पानीपत रिफाइनरी पर फिर बवाल: मजदूरों का जाम, पुलिस पर पथराव; फोर्स का लाठीचार्ज, माहौल तनावपूर्ण
पानीपत में रिफाइनरी के मजदूरों ने 8 घंटे ड्यूटी और अन्य मांगों को लेकर रोड जाम किया। पुलिस पर पथराव के बाद लाठीचार्ज हुआ। इलाके में तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है।
■ रिफाइनरी रोड पर मजदूरों ने लगाया जाम, पुलिस पर पथराव
■ भीड़ भड़की तो पुलिस ने किया लाठीचार्ज, तनाव कायम
■ 8 घंटे ड्यूटी, वेतन कटौती और सुविधाओं को लेकर प्रदर्शन
हरियाणा के पानीपत में स्थित रिफाइनरी क्षेत्र बुधवार को एक बार फिर तनाव का केंद्र बन गया। रिफाइनरी में काम करने वाले मजदूरों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर सुबह रिफाइनरी रोड पर जाम लगा दिया। पुलिस अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर समझाइश देने की कोशिश की, लेकिन भीड़ उग्र हो गई और पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया। इसके जवाब में पुलिस ने लाठीचार्ज किया। फिलहाल स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है और इलाके में अतिरिक्त बल तैनात है।
मजदूरों का कहना है कि रिफाइनरी प्रबंधन उनकी समस्याओं पर कोई ठोस ध्यान नहीं दे रहा। उनके अनुसार, यह विरोध एक छोटी चिंगारी के रूप में शुरू हुआ था, जो लगातार अनदेखी के कारण अब आग का रूप ले चुका है। उनका आरोप है कि प्रशासन ने 8 घंटे की ड्यूटी और अन्य सुविधाओं को लेकर आश्वासन दिया था, लेकिन जमीनी स्तर पर बदलाव नजर नहीं आ रहा।
गौरतलब है कि पानीपत रिफाइनरी देश के अति संवेदनशील औद्योगिक संस्थानों में शामिल है। यहां सुरक्षा के मद्देनजर CISF की तैनाती रहती है। इससे पहले 23 फरवरी को भी हालात बिगड़े थे और स्थिति नियंत्रित करने के लिए CISF को हवाई फायर करने पड़े थे। ऐसे में दोबारा हुए बवाल ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है।
प्रदर्शन कर रहे मजदूरों का कहना है कि प्रशासन ने पूर्व में उनकी 8 घंटे की ड्यूटी समेत अन्य मांगें मान ली थीं, लेकिन अब वे चाहते हैं कि इन मांगों को पूरी रिफाइनरी परिसर में बोर्ड पर लिखकर सार्वजनिक किया जाए। साथ ही, जो भी ठेकेदार इन नियमों का पालन न करे, उसके खिलाफ FIR दर्ज कर उसे ब्लैकलिस्ट किया जाए। मजदूरों का आरोप है कि वादों के बावजूद जमीनी स्तर पर सुधार नहीं हुआ।
यह विवाद नया नहीं है। इससे पहले 23 फरवरी को भी मजदूरों ने हंगामा किया था। उस दिन सुरक्षा बलों पर पथराव और वाहनों में तोड़फोड़ की घटना सामने आई थी। हालात काबू में करने के लिए CISF को दो हवाई फायर करने पड़े थे। इसके बाद प्रशासन ने वार्ता का आश्वासन दिया था, लेकिन मजदूरों का कहना है कि ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
मजदूरों की मुख्य मांगें
8 घंटे की तय ड्यूटी
मजदूरों का कहना है कि कागजों में 8 घंटे की ड्यूटी है, लेकिन उनसे 12 घंटे तक काम लिया जाता है। अतिरिक्त समय के लिए ओवरटाइम का भुगतान नहीं किया जाता। वे स्पष्ट ड्यूटी टाइम और ओवरड्यूटी का भुगतान चाहते हैं।
शौचालय और आने-जाने की सुविधा
गेट नंबर 4 से भीतर साइट तक जाने के लिए कोई वाहन सुविधा नहीं है। साइट के अंदर शौचालय की भी व्यवस्था नहीं है। कर्मचारियों को दूर-दूर तक पैदल जाना पड़ता है, जिससे काम का समय प्रभावित होता है।
कैंटीन और लंच ब्रेक की व्यवस्था
मजदूरों का कहना है कि साइट के पास कैंटीन नहीं है। खाना खाने के लिए कई मीटर दूर जाना पड़ता है। इस दौरान लंच टाइम कट जाता है और देरी होने पर फटकार मिलती है।
वेतन में कटौती का स्पष्ट हिसाब
PF और ESI के नाम पर अधिक कटौती किए जाने का आरोप है। मजदूरों का कहना है कि उन्हें पूरी सैलरी का स्पष्ट और पारदर्शी हिसाब दिया जाए।
ठेकेदार और सुरक्षा बलों के व्यवहार पर सवाल
मजदूरों ने ठेकेदारों और मौके पर तैनात सुरक्षा कर्मियों पर दुर्व्यवहार का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि गेट पास के नाम पर अभद्र व्यवहार किया जाता है और विरोध करने पर काम से निकालने की धमकी दी जाती है।
घटना के बाद रिफाइनरी रोड पर यातायात प्रभावित रहा। प्रशासन की ओर से शांति बनाए रखने की अपील की गई है। अधिकारी प्रदर्शनकारियों के प्रतिनिधियों से वार्ता की तैयारी में हैं, ताकि हालात सामान्य किए जा सकें।
Akhil Mahajan 