टायर पर लिखे सीक्रेट कोड में छिपी है आपकी सुरक्षा; जानें रोचक बात, नजरअंदाज किया तो जा सकती है....

टायर पर लिखे 195/55 R16 जैसे कोड का मतलब जानना आपकी गाड़ी की सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है, गलत टायर बड़ा हादसा कर सकता है।

टायर पर लिखे सीक्रेट कोड में छिपी है आपकी सुरक्षा; जानें रोचक बात, नजरअंदाज किया तो जा सकती है....

टायर पर लिखे नंबर बताते हैं गाड़ी की सुरक्षा और परफॉर्मेंस
गलत टायर चुनना बन सकता है हादसे की वजह
लोड, स्पीड और साइज समझना बेहद जरूरी



नई दिल्ली। क्या आपने कभी गौर किया है कि आपकी कार या बाइक के टायर पर 195/55 R16 87V जैसे नंबर क्यों लिखे होते हैं? ये केवल नंबर नहीं, बल्कि आपकी गाड़ी की सुरक्षा, ग्रिप, स्पीड और लोड क्षमता से जुड़ी पूरी जानकारी होते हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि टायर खरीदते समय इन कोड्स को नजरअंदाज करना आपकी सुरक्षा के साथ बड़ा समझौता हो सकता है।

टायर पर लिखा पहला तीन अंकों का नंबर जैसे 195, टायर की चौड़ाई को मिलीमीटर में दर्शाता है। जितना चौड़ा टायर होगा, सड़क पर पकड़ उतनी ही मजबूत होगी। यही वजह है कि स्पोर्ट्स कारों में चौड़े टायर दिए जाते हैं।

इसके बाद आने वाला नंबर जैसे /55, टायर का एस्पेक्ट रेशियो होता है, जो टायर की ऊंचाई को उसकी चौड़ाई के प्रतिशत में दिखाता है। कम एस्पेक्ट रेशियो वाले टायर गाड़ी को बेहतर कंट्रोल और स्टाइलिश लुक देते हैं।

टायर में बीच में लिखा R उसकी बनावट को दर्शाता है, जिसे रेडियल टायर कहा जाता है। आज के समय में ज्यादातर गाड़ियों में रेडियल टायर का ही इस्तेमाल होता है, क्योंकि ये कम गर्म होते हैं और लंबी दूरी के लिए सुरक्षित माने जाते हैं।

इसके बाद लिखा 16 या 18 आपके पहिए के रिम का साइज होता है। अगर आप गलत साइज का टायर चुनते हैं, तो वह रिम पर ठीक से फिट नहीं होगा और दुर्घटना का खतरा बढ़ सकता है।

रिम साइज के बाद आने वाला नंबर जैसे 87, टायर का लोड इंडेक्स होता है, जो यह बताता है कि एक टायर कितना वजन उठा सकता है। उदाहरण के तौर पर 87 का मतलब लगभग 545 किलोग्राम होता है।

सबसे आखिरी अक्षर जैसे V या H, टायर की स्पीड रेटिंग को दर्शाते हैं। V रेटिंग वाला टायर 240 किमी/घंटा तक सुरक्षित होता है, जबकि H रेटिंग 210 किमी/घंटा तक। इस सीमा से अधिक स्पीड पर गाड़ी चलाना टायर फटने का कारण बन सकता है।

इसके अलावा टायर पर P (पैसेंजर) और LT (लाइट ट्रक) जैसे संकेत भी होते हैं, जो वाहन के प्रकार को बताते हैं। साथ ही टायर पर बने एरो (तीर) के निशान से उसकी सही दिशा का पता चलता है, जिसे नजरअंदाज करना भी खतरनाक हो सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि कई लोग दिखावे के लिए बड़े या चौड़े टायर लगवा लेते हैं, जिससे गाड़ी का माइलेज घटता है और सस्पेंशन व स्टीयरिंग पर भी बुरा असर पड़ता है। इसलिए टायर बदलते समय हमेशा गाड़ी के अनुसार सही साइज और रेटिंग का ही चुनाव करें।