ड्रॉपआउट इंजीनियर से साइबर ठग बनने तक फौजी के बेटे का सफर, रिटायर फौजी से 80 लाख की ठगी में गिरफ्तार

कुरुक्षेत्र पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी रैकेट का खुलासा किया। आरोपी अनिकांत भट्ट ने रिटायर्ड फौजी से 80 लाख रुपए ठगे। भट्ट कंबोडिया से ट्रेनिंग लेकर देहरादून में मिनी एक्सचेंज बनाकर साइबर फ्रॉड करता था।

ड्रॉपआउट इंजीनियर से साइबर ठग बनने तक फौजी के बेटे का सफर, रिटायर फौजी से 80 लाख की ठगी में गिरफ्तार

➤ कुरुक्षेत्र पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय साइबर फ्रॉड रैकेट का भंडाफोड़ किया
➤ आरोपी अनिकांत भट्ट ने कंबोडिया के चाइनीज सिंडिकेट से ट्रेनिंग लेकर 80 लाख रुपए ठगे
➤ रिटायर्ड फौजी बाल किशन से साइबर ठगी में पकड़ा गया, आरोपी 5 दिन के रिमांड पर

हरियाणा की कुरुक्षेत्र पुलिस ने एक बड़े साइबर फ्रॉड रैकेट का खुलासा किया है और इस मामले में देहरादून निवासी अनिकांत भट्ट को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, यह मामला अंतरराष्ट्रीय साइबर ठगी से जुड़ा है और इसमें लाखों रुपए का घोटाला शामिल है। गिरफ्तार आरोपी की पृष्ठभूमि, गिरोह से संबंध और ठगी का तरीका बेहद विस्तृत और जटिल है।

आरोपी अनिकांत भट्‌ट से बरामद हाईटेक गैजेट्स, जिनसे वह लोगों से ठगी करता था।

अनिकांत भट्ट का परिवार सेना से जुड़ा है। उनके पिता सेना से रिटायर हैं। भट्ट पढ़ाई में होशियार था और परिवार को उसकी पढ़ाई से काफी उम्मीदें थीं। उसका दाखिला बीटेक सिविल इंजीनियरिंग में कराया गया था। शुरुआती समय में पढ़ाई ठीक चली, लेकिन बाद में उसका मन पढ़ाई से हटने लगा और उसने इंजीनियरिंग बीच में छोड़ दी। इसके बाद होटल मैनेजमेंट में दाखिला लिया और इसी दौरान परिवार से अनबन होने लगी।

नौकरी की तलाश में भट्ट दिसंबर 2023 में दक्षिण एशियाई देश कंबोडिया गया। वहां उसे एक चाइनीज सिंडिकेट का हिस्सा बनाया गया, जो भारत में लोगों को साइबर ठगी का शिकार बनाता था। भट्ट को भारत से मोबाइल सिम मुहैया कराने का काम सौंपा गया, जिसके बदले उसे महीने में 40-50 हजार रुपए मिलते थे। कभी-कभी वह एक बार में 500-600 सिम भारत से कंबोडिया भेजता था। इसके लिए उसने एक डीलर से संपर्क भी किया था, जो दूसरे राज्य में रहता है।

गिरोह ने भट्ट को प्रशिक्षण देकर 20 लाख रुपए की हाईटेक उपकरणें उपलब्ध करवाईं। इन उपकरणों के माध्यम से वह लोगों को कॉल करता और ठगी करता। इसके अलावा, उसकी गतिविधियों पर IP कैमरों के जरिए लगातार निगरानी रखी जाती थी। पैसे आने के बाद भट्ट लग्जरी लाइफ जीने लगा। वह महंगी और बड़ी गाड़ी किराए पर लेकर चलता, बॉडीगार्ड रखता और कंबोडिया का सफर नियमित रूप से करता था।

भट्ट ने देहरादून के दीप नगर में मिनी एक्सचेंज भी बनाई। इसके माध्यम से वह एक सिम बॉक्स में 256 सिम कार्ड लगाकर एक साथ कॉल करता और लोगों को फ्रॉड का शिकार बनाता। पुलिस ने उसके कब्जे से 278 सिम कार्ड, 6 सिम बैंक सर्वर, लैपटॉप, 2 वाईफाई, पासपोर्ट और पर्स बरामद किए।

इस साइबर ठगी में कुरुक्षेत्र के सेक्टर-2 के रिटायर्ड फौजी बाल किशन भी शिकार बने। 24 अगस्त को उन्हें एक लड़की के नाम से कॉल आया, जिसने खुद को बैंक अधिकारी बताया और आधार कार्ड का उपयोग कर मनी लॉन्ड्रिंग का डर दिखाया। डराने-धमकाने के बाद किशन ने 28 अगस्त को 30 लाख और 1 सितंबर को 49 लाख रुपए ट्रांसफर किए।

पुलिस के अनुसार, कंबोडिया से भेजे गए सिम कार्ड के मोबाइल में डालकर नंबर चेक करने की प्रक्रिया के दौरान IMEI नंबर का पता चला। इसके आधार पर पुलिस भट्ट के ठिकाने पर पहुंची और उसकी गिरफ्तारी की। अब आरोपी 5 दिन के रिमांड पर है और इस दौरान पूरे गिरोह का खुलासा होने की संभावना है।

कुरुक्षेत्र SP नीतिश अग्रवाल ने बताया कि भट्ट के गिरफ्तारी के बाद कई बड़े खुलासे होंगे। आरोपी का नेटवर्क अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैल चुका था और उससे जुड़े अन्य लोग भी जांच के दायरे में हैं। यह मामला साइबर ठगी और अंतरराष्ट्रीय अपराध के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई का अहम उदाहरण माना जा रहा है।

इस पूरे मामले से यह सामने आया है कि अच्छी पढ़ाई और सेना परिवार से होने के बावजूद, गलत नेटवर्क और विदेश में मिली ट्रेनिंग ने एक युवा को बड़े साइबर अपराध में लिप्त कर दिया। पुलिस अब पूरे गिरोह और अन्य ठगी के मामलों की जांच में लगी हुई है।