एएसआई संदीप लाठर आत्महत्या केस में चार लोगों पर एफआईआर, नया नाम आया सामने
रोहतक साइबर सेल में तैनात एएसआई संदीप लाठर आत्महत्या मामले में अब चार लोगों पर एफआईआर दर्ज हुई है। आईजी ऑफिस के SIS सुनील कुमार का नाम भी सामने आया है। पत्नी ने आरोप लगाया कि संदीप भ्रष्टाचार से परेशान थे और कहा करते थे कि ईमानदार लोगों की कोई जगह नहीं है।
➤ एएसआई संदीप लाठर आत्महत्या केस में चार लोगों पर एफआईआर दर्ज
➤ आईजी ऑफिस में तैनात SIS सुनील कुमार का नाम भी शामिल
➤ पत्नी की शिकायत में भ्रष्टाचार को लेकर गंभीर आरोप, जांच की मांग तेज
रोहतक साइबर सेल में तैनात एएसआई संदीप लाठर की आत्महत्या मामले ने अब नया मोड़ ले लिया है। इस केस में अब तक तीन नहीं बल्कि चार लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। इस एफआईआर में एक नया नाम जुड़ा है — आईजी ऑफिस में तैनात SIS सुनील कुमार का। इसके अलावा आईपीएस वाई पूरण कुमार की पत्नी अमनीत पी कौर, उनके भाई अमन रतन, और गनमैन सुशील कुमार के नाम पहले से ही शामिल थे।
एफआईआर मृतक की पत्नी संतोष लाठर की शिकायत पर सदर थाना रोहतक में दर्ज की गई है। इस शिकायत में पत्नी ने आरोप लगाया है कि उनके पति संदीप लाठर विभाग में बढ़ते भ्रष्टाचार से बेहद दुखी थे और उन्होंने कई बार घर आकर यह कहा था कि “विभाग में ईमानदार लोगों की कोई जगह नहीं है।” पत्नी ने दावा किया कि उनके पति को मानसिक रूप से परेशान किया गया, जिसके चलते उन्होंने 14 अक्टूबर को गांव लाढौत के खेतों में खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली।
इससे पहले आईपीएस वाई पूरण कुमार की आत्महत्या ने भी हरियाणा पुलिस महकमे में हलचल मचाई थी। संदीप लाठर ने मौत से पहले साढ़े छह मिनट का वीडियो और चार पन्नों का सुसाइड नोट छोड़ा था, जिसमें उन्होंने विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार का खुलासा किया था। उन्होंने अपने वीडियो में एसपी नरेंद्र बिजरानिया को ईमानदार अधिकारी बताया था, जबकि आईपीएस वाई पूरण कुमार पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए थे।
मृतक के भाई संजय चेयरमैन ने भी पूरे मामले में जांच की मांग की है। उन्होंने कहा कि उनका भाई पूरी तरह ईमानदार अधिकारी था और वह भ्रष्टाचार के खिलाफ खड़ा था। उन्होंने यह भी कहा कि “मेरा भाई भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ा है।” संजय ने सरकार से सिटिंग जज के माध्यम से मामले की जांच कराने की मांग की और साथ ही यह भी कहा कि “वाई पूरण कुमार के परिजनों को भी न्याय मिलना चाहिए, किसी के साथ अन्याय न हो।”
एफआईआर की कॉपी अब मीडिया के हाथ लग चुकी है, जबकि पुलिस ने इसे छिपाने की कोशिश की थी। सूत्रों के अनुसार, पुलिस को आशंका थी कि मामला जातीय विवाद का रूप ले सकता है, इसलिए दस्तावेज़ों को सार्वजनिक नहीं किया गया था। हालांकि, एफआईआर सामने आने के बाद पूरे विभाग में हलचल मच गई है।
मृतक के ममेरे भाई संजय देशवाल ने भी कहा कि यह आत्महत्या नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार का खुला सच है और इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। परिजनों ने सरकार से मांग की है कि इस मामले में सीटिंग जज से जांच कराई जाए ताकि “दूध का दूध और पानी का पानी” हो सके।
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