प्रेग्नेंट महिला को Work From home न देना पड़ा भारी, कोर्ट ने कंपनी पर ₹200 करोड़ का जुर्माना लगाया… नवजात की मौत के बाद सख्त फैसला

प्रेग्नेंट महिला को वर्क फ्रॉम होम की अनुमति न देने पर कोर्ट ने कंपनी पर ₹200 करोड़ का जुर्माना लगाया, समय से पहले डिलीवरी में नवजात की मौत हुई थी।

प्रेग्नेंट महिला को Work From home न देना पड़ा भारी, कोर्ट ने कंपनी पर ₹200 करोड़ का जुर्माना लगाया… नवजात की मौत के बाद सख्त फैसला

वर्क फ्रॉम होम न देने पर कंपनी पर ₹200 करोड़ का जुर्माना
ऑफिस आने की मजबूरी में समय से पहले डिलीवरी
कोर्ट ने कंपनी को घटना के लिए जिम्मेदार माना


प्रेग्नेंट महिला को वर्क फ्रॉम होम (WFH) की अनुमति न देना एक कंपनी को बेहद भारी पड़ गया। अदालत ने इस मामले में सख्त रुख अपनाते हुए कंपनी पर 2.25 करोड़ डॉलर यानी करीब ₹200 करोड़ का जुर्माना लगाया है। कोर्ट ने माना कि अगर महिला को घर से काम करने की अनुमति दी जाती, तो यह दुखद घटना टाली जा सकती थी।

यह मामला अमेरिका की लॉजिस्टिक्स कंपनी टोटल क्वालिटी लॉजिस्टिक्स (TQL) से जुड़ा है, जहां चेल्सी वॉल्श नाम की महिला कार्यरत थीं। फरवरी 2021 में उन्होंने अपनी हाई-रिस्क प्रेग्नेंसी को देखते हुए कंपनी से वर्क फ्रॉम होम की अनुमति मांगी थी। डॉक्टरों ने उन्हें घर पर आराम करने की सलाह दी थी, लेकिन कंपनी ने उन्हें ऑफिस आकर काम करने या बिना सैलरी छुट्टी लेने का विकल्प दिया।

इस स्थिति में महिला को मजबूरी में 22 फरवरी से ऑफिस जाना पड़ा। लगातार तीन दिन तक काम करने के बाद 24 फरवरी को उन्हें समय से पहले डिलीवरी हो गई। उन्होंने एक बच्ची को जन्म दिया, जो तय समय से करीब 18 हफ्ते पहले पैदा हुई थी। जन्म के समय बच्ची की सांस चल रही थी और दिल भी धड़क रहा था, लेकिन करीब डेढ़ घंटे बाद उसकी मौत हो गई।

इस घटना के बाद महिला के परिवार ने कंपनी के खिलाफ मामला दर्ज कराया। उनका कहना था कि यदि महिला को वर्क फ्रॉम होम की अनुमति दी जाती, तो उसे आराम मिल सकता था और यह हादसा टल सकता था। मामला हैमिल्टन काउंटी की अदालत में चला, जहां जूरी ने कंपनी को दोषी ठहराया और भारी जुर्माना लगाने का आदेश दिया।

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि कंपनियों को अपने कर्मचारियों की स्वास्थ्य स्थितियों को समझना चाहिए और जरूरत के अनुसार उचित सुविधा देनी चाहिए। खासकर प्रेग्नेंट महिलाओं के मामलों में लापरवाही गंभीर परिणाम ला सकती है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रेग्नेंट महिलाओं के लिए “रीजनेबल अकॉमोडेशन” यानी उचित सुविधा देने का नियम माना जाता है। इसमें काम के घंटे कम करना, हल्का काम देना या वर्क फ्रॉम होम की अनुमति शामिल हो सकती है। अमेरिका में इसके लिए प्रेग्नेंट वर्कर्स फेयरनेस एक्ट (PWFA) और प्रेग्नेंसी डिस्क्रीमिनेशन एक्ट (PDA) जैसे कानून भी लागू हैं, जो कंपनियों को प्रेग्नेंट कर्मचारियों के साथ भेदभाव न करने और आवश्यक सुविधा देने के लिए बाध्य करते हैं।

यह मामला एक बड़ा उदाहरण बनकर सामने आया है कि कर्मचारियों, खासकर गर्भवती महिलाओं के स्वास्थ्य और सुरक्षा के साथ किसी भी प्रकार की लापरवाही कंपनियों को भारी कीमत चुकाने पर मजबूर कर सकती है।