हरियाणा में मौसम का यू-टर्न, बारिश-आंधी से बढ़ी किसानों की चिंता
हरियाणा में 22-23 मार्च को पश्चिमी विक्षोभ के असर से बारिश, तेज हवाएं और ओलावृष्टि की संभावना है। इससे गेहूं और सरसों की फसल को नुकसान का खतरा बढ़ गया है।
■ हरियाणा में फिर बदलेगा मौसम, 22-23 मार्च को बारिश और तेज हवाओं का अलर्ट
■ पश्चिमी जिलों में आंधी-अंधड़ और हल्की बारिश के साथ ओलावृष्टि की संभावना
■ लगातार सक्रिय वेस्टर्न डिस्टर्बेंस से गेहूं-सरसों की फसल को नुकसान का खतरा
हरियाणा में एक बार फिर मौसम करवट लेने जा रहा है। पिछले कुछ दिनों से लगातार बदल रहे मौसम के बीच अब 22 और 23 मार्च को प्रदेश के कई हिस्सों में बारिश और तेज हवाओं का असर देखने को मिलेगा। खासतौर पर पंजाब से सटे जिलों और पश्चिमी हरियाणा में आंधी-अंधड़ के साथ हल्की बारिश, बूंदाबांदी और कहीं-कहीं ओलावृष्टि की संभावना जताई गई है, जिससे किसानों की चिंता बढ़ गई है।पिछले दो दिनों की बारिश के कारण वातावरण में नमी का स्तर सामान्य से अधिक हो गया है। इसी वजह से मार्च के तीसरे सप्ताह में प्रदेश के कई जिलों में सुबह के समय घना कोहरा देखने को मिला। हिसार में तो दृश्यता घटकर महज 50 मीटर तक रह गई, जिससे आम जनजीवन प्रभावित हुआ। हालांकि दोपहर में धूप निकलने के बाद लोगों को राहत मिली।मौसम में यह बदलाव एक नए सक्रिय हुए पश्चिमी विक्षोभ के कारण हो रहा है। मौसम विशेषज्ञ डॉ. चंद्रमोहन के अनुसार, अगले तीन दिनों तक हरियाणा में मौसम अस्थिर बना रहेगा। इस दौरान बिखराव वाली बारिश के साथ तेज गति से हवाएं चलने की संभावना है। 22 और 23 मार्च को इसका प्रभाव सबसे ज्यादा देखने को मिलेगा।
प्रदेश में पिछले एक सप्ताह से मौसम लगातार परिवर्तनशील बना हुआ है। करीब 16 जिलों में बूंदाबांदी से लेकर मध्यम बारिश दर्ज की गई है, जिससे दिन और रात के तापमान में गिरावट आई है और यह सामान्य से नीचे बना हुआ है। होली के दो सप्ताह बाद भी सुबह के समय कोहरे का दिखना मौसम के असामान्य पैटर्न की ओर इशारा कर रहा है।विशेषज्ञों का कहना है कि 23 मार्च के बाद तापमान में एक बार फिर गिरावट दर्ज की जाएगी और कुछ इलाकों में आंशिक कोहरा भी देखने को मिल सकता है। इसके अलावा 25 मार्च और फिर 28 मार्च के आसपास एक के बाद एक पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने की संभावना है, जिससे मौसम में लगातार बदलाव बना रहेगा।इस पूरे मौसम चक्र का सबसे ज्यादा असर किसानों पर पड़ सकता है। तेज हवाओं, बारिश और संभावित ओलावृष्टि के कारण गेहूं और सरसों की फसल को नुकसान होने का खतरा बढ़ गया है। ऐसे में कृषि विशेषज्ञों ने किसानों को सतर्क रहने और जरूरी सावधानियां बरतने की सलाह दी है।
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