कुरुक्षेत्र में मां भद्रकाली की नई महाआरती का शुभारंभ, जानें क्‍या है खास

कुरुक्षेत्र के देवी कूप भद्रकाली मंदिर में नई महाआरती लॉन्च की गई। यह आरती 52 शक्तिपीठों को समर्पित है और इसमें 52 वाद्ययंत्रों का प्रयोग किया गया। रोशन प्रिंस और हर्ष सिकंदर ने भजन प्रस्तुत किए।

कुरुक्षेत्र में मां भद्रकाली की नई महाआरती का शुभारंभ, जानें क्‍या है खास

कुरुक्षेत्र की शक्तिपीठ में नई महाआरती लॉन्च, 52 शक्तिपीठों को समर्पित
सीएम नायब सैनी ने दीप प्रज्वलित कर किया शुभारंभ, रोशन प्रिंस और हर्ष सिकंदर ने भजन प्रस्तुत किए
आरती में मां भद्रकाली का इतिहास, शक्तिपीठों का विवरण और पवित्र संगीत शामिल


कुरुक्षेत्र की प्रसिद्ध श्री देवी कूप भद्रकाली मंदिर में शाम करीब 8 बजे सीएम नायब सैनी ने नई महाआरती का शुभारंभ किया। इस अवसर पर मंदिर पीठाध्यक्ष पंडित सतपाल शर्मा ने सीएम को नई आरती का स्मृति चिन्ह भेंट किया। रात में जागरण के दौरान श्रद्धालु पहली बार इस नई महाआरती के साथ भक्ति में डूबेंगे। इस अवसर पर पंजाबी फिल्म अभिनेता और सिंगर रोशन प्रिंस तथा सारेगामापा लिटिल चैंप पंजाब के विजेता हर्ष सिकंदर ने मां की महिमा का गुणगान किया।

मुख्य मंच पर पीठाध्यक्ष पंडित सतपाल शर्मा, मुख्य पुजारिन शिमला देवी, कैबिनेट मंत्री श्याम सिंह राणा, पूर्व राज्यमंत्री सुभाष सुधा, दिल्ली हाई कोर्ट के न्यायमूर्ति रविन्द्र डुडेजा, जज स्नेहिल शर्मा, और एमिल फार्मास्युटिकल ग्रुप के चेयरमैन केके शर्मा ने आरती में भाग लिया।

पीठाध्यक्ष के बेटे देवांशु शर्मा ने बताया कि यह महाआरती 52 शक्तिपीठों को समर्पित है। इसमें 52 वाद्ययंत्रों का उपयोग किया गया है, जहां प्रत्येक यंत्र एक शक्तिपीठ की भक्ति का प्रतिनिधित्व करता है। आरती को तैयार करने में कुल 21 दिन लगे और इसकी अवधि 11 मिनट 42 सेकेंड है।

पीठाध्यक्ष पंडित सतपाल शर्मा ने बताया कि महाआरती में मां के स्वरूप का गुणगान, मंदिर और शक्तिपीठों का इतिहास, भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े प्रसंग और मंदिर के कार्यक्रमों का विवरण शामिल है। जज स्नेहिल शर्मा के निर्देश पर आरती को 18 अंतरे में विभाजित किया गया है, जिससे श्रद्धालु इसे अच्छे से समझ सकें।

मंदिर परिसर में पवित्र कुआं मौजूद है, जिसे मां भद्रकाली के दाहिने टखने के गिरने से जोड़ा जाता है। मान्यता है कि महाभारत काल में पांडवों ने इस शक्तिपीठ में विजय की मन्नत मांगी थी और जीतने पर सुंदर घोड़े चढ़ाए। यहां श्री कृष्ण और बलराम का मुंडन संस्कार भी हुआ था।

आरती के प्रत्येक अंतरे में मां भद्रकाली की महिमा, शक्तिपीठों का महत्व और भक्तों के लिए मार्गदर्शन शामिल है। इस आरती में विशेष रूप से मां के 64 योगिनी स्वरूप, रौद्र-गुह्य चामुण्डा और महिषासुर वध की कथा भी प्रस्तुत की गई है।