दिल्ली दरबार में हरियाणा की हलचल, जानें तीन मंत्रियों की राष्ट्रीय अध्यक्ष से मुलाकात के क्‍या हैं सियासी मायने

हरियाणा के तीन मंत्रियों विपुल गोयल, राजेश नागर और गौरव गौतम की भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष से दिल्ली में मुलाकात ने फरीदाबाद की राजनीति में नए समीकरणों की चर्चा तेज कर दी है।

दिल्ली दरबार में हरियाणा की हलचल,  जानें तीन मंत्रियों की राष्ट्रीय अध्यक्ष से मुलाकात के क्‍या हैं सियासी मायने

विपुल गोयल, राजेश नागर और गौरव गौतम की दिल्ली में अहम बैठक
कृष्णपाल गुज्जर के विरोधी खेमे की सक्रियता तेज
फरीदाबाद की अंदरूनी खींचतान अब पहुंची केंद्रीय नेतृत्व तक

हरियाणा की राजनीति में एक बार फिर दिल्ली दरबार की गतिविधियां चर्चा के केंद्र में आ गई हैं। हाल ही में हरियाणा कैबिनेट के तीन प्रभावशाली मंत्री विपुल गोयल, राजेश नागर और गौरव गौतम ने भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से दिल्ली में मुलाकात की। भले ही इस मुलाकात को आधिकारिक तौर पर ‘शिष्टाचार भेंट’ बताया गया हो, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इसके दूरगामी संकेत तलाशे जा रहे हैं।

सबसे ज्यादा चर्चा इस बात की है कि इन तीनों नेताओं को केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गुज्जर के विरोधी खेमे से जोड़ा जाता है। फरीदाबाद की राजनीति में लंबे समय से चल रही अंदरूनी खींचतान अब खुलकर सामने आती दिखाई दे रही है। तीनों मंत्रियों का एक साथ राष्ट्रीय अध्यक्ष के दरबार में पहुंचना यह संकेत देता है कि क्षेत्रीय समीकरण तेजी से बदल रहे हैं और एक समानांतर नेतृत्व उभरने की कोशिश में है।

सूत्रों के मुताबिक, बैठक में आगामी संगठनात्मक नियुक्तियों और क्षेत्रीय समीकरणों पर भी चर्चा हुई। माना जा रहा है कि मंत्रियों ने संगठन में अपने समर्थकों को स्थान दिलाने की रणनीति पर केंद्रीय नेतृत्व से संवाद साधा। इससे यह भी संकेत मिलता है कि प्रदेश स्तर की राजनीति से आगे बढ़कर अब सीधे केंद्रीय संगठन के माध्यम से शक्ति संतुलन साधने की कोशिश की जा रही है।

फरीदाबाद क्षेत्र में पिछले कुछ समय से राजनीतिक वर्चस्व को लेकर खींचतान रही है। ऐसे में दिल्ली में हुई यह मुलाकात केवल औपचारिकता भर नहीं मानी जा रही। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि संगठनात्मक फेरबदल में इन नेताओं की राय को महत्व मिलता है, तो क्षेत्रीय शक्ति संतुलन में बदलाव संभव है।

आगामी चुनावी रणनीति, संगठन विस्तार और नेतृत्व की दिशा को लेकर यह मुलाकात कई सवाल छोड़ गई है। क्या यह केवल शिष्टाचार भेंट थी या फिर फरीदाबाद की राजनीति में नए अध्याय की शुरुआत? आने वाले दिनों में पार्टी के भीतर होने वाले फैसले इस पर स्पष्ट तस्वीर पेश करेंगे।