हरियाणा असिस्टेंट प्रोफेसर इंग्लिश भर्ती हाईकोर्ट ने रद्द की

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने HPSC की असिस्टेंट प्रोफेसर इंग्लिश भर्ती रद्द कर दी। कोर्ट ने 35 प्रतिशत क्राइटेरिया को UGC गाइडलाइन के खिलाफ माना।

हरियाणा असिस्टेंट प्रोफेसर इंग्लिश भर्ती हाईकोर्ट ने रद्द की

हरियाणा असिस्टेंट प्रोफेसर इंग्लिश भर्ती हाईकोर्ट ने रद्द की
613 पदों के मुकाबले सिर्फ 151 अभ्यर्थी हुए थे पास
35% क्राइटेरिया को कोर्ट ने UGC गाइडलाइन के खिलाफ माना


हरियाणा में कॉलेज कैडर असिस्टेंट प्रोफेसर इंग्लिश भर्ती को लेकर बड़ा फैसला सामने आया है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा लोक सेवा आयोग (HPSC) द्वारा निकाली गई इंग्लिश विषय की भर्ती संख्या 48/2024 को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने भर्ती प्रक्रिया में लागू किए गए 35 प्रतिशत न्यूनतम अंक के क्राइटेरिया पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे UGC गाइडलाइन के खिलाफ माना।

यह मामला तब चर्चा में आया जब HPSC ने दिसंबर में इंग्लिश विषय के मेंस एग्जाम का परिणाम घोषित किया। परीक्षा में कुल 2 हजार 143 उम्मीदवार शामिल हुए थे, लेकिन इनमें से केवल 151 अभ्यर्थी ही पास हो सके। जबकि भर्ती के लिए कुल 613 पद निर्धारित थे।

रिजल्ट आने के बाद बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने भर्ती प्रक्रिया पर सवाल उठाए। युवाओं का कहना था कि आयोग द्वारा लागू किया गया 35 प्रतिशत सब्जेक्ट नॉलेज टेस्ट क्राइटेरिया पूरी तरह गलत और UGC नियमों के खिलाफ है। इसी को चुनौती देते हुए उम्मीदवार हाईकोर्ट पहुंचे थे।

कोर्ट में दायर याचिका में कहा गया कि भर्ती में 10 प्रतिशत उम्मीदवार और पदों के मुकाबले 25 प्रतिशत तक अभ्यर्थियों को भी क्वालिफाई नहीं किया जा सका। इससे भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता और चयन पैटर्न पर गंभीर सवाल खड़े हुए।

हाईकोर्ट की टिप्पणी के बाद अब पूरी भर्ती प्रक्रिया रद्द कर दी गई है। इस फैसले के बाद हजारों युवाओं के बीच नई चर्चा शुरू हो गई है। लंबे समय से आंदोलन कर रहे उम्मीदवारों ने इसे अपनी बड़ी जीत बताया है।

दरअसल, पंचकूला में पिछले चार महीनों से अभ्यर्थी 35 प्रतिशत क्राइटेरिया के खिलाफ लगातार धरना दे रहे थे। उम्मीदवारों का आरोप था कि आयोग ने ऐसा नियम बनाकर बड़ी संख्या में योग्य अभ्यर्थियों को बाहर कर दिया।

इस आंदोलन को राजनीतिक समर्थन भी मिला। कांग्रेस, इनेलो और जजपा समेत कई दल खुलकर प्रदर्शन कर चुके हैं। कांग्रेस ने HPSC के घेराव का कार्यक्रम भी आयोजित किया था। इस दौरान प्रशासन और प्रदर्शनकारी युवाओं के बीच टकराव की स्थिति बन गई थी।

17 फरवरी को पंचकूला में हुए विरोध प्रदर्शन में कांग्रेस सांसद Deepender Singh Hooda और विधायक वरुण मुलाना भी शामिल हुए थे। प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया था। दीपेंद्र हुड्डा बैरिकेड फांदते हुए नजर आए थे, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया था।

बजट सत्र के दौरान भी युवाओं ने विधानसभा घेराव किया था। उस समय चंडीगढ़ सेक्टर-17 थाने में प्रदर्शनकारी युवाओं के खिलाफ शांति भंग करने का केस दर्ज किया गया था। करीब 17 युवाओं को नोटिस भेजे गए थे।

प्रदर्शन के दौरान पुलिस और अभ्यर्थियों के बीच जमकर बहस और धक्का-मुक्की हुई थी। बाद में पुलिस कई उम्मीदवारों को बसों में बैठाकर अपने साथ ले गई थी।

अब हाईकोर्ट के फैसले के बाद यह मामला फिर राजनीतिक और प्रशासनिक बहस का केंद्र बन गया है। उम्मीदवारों की मांग है कि नई भर्ती प्रक्रिया पूरी पारदर्शिता और UGC नियमों के अनुसार कराई जाए।