बंगाल के नए सीएम बने शुभेंदु, दिलीप घोष समेत चार विधायकों ने भी ली मंत्री पद की शपथ
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➤ सुवेंदु अधिकारी ने बांग्ला में ली मुख्यमंत्री पद की शपथ
➤ पीएम मोदी, अमित शाह समेत NDA के कई मुख्यमंत्री रहे मौजूद
➤ दिलीप घोष और अग्निमित्रा पॉल समेत 5 नेताओं ने मंत्री पद संभाला
कोलकाता में आज भारतीय जनता पार्टी के लिए ऐतिहासिक पल देखने को मिला, जब सुवेंदु अधिकारी ने पश्चिम बंगाल के पहले भाजपा मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। गवर्नर आरएन रवि ने उन्हें मुख्यमंत्री पद एवं गोपनीयता की शपथ दिलाई। सुवेंदु अधिकारी ने बांग्ला भाषा में ईश्वर के नाम पर शपथ ली। शपथ ग्रहण के तुरंत बाद वे मंच पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास पहुंचे और उनके पैर छूकर आशीर्वाद लिया।
सुवेंदु अधिकारी के साथ पांच अन्य नेताओं ने भी मंत्री पद की शपथ ली। इनमें दिलीप घोष, अग्निमित्रा पॉल, अशोक कीर्तनिया, खुदीराम टुडू और निषिथ प्रमाणिक शामिल हैं। सभी नेताओं ने बांग्ला भाषा में शपथ ग्रहण किया।
शपथ ग्रहण समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह, NDA के वरिष्ठ नेता और भाजपा शासित राज्यों के लगभग 20 मुख्यमंत्री मौजूद रहे। समारोह के दौरान बंगाल की सांस्कृतिक विरासत की झलक भी देखने को मिली।
प्रधानमंत्री मोदी ने मंच पर सबसे पहले महान कवि Rabindranath Tagore को उनकी 165वीं जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की। बंगाली कैलेंडर के अनुसार 9 मई को ‘पोचिसे बोइशाख’ के रूप में गुरुदेव की जयंती मनाई जाती है।
इसके बाद पीएम मोदी ने भाजपा के 98 वर्षीय वरिष्ठ कार्यकर्ता माखनलाल सरकार का सम्मान किया। प्रधानमंत्री मंच से सीधे उनके पास पहुंचे, उन्हें शॉल ओढ़ाई और उनके पैर छूकर आशीर्वाद लिया। यह दृश्य समारोह का सबसे भावुक पल बन गया। जानकारी के अनुसार माखनलाल सरकार 1952 के कश्मीर आंदोलन में शामिल रहे थे और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के साथ तिरंगा फहराने गए थे, जहां उन्हें गिरफ्तार भी किया गया था।
समारोह में प्रधानमंत्री मोदी ने ग्राउंड की एंट्री से मंच तक रोड शो भी किया। इस दौरान उनके साथ भाजपा नेता समिक भट्टाचार्य और मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी मौजूद रहे। पूरे कार्यक्रम में भाजपा समर्थकों में भारी उत्साह देखने को मिला।
आध्यात्मिक जीवन से राजनीति तक का सफर
1970 में पूर्व मेदिनीपुर के कोंतली गांव में जन्मे सुवेंदु अधिकारी बचपन से ही बेहद आध्यात्मिक माने जाते हैं। वे नियमित रूप से रामकृष्ण मिशन जाया करते थे। परिवार वालों को डर था कि कहीं वे संन्यासी न बन जाएं। बताया जाता है कि वे घर में जमा सिक्के भी चुपचाप मिशन में दान कर आते थे।
हालांकि बाद में सुवेंदु ने राजनीति को अपना रास्ता चुना। उन्होंने तय किया कि वे राजनीति करेंगे और शादी नहीं करेंगे। 1980 के दशक के अंत में कांथी के प्रभात कुमार कॉलेज से उन्होंने छात्र राजनीति की शुरुआत की और धीरे-धीरे पूर्व मेदिनीपुर में मजबूत राजनीतिक पहचान बनाई।
Akhil Mahajan