साइबर अपराधियों को संरक्षण दे रहा था एसआई हुआ सस्‍पेंड

पंचकूला में साइबर अपराधियों से साठगांठ रखने वाले सब इंस्पेक्टर सतीश कुमार को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। जांच में सामने आया कि वह फर्जी कॉल सेंटरों से प्रोटेक्शन मनी लेता था। पुलिस ने छापेमारी में 85 लोगों को गिरफ्तार कर भारी मात्रा में नकदी और उपकरण जब्त किए।

साइबर अपराधियों को संरक्षण दे रहा था एसआई हुआ सस्‍पेंड

साइबर अपराधियों से साठगांठ रखने वाला SI सेवा से बर्खास्त
अवैध कॉल सेंटरों को प्रोटेक्शन मनी देता था संरक्षण
पंचकूला में छापेमारी के बाद खुली पूरी साजिश की परतें


हरियाणा पुलिस विभाग की छवि को शर्मसार करने वाला मामला पंचकूला से सामने आया है। साइबर अपराधियों से साठगांठ रखने वाले सब इंस्पेक्टर सतीश कुमार को सेवा से बर्खास्त कर दिया गया है। जांच में सामने आया कि यह पुलिसकर्मी गिरफ्तार किए गए साइबर आरोपियों से प्रोटेक्शन मनी लेता था, ताकि वे अवैध कॉल सेंटर बिना किसी डर के चला सकें।

मामला 20 अगस्त की रात का है, जब पंचकूला पुलिस ने आईटी पार्क स्थित तीन फर्जी कॉल सेंटरों का भंडाफोड़ किया था। पुलिस ने मौके से 85 लोगों को गिरफ्तार किया था, जिनमें कॉल सेंटरों के मालिक और कर्मचारी शामिल थे। ये आरोपी अमेरिका और यूरोप के नागरिकों को ठगने का गिरोह चला रहे थे। पुलिस ने अब तक 10 मालिकों में से 6 को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि चार अभी फरार हैं।

जांच के दौरान आरोपियों से पूछताछ में एक चौंकाने वाला नाम सामने आया — सब इंस्पेक्टर सतीश कुमार। पुलिस कमिश्नर पंचकूला को मिली रिपोर्ट में पता चला कि सतीश ने इन अवैध कॉल सेंटरों से नियमित रूप से प्रोटेक्शन मनी वसूली थी। रिपोर्ट 21 अगस्त 2025 को आईटी एक्ट, टेलीकम्युनिकेशन एक्ट और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत दर्ज की गई थी।

सतीश कुमार, वर्ष 2000 में पुलिस विभाग में कॉन्स्टेबल के रूप में भर्ती हुए थे। हाल ही में वे थाना उचाना के अंतर्गत नाका ड्यूटी पर तैनात थे, लेकिन घटना के समय वे पंचकूला साइबर थाने में कार्यरत थे। आरोप है कि उसी दौरान उन्होंने अपराधियों को संरक्षण दिया।

जींद पुलिस अधीक्षक कुलदीप सिंह ने जांच रिपोर्ट के आधार पर कहा कि सतीश कुमार की हरकत ने वर्दी की गरिमा को ठेस पहुंचाई है। उनके खिलाफ आरोप सिद्ध होने पर उन्हें सेवा से बर्खास्त कर दिया गया। उन्होंने कहा कि पुलिस विभाग में भ्रष्टाचार या अपराध से जुड़ाव कदापि बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

पुलिस ने छापेमारी के दौरान तीनों कॉल सेंटरों से बड़ी मात्रा में डिजिटल उपकरण और नकदी भी बरामद की। पहले कॉल सेंटर से 85 लैपटॉप, 62 मोबाइल फोन और 8.40 लाख रुपए नकद, दूसरे से 62 लैपटॉप, 60 मोबाइल फोन और 73,176 रुपए, जबकि तीसरे से 18 मोबाइल, 21 सीपीयू, एक लैपटॉप और 3.20 लाख रुपए नकद जब्त किए गए।

पुलिस कमिश्नर शिबास कबिराज ने बताया कि सतीश कुमार को हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद जांच में शामिल किया गया। उसने पूछताछ में एक अन्य कर्मचारी सिद्धार्थ का नाम भी लिया है, जिसे अब जांच में शामिल किया जाएगा।

पुलिस विभाग अब उन अधिकारियों की सूची तैयार कर रहा है, जिन्होंने किसी भी रूप में साइबर अपराधियों से संपर्क या सहयोग किया। यह मामला पूरे विभाग के लिए एक बड़ी चेतावनी माना जा रहा है।