सोना और चांदी में अचानक गिरावट, क्या अब निवेशकों को झटका लगेगा?

सोने की कीमत एक हफ्ते में ₹9,356 गिरकर ₹1,21,518/10 ग्राम और चांदी ₹1,47,033/किलो पर आ गई। सीजनल डिमांड घटने, प्रॉफिट-टेकिंग और ग्लोबल टेंशन में कमी इसका मुख्य कारण।

सोना और चांदी में अचानक गिरावट, क्या अब निवेशकों को झटका लगेगा?

सोने की कीमत एक हफ्ते में ₹9,356 गिरकर ₹1,21,518 प्रति 10 ग्राम
चांदी के दाम भी 4,417 रुपए घटकर ₹1,47,033 प्रति किलो
सीजनल डिमांड घटने, प्रॉफिट-टेकिंग और ग्लोबल टेंशन कम होने से गिरावट


भारत में सोने और चांदी के दामों में इस हफ्ते काफी बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। सोने की कीमत 17 अक्टूबर को ₹1,30,874 प्रति 10 ग्राम के अपने अब तक के उच्चतम स्तर से ₹9,356 घटकर 24 अक्टूबर को ₹1,21,518 पर आ गई। इंडिया बुलियन एंड ज्वेलर्स एसोसिएशन (IBJA) के अनुसार आज सोने में ₹1,836 की गिरावट हुई।

चांदी के दामों में भी 4,417 रुपए की गिरावट हुई और इसकी कीमत ₹1,47,033 प्रति किलोग्राम पर आ गई। कल यह ₹1,51,450 थी। यानी चांदी अपने उच्चतम स्तर से ₹31,067 सस्ती हो गई।

IBJA की दरों में 3% GST, मेकिंग चार्ज और ज्वेलर्स मार्जिन शामिल नहीं होते, इसलिए शहरों के रेट्स इनमें अलग हो सकते हैं। ये रेट्स RBI के सोवरेन गोल्ड बॉन्ड और बैंक गोल्ड लोन के रेट तय करने में इस्तेमाल होते हैं।

बड़े ज्वेलर्स के 22 कैरेट सोने के रेट्स:

  • तनिष्क: ₹1,15,400/10 ग्राम

  • कल्याण: ₹1,14,000/10 ग्राम

  • मालाबार: ₹1,14,000/10 ग्राम

  • कार्टलेन: ₹1,16,590/10 ग्राम

  • भीमा ज्वेलर्स: ₹1,13,180/10 ग्राम

सोने और चांदी में गिरावट के मुख्य कारण:

  1. सीजनल बाइंग का खत्म होना: दीवाली जैसे त्योहार के बाद खरीदारी का सिलसिला थम गया, जिससे मांग में कमी आई।

  2. ग्लोबल टेंशन में कमी: सोना-चांदी को 'सेफ-हेवन' माना जाता है। वैश्विक तनाव कम होने से इनकी कीमतों में गिरावट आई।

  3. प्रॉफिट-टेकिंग और ओवरबॉट सिग्नल: तकनीकी संकेतक जैसे RSI दिखा रहे थे कि कीमतें ओवरबॉट जोन में थीं। निवेशक और डीलर्स ने बिकवाली शुरू की।

इस साल अब तक सोने और चांदी की कीमतों में वृद्धि:

  • सोना: ₹45,356 बढ़कर ₹1,21,518/10 ग्राम

  • चांदी: ₹61,016 बढ़कर ₹1,47,033/किलोग्राम

सोना खरीदते समय ध्यान दें:

  1. सर्टिफाइड गोल्ड खरीदें: हमेशा BIS हॉलमार्क वाला गोल्ड ही खरीदें।

  2. कीमत क्रॉस चेक करें: 10, 22, 24 कैरेट के हिसाब से अलग-अलग रेट चेक करें।

शहरों में अलग-अलग रेट्स के कारण:

  1. ट्रांसपोर्टेशन खर्च: हवाई या सड़क मार्ग से सोने की डिलीवरी में लागत शामिल होती है।

  2. खरीदारी की मात्रा: दक्षिण भारत में बड़ी मात्रा में खरीदारी से रेट कम रहते हैं, टियर-2 शहरों में ज्यादा।

  3. लोकल ज्वेलरी एसोसिएशन: तमिलनाडु और अन्य राज्यों में अलग एसोसिएशन दाम तय करते हैं।

  4. सोने का खरीद मूल्य: जो ज्वेलर्स स्टॉक सस्ते में खरीदते हैं, वो कम रेट पर बेच सकते हैं।

चांदी में 1980 जैसा क्रैश हो सकता है?:
1980 में हंट ब्रदर्स की वजह से चांदी की कीमत 2 डॉलर से 48 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गई। उनका लालच और बाजार नियंत्रण 'सिल्वर थर्सडे' क्रैश का कारण बना। इस साल चांदी के दाम 10 महीनों में दोगुने हो गए, लेकिन हाल ही में ₹1.78 लाख/किलो के हाई से गिरकर ₹1.52 लाख/किलो पर आ गई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि ग्लोबल मार्केट की स्थिति, निवेशकों का मूड और तकनीकी संकेतक भविष्य में चांदी और सोने के दामों में उतार-चढ़ाव का संकेत दे सकते हैं।