राजस्थान के विनोद जाखड़ बने NSUI के राष्ट्रीय अध्यक्ष

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की मंजूरी के बाद विनोद जाखड़ को NSUI का नया राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया गया। 55 साल में पहली बार राजस्थान से किसी नेता को यह जिम्मेदारी मिली।

राजस्थान के विनोद जाखड़ बने NSUI के राष्ट्रीय अध्यक्ष

विनोद जाखड़ बने NSUI के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष
मल्लिकार्जुन खरगे ने नियुक्ति पर लगाई मुहर
निर्मल चौधरी और रौनक खत्री को पीछे छोड़ संभाली कमान


देश की छात्र राजनीति में शुक्रवार का दिन अहम साबित हुआ, जब भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन NSUI की कमान राजस्थान के युवा नेता विनोद जाखड़ को सौंप दी गई। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इस नियुक्ति को मंजूरी दी, जिसके बाद संगठन में नए नेतृत्व की आधिकारिक घोषणा की गई।

यह नियुक्ति कई मायनों में ऐतिहासिक मानी जा रही है। NSUI के 55 वर्ष के सफर में यह पहला अवसर है जब राजस्थान से किसी छात्र नेता को राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। अब तक राजस्थान NSUI के प्रदेश अध्यक्ष रहे जाखड़ संगठनात्मक सक्रियता, जमीनी पकड़ और छात्र मुद्दों पर मुखर भूमिका के कारण राष्ट्रीय नेतृत्व की नजरों में आए।

इस पद के लिए मुकाबला बेहद रोचक और कड़ा था। चर्चाओं में राजस्थान के ही छात्र नेता निर्मल चौधरी और दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ के अध्यक्ष रौनक खत्री के नाम प्रमुखता से सामने आ रहे थे। माना जा रहा था कि इन्हीं में से किसी एक को संगठन की कमान मिल सकती है। हालांकि, अंतिम दौर की प्रक्रिया में नेतृत्व ने कई स्तरों पर विचार-विमर्श किया।

सूत्रों के अनुसार, वरिष्ठ नेता राहुल गांधी ने संभावित दावेदारों का विस्तृत इंटरव्यू लिया और संगठन के प्रति निष्ठा, वैचारिक प्रतिबद्धता तथा भविष्य की रणनीति को परखा। इस प्रक्रिया में विनोद जाखड़ सबसे उपयुक्त उम्मीदवार के रूप में उभरे।

जाखड़ का राजनीतिक सफर साधारण पृष्ठभूमि से शुरू हुआ। जयपुर के पास विराटनगर क्षेत्र के एक सामान्य परिवार से आने वाले जाखड़ के पिता मिस्त्री का काम करते हैं। वर्ष 2018 में उन्होंने राजस्थान विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में ऐतिहासिक जीत दर्ज कर अपनी पहचान बनाई थी। इसके बाद संगठनात्मक कार्यों में सक्रिय रहते हुए उन्होंने प्रदेश स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत की।

राजनीतिक विश्लेषक इस नियुक्ति को कांग्रेस की युवा और सामाजिक संतुलन साधने की रणनीति के रूप में भी देख रहे हैं। माना जा रहा है कि आगामी छात्रसंघ चुनावों और व्यापक राजनीतिक परिदृश्य में यह फैसला पार्टी को नई ऊर्जा दे सकता है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में जाखड़ छात्र राजनीति में किस तरह की दिशा और धार देते हैं।