोग ने राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (CEOs) के साथ बैठकें की हैं। कई राज्यों ने अपनी पिछली SIR के बाद तैयार वोटर लिस्ट को वेबसाइट पर प्रकाशित कर दिया है। उदाहरण के लिए, दिल्ली में अंतिम बार 2008 में SIR हुई थी, जबकि उत्तराखंड में यह 2006 में हुई थी। बिहार में हाल ही में वोटर वैरिफिकेशन हुआ और फाइनल डेटा 1 अक्टूबर को जारी किया गया।

आयोग का उद्देश्य मतदाता सूची को अपडेट करना और दोहरे वोटर हटाना है। SIR के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि मतदाता भारतीय नागरिक हों। आयोग ने बताया कि इस बार की समीक्षा लगभग दो दशक बाद हो रही है, क्योंकि शहरीकरण और माइग्रेशन बढ़ने से मतदाता सूची में गड़बड़ी की संभावना बढ़ गई है। उदाहरण के लिए, आंध्र प्रदेश में 2003-04 में मतदाता संख्या 5.5 करोड़ थी, अब बढ़कर 6.6 करोड़ हो गई है।

बैठक में तय हुआ कि बीएलओ हर मतदाता के घर जाकर प्री-फील्ड फॉर्म पहुंचाएंगे और इस प्रक्रिया में 31 दिसंबर तक 18 वर्ष के सभी मतदाता शामिल होंगे। पूरे देश में कुल 99.10 करोड़ मतदाता हैं, जिनमें से बिहार में 8 करोड़ मतदाताओं की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है।

बिहार में SIR को लेकर पहले विवाद भी हो चुका है। विपक्षी दलों ने सरकार पर वोट चोरी का आरोप लगाया था। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग की प्रक्रिया को सही करार दिया और बिहार की अंतिम वोटर लिस्ट आयोग को सौंपी गई। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने 7 अगस्त और 18 सितंबर को प्रेस कॉन्फ्रेंस में SIR पर संभावित गड़बड़ी और वोटर सूची में गलतियों का दावा किया था।

चुनाव आयोग ने जवाब दिया कि ऑनलाइन वोट डिलीट करना संभव नहीं है और केवल कानूनी प्रक्रिया और सुनवाई के बाद ही किसी का नाम हटाया जा सकता है। उदाहरण के लिए, कर्नाटक के आलंद में 6,018 आवेदन आए थे, जिनमें केवल 24 सही पाए गए, बाकी गलत। इसी प्रकार महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले में 7,792 आवेदन में से 6,861 गलत पाए गए।

SIR का प्राथमिक लक्ष्य मतदाता सूची को मजबूत करना, अवैध प्रवासियों की पहचान करना और अगले साल विधानसभा चुनावों से पहले सभी तैयारियां पूरी करना है। आयोग ने स्पष्ट किया कि प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए पूरी होगी।