पशुओं में इस्तेमाल होने वाली 34 दवाओं पर बैन, इन दवाओं का इस्तेमाल किया तो तीन साल की सजा
केंद्र सरकार ने पशुओं में इस्तेमाल होने वाली 34 दवाओं पर बैन लगा दिया है। इनमें एंटीबायोटिक्स और एंटीवायरल शामिल हैं। दूध, मांस और अंडों के जरिए इंसानों में दवाओं की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ रही थी। हरियाणा में उल्लंघन पर 3 साल की सजा का प्रावधान।
➤ केंद्र सरकार ने पशुओं में उपयोग होने वाली 34 दवाओं पर रोक लगा दी, जिनमें 15 एंटीबायोटिक्स, 18 एंटीवायरल और 1 एंटीप्रोटोजोल शामिल
➤ मांस, दूध और अंडों के जरिए इन दवाओं का असर इंसानों तक पहुंच रहा था, जिससे दवाओं के प्रति प्रतिरोधक क्षमता (Antimicrobial Resistance) बढ़ रही थी
➤ नियम तोड़ने पर 3 साल की सजा और जुर्माना, हरियाणा के सभी केमिस्ट और ड्रग इंस्पेक्टरों को निर्देश जारी
केंद्रीय स्वास्थ्य विभाग ने पशुओं में इस्तेमाल की जाने वाली 34 दवाओं के निर्माण, आयात और बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। इनमें 15 एंटीबायोटिक्स, 18 एंटीवायरल और एक एंटीप्रोटोजोल दवा शामिल है। यह बैन अंडा देने वाले पक्षियों, दुधारू पशुओं, गाय-बैल, भैंस, भेड़, बकरी, सुअर और यहां तक कि मधुमक्खियों पर भी लागू होगा।
जांच में पाया गया कि पशुपालक इन दवाओं का इस्तेमाल न केवल संक्रमण और बीमारियों में, बल्कि जानवरों की भूख और दूध की क्षमता बढ़ाने में भी कर रहे थे। इससे मांस, दूध और अन्य डेयरी उत्पादों के जरिए यह दवाएं इंसानों के शरीर तक पहुंच रही थीं। डॉक्टरों का कहना है कि यह मानव स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा है, क्योंकि इंसानों में दवाओं के प्रति प्रतिरोधक क्षमता बन रही है और कई बीमारियों के इलाज में दवाएं असरहीन हो रही हैं।
बैन की गई प्रमुख दवाएं
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एंटीबायोटिक्स: यूरिडोपेनिसिलिन, सेफ्टोबिप्रोल, कार्बापेनेम्स, मोनोबैक्टम, ग्लाइकोपेप्टाइड्स, लिपोप्टाइड्स, ऑक्साजोलिडिनोन्स आदि।
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एंटीवायरल्स: अमैंटाडाइन, फेविपिराविर, मोलनुपिराविर, ओसेल्टामिविर, रिबाविरिन, बालोक्साविर मार्बोक्सिल आदि।
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एंटीप्रोटोजोल: नाइटाजोक्सानाइड।
हरियाणा में सख्ती
हरियाणा के ड्रग कंट्रोलर ललित गोयल ने बताया कि सभी केमिस्ट शॉप, दवा निर्माताओं और जिला ड्रग इंस्पेक्टरों को आदेश जारी कर दिए गए हैं। प्रतिबंध तोड़ने पर 3 साल की सजा और जुर्माना होगा। उन्होंने कहा कि पशुओं के इलाज के लिए सुरक्षित विकल्प दवाएं बाजार में उपलब्ध हैं।
Akhil Mahajan