मक्खन सिंह लबाना बने अंबाला में निर्विरोध जिला परिषद चेयरमैन
अंबाला जिला परिषद के अध्यक्ष पद के लिए मक्खन सिंह लबाना निर्विरोध चुने गए। भाजपा का समर्थन और पार्षदों की सर्वसम्मति से यह चुनाव आसानी से तय हुआ। लबाना का राजनीतिक अनुभव और स्थानीय जनता से जुड़ाव निर्णायक रहा।
➤ मक्खन सिंह लबाना निर्विरोध बने अंबाला जिला परिषद चेयरमैन
➤ भाजपा के समर्थन और पार्षदों की सर्वसम्मति से आसान रास्ता
➤ राजनीतिक करियर में लबाना का अनुभव और स्थानीय जनता से जुड़ाव निर्णायक
हरियाणा के अंबाला जिले में जिला परिषद के अध्यक्ष पद को लेकर बुधवार का दिन राजनीतिक दृष्टि से अहम रहा। प्रारंभ में माना जा रहा था कि इस पद के लिए कड़ा मुकाबला देखने को मिलेगा, लेकिन घटनाक्रम ने अचानक करवट ली और मक्खन सिंह लबाना निर्विरोध जिला परिषद चेयरमैन चुन लिए गए।
लबाना के निर्विरोध चुने जाने के बाद भाजपा खेमे में उत्साह का माहौल बन गया और स्थानीय राजनीति में नई हलचल शुरू हो गई। भाजपा कार्यालय में उनके चुनाव पर स्वागत कार्यक्रम भी आयोजित किया गया।
अंबाला जिला परिषद में कुल 15 वार्ड हैं, जिनमें भाजपा समर्थित 8, कांग्रेस 4 और बसपा 3 पार्षद हैं। पहले संभावना जताई जा रही थी कि अध्यक्ष पद के लिए मतदान होगा, लेकिन सभी पार्षदों ने सर्वसम्मति से भाजपा हाईकमान की मंशा के अनुसार मक्खन सिंह लबाना के पक्ष में सहमति जताई। सूत्रों के अनुसार, पार्षदों ने यह कदम इसलिए उठाया क्योंकि इस बार किसी भी तरह का दलगत खेल न करते हुए भाजपा के फैसले को स्वीकार करना जरूरी था।
मक्खन सिंह लबाना का राजनीतिक सफर भी रोचक रहा है। उन्होंने 2008-09 में बसपा से राजनीति शुरू की और 2009 में बसपा प्रत्याशी के रूप में विधानसभा चुनाव में भाग लिया, जिसमें उन्हें लगभग 12 हजार वोट मिले। हालांकि जीत नहीं मिली, लेकिन इस चुनाव ने उन्हें राजनीतिक पहचान दिलाई।
इसके बाद लबाना ने स्थानीय स्तर पर संगठन और जनता से जुड़े रहने का सिलसिला जारी रखा। 2016 में वह पहली बार जिला परिषद सदस्य चुने गए और 2022 में लगातार दूसरी बार जीत हासिल की। दो बार पार्षद रहते हुए उन्होंने जमीनी स्तर पर मजबूत जुड़ाव और सक्रिय छवि बनाई। यही कारण रहा कि भाजपा में शामिल होते ही उन्हें जिला परिषद अध्यक्ष पद का सबसे मजबूत दावेदार माना गया।