सर्राफा बाजार में भूचाल, चांदी सवा लाख रुपये टूटी, सोना 33000 Down

31 जनवरी 2026 को सर्राफा और एमसीएक्स बाजार में ऐतिहासिक गिरावट दर्ज की गई, जहां चांदी एक ही दिन में एक लाख रुपये सस्ती हुई और सोना तैंतीस हजार रुपये कमजोर हो गया।

सर्राफा बाजार में भूचाल, चांदी सवा लाख रुपये टूटी, सोना 33000 Down

➤ चांदी एक ही दिन में एक लाख रुपये सस्ती
➤ सोने की कीमतों में तैंतीस हजार रुपये की बड़ी गिरावट
➤ एमसीएक्स और सर्राफा बाजार में निवेशकों में अफरातफरी


मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज और देश के सर्राफा बाजार में 31 जनवरी 2026 का दिन बुलियन कारोबार के इतिहास में लंबे समय तक याद किया जाएगा। इस दिन कीमती धातुओं में ऐसी तेज गिरावट दर्ज की गई, जिसने निवेशकों से लेकर आम खरीदार तक को चौंका दिया। आमतौर पर बाजार में गिरावट की अगुवाई सोना करता है, लेकिन इस बार तस्वीर उलट नजर आई। चांदी ने बाजार में सुनामी ला दी और एक ही कारोबारी दिन में सवा लाख रुपये की भारी गिरावट दर्ज की गई, जबकि सोना भी अपनी चमक खो बैठा और करीब तैंतीस हजार रुपये कमजोर हो गया।

सबसे अहम बात यह रही कि यह गिरावट अचानक और तेज रही, जिससे बाजार में पैनिक सेलिंग का माहौल बन गया। सर्राफा बाजार से लेकर एमसीएक्स तक निवेशक हैरान दिखे और ट्रेडिंग सेशंस में भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। विशेषज्ञों का मानना है कि इंडस्ट्रियल डिमांड में कमजोरी, अंतरराष्ट्रीय बाजारों के संकेत और सट्टेबाजी के सौदों में उलटफेर ने इस गिरावट को और गहरा किया।

चांदी की बात करें तो आमतौर पर इसमें कुछ हजार रुपये की गिरावट भी बड़ी मानी जाती है, लेकिन एक ही दिन में एक लाख रुपये की टूट ने बाजार की धारणा को पूरी तरह बदल दिया। इस गिरावट से उन निवेशकों को तगड़ा झटका लगा है, जिन्होंने तेजी की उम्मीद में बड़े दांव लगाए थे। ट्रेडर्स के अनुसार, चांदी में आई यह ऐतिहासिक गिरावट हाल के वर्षों की सबसे बड़ी मानी जा रही है और इसे ‘ग्रेट बुलियन क्रैश’ के तौर पर देखा जा रहा है।

वहीं दूसरी ओर सोने में आई तैंतीस हजार रुपये की गिरावट ने इसकी हालिया तेजी पर ब्रेक लगा दिया है। ऊपरी स्तरों पर टिकने की क्षमता कमजोर पड़ने के संकेत मिलने लगे हैं। विश्लेषकों का कहना है कि सोने और चांदी दोनों का एक साथ टूटना बाजार में गहरी मंदी या जबरदस्त घबराहट का संकेत देता है। इस स्थिति ने आम खरीदारों को असमंजस में डाल दिया है, जबकि ट्रेडर्स के बीच डर का माहौल बन गया है।

कुल मिलाकर 31 जनवरी 2026 को दर्ज हुई यह गिरावट बुलियन बाजार के लिए एक बड़ा मोड़ साबित हुई है। जहां चांदी ने नकारात्मक रिकॉर्ड बनाते हुए निवेशकों की नींद उड़ा दी, वहीं सोना भी कमजोर पड़कर बाजार में अनिश्चितता का माहौल पैदा कर गया।

चांदी का बुलबुला फूटा: ₹1.28 लाख तक फिसले दाम


बाजार के आंकड़ों के मुताबिक, चांदी की कीमतों में आया यह भूचाल ऐतिहासिक है।
• एक दिन में गिरावट: 5 मार्च की एक्सपायरी वाली चांदी का वायदा भाव गुरुवार को 3,99,893 रुपये पर बंद हुआ था, जो शुक्रवार को क्रैश होकर 2,91,922 रुपये प्रति किलो पर आ गया। यानी एक ही दिन में चांदी 1,07,971 रुपये सस्ती हो गई।

• हाई लेवल से तबाही: गुरुवार को चांदी ने 4,20,048 रुपये का ऐतिहासिक स्तर छू लिया था। उस हाई लेवल से तुलना करें तो महज 24 घंटों के भीतर चांदी 1,28,126 रुपये टूट चुकी है।


सोना भी औंधे मुंह गिरा: ₹33,000 का गोता
सिर्फ चांदी ही नहीं, सोने की चमक भी पूरी तरह गायब हो गई है। 24 कैरेट सोने (24 Karat Gold) में भारी बिकवाली देखी गई।
• इंट्रा-डे क्रैश: 2 अप्रैल की एक्सपायरी वाला सोना गुरुवार को 1,83,962 रुपये पर था, जो शुक्रवार को गिरकर 1,50,849 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। इस तरह सोने में एक ही कारोबारी दिन में 33,113 रुपये की भारी गिरावट आई।

• रिकॉर्ड हाई से गिरावट: अगर गुरुवार के लाइफ टाइम हाई (1,93,096 रुपये) से देखें, तो सोना अपने ऊपरी स्तर से 42,247 रुपये प्रति 10 ग्राम सस्ता हो चुका है।

क्यों आया बाजार में ऐसा भूचाल?
बाजार विश्लेषकों के अनुसार, इस ऐतिहासिक गिरावट के पीछे एक नहीं, बल्कि कई बड़े कारण हैं:
1. मुनाफावसूली: कीमतें जब अपने ऐतिहासिक उच्चतम स्तर पर पहुंचीं, तो निवेशकों ने भारी मात्रा में मुनाफावसूली शुरू कर दी, जिससे बाजार पर बिकवाली का दबाव बना।
2. डॉलर की मजबूती: अमेरिकी डॉलर और यूएस ट्रेजरी यील्ड में आई तेजी ने सोने-चांदी की चमक फीकी कर दी है। डॉलर महंगा होने से अन्य मुद्राओं वाले देशों के लिए कमोडिटी खरीदना महंगा पड़ता है, जिससे मांग घटती है।
3. फेड और ट्रंप फैक्टर: अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के बयानों से वैश्विक तनाव में कमी के संकेत मिले हैं। इसके अलावा, यूएस फेड में जेरोम पॉवेल की जगह केविन वार्श की एंट्री की खबरों ने भी बाजार का सेंटिमेंट बदल दिया है, जिससे सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने से निवेशकों का मोहभंग हुआ है।

31 जनवरी 2026 का यह क्रैश यह साबित करता है कि बाजार में अत्यधिक तेजी  के बाद करेक्शन कितना घातक हो सकता है। जानकारों का कहना है कि ईटीएफ और वायदा बाजार में अभी और उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है।