नेपाल में हिंसक प्रदर्शन के बीच PM ओली का इस्तीफा

नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने सोशल मीडिया प्रतिबंध और विरोध प्रदर्शन के बीच इस्तीफा दे दिया। मृतकों के लिए मुआवजा और जांच समिति की घोषणा की गई।

नेपाल में हिंसक प्रदर्शन के बीच PM ओली का इस्तीफा

➤ नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने 9 सितंबर 2025 को इस्तीफा दे दिया
➤ सोशल मीडिया प्रतिबंध, भ्रष्टाचार के आरोप और व्यापक विरोध प्रदर्शन थे इस्तीफे के मुख्य कारण
➤ मृतकों के लिए मुआवजा, जांच समिति और नए प्रधानमंत्री के चयन की प्रक्रिया शुरू

नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने 9 सितंबर 2025 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। उनका इस्तीफा देशभर में फैल रहे हिंसक विरोध प्रदर्शन के बीच आया, जो सरकार के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लगाए गए प्रतिबंध और भ्रष्टाचार के आरोपों के खिलाफ थे। सरकार ने 26 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर प्रतिबंध लगाया था, जिसे लेकर युवाओं में भारी नाराजगी फैली।

K. P. Sharma Oli - Wikipedia

प्रदर्शनकारियों ने काठमांडू में प्रधानमंत्री के कार्यालय पर धावा बोल दिया, कई सरकारी इमारतों में आग लगा दी और हिंसा के दौरान कम से कम 19 लोगों की मौत हो गई जबकि 100 से अधिक लोग घायल हुए। इस पर सरकार ने सोशल मीडिया प्रतिबंध को हटा दिया। प्रदर्शनकारियों की मांग थी कि प्रधानमंत्री इस्तीफा दें और एक अंतरिम सरकार का गठन किया जाए।

प्रधानमंत्री ओली ने इस्तीफा देने के बाद कहा कि यह राजनीतिक समाधान के लिए आवश्यक कदम है। उन्होंने मृतकों के परिवारों को आर्थिक मुआवजा देने और घायलों का मुफ्त इलाज सुनिश्चित करने का वादा किया। इसके अलावा उन्होंने घटना की जांच के लिए एक समिति गठित करने की घोषणा की, जो 15 दिनों में रिपोर्ट पेश करेगी।

प्रदर्शनकारियों ने मंगलवार को नेपाल की संघीय संसद को आग को हवाले कर दिया।

इस बीच, गृह मंत्री रमेश लेखक सहित कई अन्य मंत्रियों ने भी इस्तीफा दे दिया। नेपाल में राजनीतिक अस्थिरता की स्थिति बनी हुई है। नए प्रधानमंत्री के चयन की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और राजनीतिक दल इस पर चर्चा कर रहे हैं। सरकार ने इस घटनाक्रम पर कहा है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था के तहत उचित कदम उठाए जाएंगे।

प्रधानमंत्री ओली के घर में मंगलवार को आग लगाई। इसके बाद धुएं का गुबार उठता नजर आया।

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि देश को जल्द से जल्द स्थिर नेतृत्व की आवश्यकता है ताकि सामाजिक अशांति समाप्त हो सके। अंतरराष्ट्रीय समुदाय ने भी लोकतंत्र और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का समर्थन करते हुए सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील की है।