590 करोड़ घोटाले में चार गिरफ्तार, फर्जी हस्ताक्षरों से करोड़ों का ट्रांसफर, बैंक रिकॉर्ड में चौंकाने वाले तथ्य

हरियाणा में 590 करोड़ रुपये के कथित बैंक घोटाले में ACB ने 4 आरोपियों को गिरफ्तार किया। फर्जी चेक और डेबिट नोट से करोड़ों की रकम ट्रांसफर करने का खुलासा। जांच कई बैंकों के लेनदेन पर केंद्रित।

590 करोड़ घोटाले में चार गिरफ्तार,  फर्जी हस्ताक्षरों से करोड़ों का ट्रांसफर, बैंक रिकॉर्ड में चौंकाने वाले तथ्य

IDFC First Bank के रिकॉर्ड में पूर्व निदेशक के फर्जी हस्ताक्षर से ट्रांसफर का खुलासा
AU Small Finance Bank से 14 ट्रांजेक्शन में 47 करोड़ दूसरे खाते में भेजे गए


हरियाणा के सरकारी विभागों के खातों में सामने आए 590 करोड़ रुपये के कथित घोटाले में अब परत-दर-परत खुलासे हो रहे हैं। एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने इस मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए चार लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में कथित मास्टरमाइंड रिभव ऋषि, अभिषेक सिंगला, अभय और स्वाति शामिल हैं। जांच एजेंसी फिलहाल यह स्पष्ट नहीं कर पाई है कि इनमें से कितने आरोपी बैंक से जुड़े कर्मचारी हैं और कितने बाहरी व्यक्ति, लेकिन पूछताछ का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है।

एफआईआर के मुताबिक, पंचायत विभाग ने 26 सितंबर 2025 को IDFC First Bank और AU Small Finance Bank में एक-एक खाता खुलवाया था। मुख्यमंत्री ग्रामीण आवास योजना के तहत जारी धनराशि में से 50 करोड़ रुपये आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में और 25 करोड़ रुपये एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक में जमा कराए गए थे। जनवरी माह में विभाग को बैंक स्टेटमेंट में गड़बड़ी दिखाई दी, जिसके बाद 13 जनवरी को दोनों बैंकों को निर्देश दिया गया कि खाते बंद कर संपूर्ण राशि Axis Bank में ट्रांसफर की जाए।

एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक ने ब्याज सहित पूरी राशि वापस जमा कर दी, लेकिन आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने 50 करोड़ रुपये में से केवल 1 करोड़ 27 लाख रुपये ही ट्रांसफर किए। शेष राशि को लेकर जब विभाग ने रिकॉर्ड तलब किया तो चौंकाने वाला खुलासा हुआ। बैंक रिकॉर्ड की जांच में सामने आया कि पूर्व निदेशक बीके बहरा के कथित हस्ताक्षरों वाले फर्जी चेक और फर्जी डेबिट नोट के जरिए बड़ी रकम एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक में ट्रांसफर की गई, जबकि बहरा 28 अक्तूबर को अपना पद छोड़ चुके थे।

जांच में यह भी सामने आया कि एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक से यह रकम स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट के खाते में डाली गई। इतना ही नहीं, एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक से 14 अलग-अलग लेनदेन के माध्यम से करीब 47 करोड़ रुपये दूसरे खातों में ट्रांसफर किए गए। पंचायत विभाग ने एयू बैंक से रिकॉर्ड मांगा, लेकिन आरोप है कि बैंक ने पूरा रिकॉर्ड विभाग को उपलब्ध नहीं कराया।

अब एंटी करप्शन ब्यूरो इस पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है। यह पता लगाया जा रहा है कि फर्जी दस्तावेजों की तैयारी कहां हुई, बैंकिंग सिस्टम में किस स्तर पर चूक या मिलीभगत हुई और किसके निर्देश पर करोड़ों रुपये का ट्रांसफर किया गया। यह मामला न केवल बैंकिंग सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है, बल्कि सरकारी योजनाओं के धन के संरक्षण को लेकर भी गंभीर चिंता पैदा कर रहा है।

यदि जांच में आरोप सिद्ध होते हैं तो यह हरियाणा के हालिया वर्षों के सबसे बड़े वित्तीय घोटालों में से एक साबित हो सकता है।