ग्रहण के बाद सूर्य का राहु नक्षत्र में गोचर, इन 4 राशियों पर बढ़ेगा दबाव और अस्थिरता का असर

19 फरवरी को सूर्य का शतभिषा नक्षत्र में गोचर ग्रहण के तुरंत बाद होगा। राहु के प्रभाव से कर्क, कन्या, वृश्चिक और मीन राशि के जातकों को सतर्क रहने की जरूरत है। जानें पूरा ज्योतिषीय विश्लेषण और उपाय।

ग्रहण के बाद सूर्य का राहु नक्षत्र में गोचर, इन 4 राशियों पर बढ़ेगा दबाव और अस्थिरता का असर

19 फरवरी को सूर्य का शतभिषा नक्षत्र में प्रवेश
ग्रहण के तुरंत बाद राहु प्रभाव से बढ़ेंगी चुनौतियां
कर्क, कन्या, वृश्चिक सहित कुछ राशियों को रहना होगा सतर्क


फरवरी माह में एक महत्वपूर्ण ज्योतिषीय घटना घटित होने जा रही है। 17 फरवरी को कुंभ राशि और धनिष्ठा नक्षत्र में वर्ष का पहला सूर्य ग्रहण लगेगा और इसके ठीक एक दिन बाद 19 फरवरी को सूर्य देव राहु के अधिपत्य वाले शतभिषा नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। ज्योतिष शास्त्र में राहु को छाया ग्रह माना गया है, जो भ्रम, मानसिक तनाव और अचानक उतार-चढ़ाव का कारक होता है। ऐसे में ग्रहण के तुरंत बाद सूर्य का राहु नक्षत्र में गोचर कुछ राशियों के लिए अस्थिरता और मानसिक दबाव बढ़ा सकता है।

कर्क राशि

इस अवधि में कर्क राशि के जातकों के जीवन में अस्थिरता देखने को मिल सकती है। वाहन चलाते समय विशेष सावधानी बरतनी होगी। आर्थिक मामलों में किसी पर आंख मूंदकर भरोसा करना नुकसानदायक साबित हो सकता है। निवेश या लेन-देन सोच-समझकर करें। उपाय के रूप में प्रतिदिन ‘ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः’ मंत्र का जप लाभकारी रहेगा।

कन्या राशि

कन्या राशि के जातकों को कार्यस्थल पर अतिरिक्त सतर्कता बरतने की आवश्यकता होगी। ऑफिस की राजनीति और विरोधियों से दूरी बनाए रखना बेहतर रहेगा। परिवार में बातचीत के दौरान संयमित भाषा का प्रयोग करें, क्योंकि छोटी बात भी विवाद का कारण बन सकती है। नकारात्मक सोच वाले लोगों से दूरी बनाए रखना फायदेमंद रहेगा। उपाय स्वरूप प्रतिदिन सुबह सूर्य देव को जल अर्पित करें।

वृश्चिक राशि

राहु नक्षत्र में सूर्य का प्रवेश वृश्चिक राशि वालों के आत्मविश्वास को प्रभावित कर सकता है। भावनात्मक रूप से संवेदनशीलता बढ़ सकती है। यात्रा के दौरान सतर्कता बरतें और करियर से जुड़े बड़े निर्णय बिना अनुभवी व्यक्ति की सलाह के न लें। उपाय के तौर पर ‘ॐ घृणि सूर्याय नमः’ मंत्र का नियमित जप शुभ फलदायी रहेगा।

मीन राशि

इस गोचर का प्रभाव मीन राशि पर भी देखने को मिल सकता है। मानसिक भ्रम और निर्णय लेने में असमंजस की स्थिति बन सकती है। मित्रों या सहकर्मियों के साथ गलतफहमी से बचें। स्वास्थ्य को लेकर लापरवाही न बरतें। ध्यान और सूर्य उपासना से मानसिक संतुलन बनाए रखने में मदद मिलेगी।

ज्योतिषीय दृष्टि से यह समय आत्मचिंतन, संयम और सतर्कता का है। ग्रहों के प्रभाव को संतुलित करने के लिए नियमित मंत्र जप, सूर्य को अर्घ्य और सकारात्मक सोच अत्यंत महत्वपूर्ण मानी गई है।