बाहरी दुनिया से कटे हरियाणा के 2 गांव: बिजली बंद, चारों ओर बाढ़ का पानी, कोई सहारा नहीं
कुरुक्षेत्र का अजमतपुर और सोनीपत का टोकी मनौली गांव तीन दिनों से पानी में घिरे हैं। बिजली ठप है, फसलें डूब चुकी हैं और मेडिकल-राशन की सुविधा नहीं है। ग्रामीणों ने प्रशासन से स्थायी समाधान की मांग की है।
➤ कुरुक्षेत्र का अजमतपुर और सोनीपत का टोकी मनौली गांव तीन दिन से पानी में घिरे
➤ मारकंडा और यमुना नदी से बाहरी दुनिया से कटा संपर्क, फसलें और घर डूबे
➤ बिजली ठप, मेडिकल-राशन सुविधा नहीं, ग्रामीणों ने मांगी स्थायी राहत
हरियाणा में लगातार बारिश और नदियों के उफान से दो गांव – कुरुक्षेत्र का अजमतपुर और सोनीपत का टोकी मनौली – पिछले तीन दिनों से पूरी तरह से जलमग्न हैं। दोनों गांवों का बाहरी दुनिया से संपर्क कट चुका है। अजमतपुर चारों तरफ से मारकंडा नदी के पानी से घिरा है, वहीं टोकी मनौली गांव यमुना के पानी से टापू बन चुका है। यहां ग्रामीणों के गली-आंगन, खेत-खलिहान और मकान पानी में डूबे हुए हैं।
अजमतपुर गांव की करीब डेढ़ हजार आबादी भय और असुरक्षा के बीच जी रही है। गांव से बाहर जाने वाले सभी रास्तों पर ढाई से तीन फीट तक पानी भरा है। लोग अपने घरों में पानी घुसने से रोकने के लिए गेटों पर मिट्टी के कट्टे लगा रहे हैं और बाल्टियों से पानी बाहर निकालने की कोशिश कर रहे हैं। खेतों में खड़ी करीब 200 एकड़ फसल बर्बाद हो चुकी है। ग्रामीण रिश्तेदारों से लगातार फोन पर सलाह ले रहे हैं कि अपनी जान बचाकर गांव छोड़ दें, लेकिन अधिकांश लोग अपने घर और जमीन छोड़कर जाने को तैयार नहीं हैं।
गांव के हालात इतने गंभीर हैं कि लोग भगवान से रहमत की गुहार लगा रहे हैं। कहीं भंडारा लगाया जा रहा है, तो कहीं पानी में दीया जलाकर प्रार्थना की जा रही है। पंचायत से जुड़े मोहम्मद शाह और खंजरपुर जैसे नजदीकी गांवों में भी यही हालात हैं। ग्रामीणों ने बताया कि प्रशासन अभी तक कोई मदद नहीं पहुंचा पाया है।
सोनीपत जिले का टोकी मनौली गांव भी तीन से चार फीट गहरे पानी में डूबा है। इस गांव के दो हिस्से हैं – एक बांध के भीतर और दूसरा बांध के किनारे पर। बांध के भीतर बसे अधिकांश घर और सरकारी स्कूल पानी में डूब चुके हैं। करीब 700 की आबादी वाले गांव में तीन दिनों से बिजली सप्लाई बंद है। कई घरों में चूल्हे तक नहीं जल पा रहे। बच्चे भूख से बेहाल हैं और लोग भंडारे या बाहर से लाए पानी पर निर्भर हैं।
गांव की महिलाएं और बुजुर्ग प्रशासन से बेहद नाराज हैं। ग्रामीणों का कहना है कि वोट मांगने के लिए नेता तो आते हैं, लेकिन आज तक उनकी कोई सुध लेने नहीं आया। बुजुर्ग मांगेराम ने बताया कि ऊपर से मकान की छत टपक रही है और नीचे से यमुना का पानी फैला हुआ है, ऐसे हालात में जीना नामुमकिन हो गया है।
गांव की महिलाएं बताती हैं कि पांचवीं के बाद उनकी बेटियां आगे पढ़ाई नहीं कर पातीं क्योंकि स्कूल बाहर है और साधन उपलब्ध नहीं हैं। अब बाढ़ और खराब हालात ने समस्या और बढ़ा दी है। ग्रामीणों का कहना है कि या तो प्रशासन स्थायी समाधान निकाले या फिर पूरे गांव को दूसरी जगह शिफ्ट करे।