आज से हवाई किराए पर ‘नो लिमिट’, टिकट हो सकते हैं महंगे… सरकार ने हटाया ₹18,000 का कैप
23 मार्च 2026 से सरकार ने घरेलू हवाई किराए पर लगी ₹18,000 की सीमा हटा दी है, अब एयरलाइंस मांग के अनुसार टिकट कीमत तय करेंगी।
■ 23 मार्च से हवाई किराए की अधिकतम सीमा खत्म
■ अब डिमांड के अनुसार एयरलाइंस तय करेंगी कीमत
■ सरकार की निगरानी रहेगी, ओवरचार्जिंग पर नजर
हवाई यात्रा करने वालों के लिए बड़ा बदलाव सामने आया है। केंद्र सरकार ने घरेलू उड़ानों के किराए पर लगी ₹18,000 की अधिकतम सीमा को 23 मार्च 2026 से हटा दिया है। इस फैसले के बाद अब एयरलाइंस पूरी तरह मांग और सप्लाई के आधार पर टिकट की कीमत तय कर सकेंगी। यानी अब फ्लाइट टिकट कभी सस्ते तो कभी बहुत महंगे भी हो सकते हैं, खासकर त्योहारों, वीकेंड और इमरजेंसी के समय किराया तेजी से बढ़ने की संभावना है।
सरकार के अनुसार, यह फैसला इसलिए लिया गया क्योंकि अब उड़ानों की स्थिति सामान्य हो चुकी है। पहले इंडिगो संकट और स्टाफ की कमी के कारण हजारों उड़ानें प्रभावित हुई थीं, जिससे टिकट के दाम अचानक ₹40 हजार से ₹80 हजार तक पहुंच गए थे। इसी स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने ₹18,000 का कैप लगाया था। अब हालात सामान्य होने के बाद यह नियंत्रण हटा लिया गया है।
हालांकि सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि एयरलाइंस को पूरी छूट नहीं दी गई है। किराया “उचित और पारदर्शी” होना चाहिए और किसी भी तरह की ओवरचार्जिंग पर सख्त निगरानी रखी जाएगी। यानी बाजार को आजादी दी गई है, लेकिन नियमों के दायरे में रहकर ही काम करना होगा।
अब टिकट की कीमत कई फैक्टर्स पर निर्भर करेगी, जैसे कि डिमांड, यात्रा का समय, रूट, सीटों की उपलब्धता और एयर टर्बाइन फ्यूल (ATF) की कीमत। ATF एयरलाइंस की कुल लागत का करीब 35 से 45 प्रतिशत हिस्सा होता है, इसलिए अगर ईंधन महंगा होता है तो इसका सीधा असर टिकट के दाम पर पड़ेगा। 1 अप्रैल से ATF की नई कीमतें लागू होंगी, जिससे किराए में और बदलाव देखने को मिल सकता है।
इस बदलाव के बीच यात्रियों के लिए एक राहत भी दी गई है। अब हर फ्लाइट में 60 प्रतिशत सीटें बिना अतिरिक्त शुल्क के उपलब्ध होंगी, जबकि पहले केवल 20 प्रतिशत सीटें ही फ्री होती थीं। इससे परिवारों और समूह में यात्रा करने वालों को फायदा मिलेगा और सीट चयन के लिए अतिरिक्त पैसे देने की जरूरत कम होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि अब टिकट की कीमत पूरी तरह आपकी प्लानिंग पर निर्भर करेगी। अगर आप पहले से बुकिंग करते हैं तो सस्ते टिकट मिल सकते हैं, लेकिन आखिरी समय में टिकट लेने पर आपको ज्यादा कीमत चुकानी पड़ सकती है।
यह फैसला एक तरह से दोधारी तलवार की तरह है। इससे एयरलाइंस को राहत मिलेगी और बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी, लेकिन दूसरी ओर यात्रियों को पीक सीजन में महंगे किराए का सामना भी करना पड़ सकता है। ऐसे में अब यात्रियों को स्मार्ट तरीके से ट्रैवल प्लान करना होगा।
Akhil Mahajan