फरवरी में ही हरियाणा में अप्रैल जैसी गर्मी, 5 शहरों में पारा 30 पार

हरियाणा में फरवरी के अंत में ही तापमान 30 डिग्री पार पहुंच गया है। बढ़ती गर्मी से गेहूं समेत रबी फसलों पर असर की आशंका जताई गई है। मौसम विभाग ने 28 फरवरी तक खुश्क मौसम और आंशिक बादल की संभावना बताई है।

फरवरी में ही हरियाणा में अप्रैल जैसी गर्मी, 5 शहरों में पारा 30 पार

फरवरी अंत में अप्रैल जैसी गर्मी, 5 शहरों में पारा 30°C पार
रात का तापमान भी सामान्य से 2 डिग्री अधिक, रबी फसलों पर खतरा
विशेषज्ञों की चेतावनी, गेहूं की बालियों और दाने भरने की अवस्था पर असर संभव


हरियाणा में फरवरी के आखिरी सप्ताह में ही गर्मी ने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। आमतौर पर मार्च के मध्य से महसूस होने वाली तपिश इस बार फरवरी के अंत में ही अप्रैल जैसी लगने लगी है। दोपहर के समय धूप चुभने लगी है और तापमान में अचानक आई तेजी ने आमजन के साथ-साथ किसानों की चिंता भी बढ़ा दी है।

मौसम विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार राज्य के कम से कम पांच शहरों में अधिकतम तापमान 30 डिग्री सेल्सियस से ऊपर दर्ज किया गया है। भिवानी में 31.0°C, नूंह में 30.9°C, महेंद्रगढ़ में 30.3°C, गुरुग्राम में 30.2°C और नारनौल में 30.2°C तापमान रिकॉर्ड किया गया। वहीं हिसार और भिवानी में भी पारा 30 डिग्री के आसपास बना रहा। यह सामान्य से अधिक माना जा रहा है और फरवरी के अंतिम दिनों में इस तरह की गर्मी असामान्य मानी जा रही है।

दिन के साथ-साथ रात का तापमान भी लगातार बढ़ रहा है। औसत न्यूनतम तापमान में करीब 0.5 डिग्री की वृद्धि दर्ज की गई है और यह सामान्य से लगभग 2 डिग्री अधिक बना हुआ है। राज्य का सबसे कम न्यूनतम तापमान जींद में 11°C दर्ज किया गया, जो इस मौसम के लिहाज से ज्यादा है। रात का तापमान बढ़ने से ठंड का असर लगभग समाप्त होता नजर आ रहा है।

सबसे अधिक चिंता की बात यह है कि इस तापमान वृद्धि का असर गेहूं सहित रबी फसलों पर पड़ सकता है। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के गेहूं विशेषज्ञ डॉ. ओपी बिश्नोई ने बताया कि इस समय गेहूं की फसल बालियां बनने और दाने भरने की अवस्था में प्रवेश कर रही है। यह चरण फसल के लिए अत्यंत संवेदनशील होता है। यदि तापमान अधिक बना रहता है तो दाने पतले रह सकते हैं और उत्पादन में कमी आ सकती है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि रात का तापमान बढ़ने से पौधों की श्वसन क्रिया तेज हो जाती है, जिससे पौधों की ऊर्जा खपत बढ़ती है। इसका सीधा असर दानों के वजन पर पड़ता है और पैदावार घट सकती है। किसानों को सलाह दी गई है कि वे खेतों में पर्याप्त नमी बनाए रखें, हल्की सिंचाई करें और आवश्यकतानुसार पोषक तत्वों का प्रयोग करें ताकि फसल को तापमान के प्रभाव से बचाया जा सके।

वहीं कृषि मौसम विभाग के सीनियर वैज्ञानिक डॉ. चंद्रशेखर डागर ने बताया कि राज्य में 28 फरवरी तक मौसम सामान्यतः खुश्क रहने की संभावना है। इस दौरान उत्तर और उत्तर-पश्चिमी हवाएं चल सकती हैं, जिससे रात के तापमान में कुछ गिरावट संभव है। 28 फरवरी को बीच-बीच में आंशिक बादल छाने की संभावना है। इस अवधि में अधिकतम तापमान 27 से 30 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 9 से 13 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है।

फरवरी के अंत में इस तरह की गर्मी ने संकेत दे दिए हैं कि आने वाला मार्च और अप्रैल और भी अधिक तपिश भरा हो सकता है। ऐसे में किसानों को सतर्क रहने और मौसम विभाग की एडवाइजरी पर ध्यान देने की जरूरत है।