ज्यादा टीवी देखने से बढ़ सकता है डिप्रेशन का खतरा
ज्यादा टीवी देखने और बिंज वॉचिंग से डिप्रेशन का खतरा बढ़ सकता है। स्टडी के अनुसार, रोज टीवी देखने का समय कम करने से डिप्रेशन का जोखिम 40% तक घट सकता है।
■ ज्यादा टीवी देखने से डिप्रेशन का बढ़ता खतरा
■ नींद, ब्रेन और मेंटल हेल्थ पर पड़ता है बुरा असर
■ रोज 1-2 घंटे से ज्यादा स्क्रीन टाइम खतरनाक हो सकता है
आज के समय में टीवी और ओटीटी प्लेटफॉर्म पर बिंज वॉचिंग लोगों की आदत बनती जा रही है। “बस एक और एपिसोड” से शुरू हुआ सिलसिला कई घंटों तक चल जाता है, जिससे नींद पूरी नहीं हो पाती और अगले दिन सुस्ती व मानसिक थकान बनी रहती है। अगर यह रूटीन लंबे समय तक जारी रहे तो इसका असर ब्रेन, नींद और मेंटल हेल्थ पर पड़ता है और धीरे-धीरे डिप्रेशन का खतरा बढ़ सकता है।
‘यूरोपियन साइकिएट्री जर्नल’ में प्रकाशित एक स्टडी के अनुसार, रोज टीवी देखने का समय कम करने से डिप्रेशन का जोखिम काफी हद तक कम हो सकता है। 65 हजार से ज्यादा लोगों पर 4 साल तक हुई रिसर्च में पाया गया कि रोज 1 घंटा टीवी कम देखने से डिप्रेशन का खतरा 11% तक कम हो सकता है। 1.5 घंटा कम करने पर 26% और 2 घंटे कम करने पर डिप्रेशन का खतरा करीब 40% तक घट सकता है। इसका असर सबसे ज्यादा 40 से 65 साल के लोगों में देखा गया।
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, लंबे समय तक टीवी देखने से फिजिकल एक्टिविटी कम हो जाती है, लोगों से मिलना-जुलना घटता है और नींद खराब होती है। ये तीनों कारण डिप्रेशन के बड़े रिस्क फैक्टर माने जाते हैं। इसके अलावा हिंसक, नेगेटिव या हाई ड्रामा कंटेंट देखने से ब्रेन लगातार अलर्ट मोड में रहता है, जिससे स्ट्रेस हॉर्मोन बढ़ता है और मानसिक थकान व चिड़चिड़ापन बढ़ने लगता है।
टीवी और मोबाइल स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी स्लीप हॉर्मोन मेलाटोनिन को कम करती है, जिससे नींद देर से आती है और बॉडी क्लॉक बिगड़ जाती है। लंबे समय तक ऐसा होने पर मानसिक और शारीरिक दोनों तरह की बीमारियों का खतरा बढ़ सकता है।
टीवी देखते हुए मन्चिंग यानी बार-बार जंक फूड खाने की आदत भी मूड पर असर डालती है। इससे ब्लड शुगर तेजी से ऊपर-नीचे होता है, जिससे थकान, चिड़चिड़ापन और मूड स्विंग बढ़ते हैं और धीरे-धीरे उदासी और डिप्रेशन का खतरा बढ़ सकता है।
डॉक्टरों के अनुसार, वयस्कों के लिए रोज 1 से 2 घंटे मनोरंजन के लिए स्क्रीन टाइम ठीक माना जाता है, लेकिन यह नींद, एक्सरसाइज और कामकाज को प्रभावित नहीं करना चाहिए।
अगर टीवी देखने की आदत ज्यादा है तो इसे धीरे-धीरे कम करना चाहिए। इसके लिए 30 दिन का नो टीवी चैलेंज लें, केबल या ओटीटी हटाएं, टीवी को सामने से हटाएं, रीडिंग या नई हॉबी शुरू करें, घर में नो-स्क्रीन टाइम तय करें और हर बार टीवी देखने का मन हो तो पहले 10 मिनट कोई दूसरा काम करें। इससे धीरे-धीरे आदत कम हो सकती है और नींद, मूड और फोकस में सुधार होता है।
shubham