युवक ने मौत के बाद भी बचाईं 8 जिंदगियां, परिवार ने किया अंगदान
भिवानी के 28 वर्षीय ब्रेन डेड युवक के परिवार ने रोहतक PGI में अंगदान कर 8 लोगों को नया जीवन दिया। ग्रीन कॉरिडोर के जरिए अंग विभिन्न अस्पतालों तक पहुंचाए गए।
भिवानी के 28 वर्षीय ब्रेन डेड युवक के अंगदान से 8 लोगों को मिला नया जीवन
• हार्ट, लिवर और किडनी को ग्रीन कॉरिडोर के जरिए अलग-अलग अस्पतालों में पहुंचाया गया
• पीजीआई रोहतक बोले- दुःख की घड़ी में परिवार ने निभाया मानवता का सबसे बड़ा धर्म
रोहतक। भिवानी के 28 वर्षीय ब्रेन डेड युवक के परिवार ने दुःख की घड़ी में मानवता की मिसाल पेश करते हुए अंगदान का फैसला लिया। युवक के अंगदान से 8 लोगों को नया जीवन मिला। पीजीआईएमएस रोहतक में पूरी प्रक्रिया कानूनी नियमों के तहत पूरी की गई। बाद में युवक के पार्थिव शरीर को पूरे सम्मान के साथ पीजीआई से विदा किया गया।
परिजनों के अनुसार 13 मई को लोहारू में युवक का सड़क हादसा हो गया था। हादसे के बाद उसे रोहतक के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, लेकिन हालत बिगड़ने पर पीजीआईएमएस रोहतक रेफर किया गया। यहां डॉक्टरों की टीम ने जांच के बाद युवक को ब्रेन डेड घोषित कर दिया।
युवक के चाचा ने बताया कि डॉक्टरों की काउंसलिंग के बाद परिवार ने अंगदान का निर्णय लिया। उन्होंने कहा कि उन्हें गर्व है कि उनका बेटा मरकर भी अमर हो गया। उसके अंग अब दूसरे लोगों के जीवन में उम्मीद बनेंगे। उन्होंने भावुक होकर कहा कि आज वह इस दुनिया में नहीं है, लेकिन उसका दिल किसी दूसरे के सीने में जरूर धड़केगा।
पीजीआईएमएस रोहतक के वाइस चांसलर डॉ. एच.के. अग्रवाल ने बताया कि प्रदेश में अंगदान को लेकर जागरूकता लगातार बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि एक व्यक्ति के अंगदान से 8 लोगों की जिंदगी बचाई गई है। युवक को ब्रेन डेड घोषित किए जाने के बाद सोटो टीम को सूचना दी गई और सुबह करीब 6 बजे अंग निकालने की प्रक्रिया शुरू की गई।
उन्होंने बताया कि एक किडनी और कॉर्निया पीजीआई रोहतक में रखा गया है। वहीं हार्ट को दिल्ली स्थित Manipal Hospital, लिवर को Army RR Hospital और दूसरी किडनी को पंचकूला के Command Hospital Chandimandir एयरलिफ्ट किया गया। सभी अंगों को समय पर पहुंचाने के लिए ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया।
पीजीआईएमएस के निदेशक डॉ. एस.के. सिंघल ने बताया कि सोटो द्वारा नियमानुसार रोटो पीजीआईएमईआर चंडीगढ़ और नोटो नई दिल्ली को सूचना भेजी गई थी। इसके बाद नियमों के अनुसार अंगों का आवंटन किया गया। उन्होंने बताया कि पीजीआईएमएस में भी किडनी ट्रांसप्लांट की प्रतीक्षा सूची के मरीज हैं, जबकि कॉर्निया क्षेत्रीय नेत्र संस्थान को दी गई है।
डॉ. सिंघल ने कहा कि इस पूरी प्रक्रिया में पीजीआई टीम के साथ पुलिस प्रशासन का भी अहम योगदान रहा। ग्रीन कॉरिडोर के कारण सभी अंग समय पर संबंधित अस्पतालों तक पहुंच पाए। उन्होंने कहा कि डॉ. अग्रवाल के प्रयासों से प्रदेश में अंगदान को लेकर बड़ी जागरूकता आई है। पहले लोग अंगदान का नाम सुनकर घबराते थे, लेकिन अब अधिकतर परिवार काउंसलिंग के बाद सहमति देने लगे हैं। उन्होंने कहा कि सोटो हरियाणा की टीम नोडल अधिकारी डॉ. सुखबीर सिंह के नेतृत्व में बेहतरीन कार्य कर रही है और पारदर्शिता उनकी सबसे बड़ी ताकत है।
pooja