हरियाणा के इस चिड़ियाघर में खुशखबरी — शेरनी गीता ने दिए तीन शावकों को जन्म

हरियाणा के भिवानी स्थित चौ. सुरेंद्र सिंह मेमोरियल चिड़ियाघर में शेरनी गीता ने तीन नन्हे शावकों को जन्म दिया है। मां और बच्चे पूरी तरह स्वस्थ हैं। प्रशासन ने सर्दियों को देखते हुए विशेष व्यवस्था की है और सीसीटीवी निगरानी के तहत चिकित्सकीय देखरेख जारी है।

हरियाणा के इस  चिड़ियाघर में खुशखबरी — शेरनी गीता ने दिए तीन शावकों को जन्म

भिवानी के चिड़ियाघर में खुशखबरी — शेरनी गीता ने तीन शावकों को दिया जन्म
गीता पहले भी बन चुकी है मां, दो साल पहले दिए थे शेरा और सिंघम को जन्म
सर्दियों में जानवरों और पक्षियों की सुरक्षा के लिए विशेष इंतजाम — सीसीटीवी निगरानी और चिकित्सकीय देखरेख जारी


भिवानी। हरियाणा के चौधरी सुरेंद्र सिंह मेमोरियल मिनी चिड़ियाघर से एक सुखद खबर आई है। यहां शेरनी गीता ने अपने बाड़े में तीन नन्हे शावकों को जन्म दिया है। चिड़ियाघर प्रशासन ने बताया कि गीता और उसके तीनों शावक पूरी तरह स्वस्थ हैं और उन्हें फिलहाल सीसीटीवी कैमरे और पशु चिकित्सकों की निगरानी में रखा गया है।

वन्य प्राणी विभाग के इंस्पेक्टर देवेंद्र हुड्डा ने बताया कि यह घटना चिड़ियाघर के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे राज्य के लिए वन्य संरक्षण की बड़ी उपलब्धि है। गीता पहले भी दो साल पहले “शेरा” और “सिंघम” नाम के दो शावकों को जन्म दे चुकी है, जो अब वयस्क हो चुके हैं। इससे यह स्पष्ट है कि भिवानी का यह मिनी जू अब शेरों के सुरक्षित और अनुकूल प्रजनन का केंद्र बन चुका है।

गीता का जीवन संघर्षों से भरा रहा है। बीते साल इंदौर से लाए गए शेर शिवा ने उस पर हमला कर दिया था, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गई थी। लेकिन अब वही गीता मां बनने की खुशी के साथ नई जिंदगी की मिसाल पेश कर रही है। 2014 में वाघ ब्रांडिस की मौत के बाद यह चिड़ियाघर छह साल तक शेर या बाघ से खाली रहा था। लॉकडाउन के दौरान रोहतक से तीन शावक — गीता, सुधा और अर्जुन — लाए गए, जिससे इस जगह में फिर से जान आई।

बाद में इंदौर से आए सिंबा ने गीता का साथी बनकर इस बाड़े में नई ऊर्जा भर दी। अब गीता और सिंबा की यह जोड़ी तीन नन्हे शावकों के रूप में इस चिड़ियाघर की नई पीढ़ी का प्रतीक बन गई है।

चिड़ियाघर प्रशासन ने बताया कि सर्दियों के मौसम को देखते हुए जानवरों और पक्षियों के लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं। बाड़ों में पराली बिछाई गई है, ताकि जानवरों को ठंड से राहत मिल सके। वहीं, पक्षियों के बाड़ों में बांस की चिक लगाई गई हैं, ताकि ठंडी हवा सीधे अंदर प्रवेश न कर सके। इसके अलावा सभी जानवरों के डाइट चार्ट में भी बदलाव किया गया है, जिससे उन्हें मौसम के अनुसार पौष्टिक आहार मिल सके।

प्रशासन का कहना है कि फिलहाल गीता और उसके शावकों को कुछ महीनों तक अलग पिंजरे में रखा जाएगा, ताकि वे सुरक्षित रह सकें और धीरे-धीरे वातावरण से परिचित हों। चार से पांच महीनों के भीतर लोग उन्हें खुले बाड़े में खेलते हुए देख सकेंगे।