हरियाणा में पेड़ों की सुरक्षा के लिए बनेगा नया कानून, हाईकोर्ट सख्त
हरियाणा सरकार पेड़ों की सुरक्षा के लिए “हरियाणा वृक्ष संरक्षण अधिनियम 2026” लाने की तैयारी में है। हाईकोर्ट ने राज्य में घटते वन क्षेत्र पर गंभीर चिंता जताई है।
- हरियाणा में पेड़ों की सुरक्षा के लिए बनेगा नया कानून
- हाईकोर्ट ने जताई चिंता, राज्य में सिर्फ 3.65% वन क्षेत्र बचा
- अब पेड़ काटने से पहले कोर्ट की अनुमति होगी जरूरी
हरियाणा में तेजी से घटते हरित क्षेत्र और पेड़ों की कटाई को लेकर अब सरकार और न्यायपालिका दोनों गंभीर नजर आ रहे हैं। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने खुलासा किया कि पेड़ों की सुरक्षा के लिए नया कानून तैयार किया जा रहा है। इस प्रस्तावित कानून का नाम “हरियाणा वृक्ष संरक्षण अधिनियम, 2026” रखा गया है।
सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी के बाद इस कानून को अधिसूचित कर लागू कर दिया जाएगा। माना जा रहा है कि नए कानून के लागू होने के बाद हरियाणा में पेड़ों की कटाई पर पहले से कहीं अधिक सख्त नियंत्रण लागू होगा।
यह मामला गुरुग्राम के सेक्टर-53 स्थित घने पेड़ों वाले क्षेत्र को बचाने के लिए दायर जनहित याचिका से जुड़ा है। इस क्षेत्र में ग्रुप हाउसिंग परियोजना के तहत निर्माण प्रस्तावित था, जिससे बड़ी संख्या में पेड़ों को नुकसान पहुंचने की आशंका जताई गई थी।
हाईकोर्ट ने पहले ही 18 अक्टूबर 2024 को अंतरिम आदेश जारी करते हुए इस स्थान पर निर्माण गतिविधियों पर रोक लगा दी थी। अदालत ने स्पष्ट कहा था कि निर्माण कार्य से इलाके के पुराने और घने पेड़ों को गंभीर नुकसान हो सकता है।
सुनवाई के दौरान हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (HSVP) के अधिकारियों ने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि अदालत के आदेशों का पूरी तरह पालन किया जाएगा। अधिकारियों ने कहा कि पूरे हरित क्षेत्र को सुरक्षित रखा जाएगा और किसी भी पेड़ को नुकसान नहीं पहुंचने दिया जाएगा।
इसके बाद हाईकोर्ट ने कहा कि याचिका की मुख्य मांग पूरी हो चुकी है और मामले का निपटारा कर दिया गया। हालांकि अदालत ने यह भी संकेत दिए कि पर्यावरण संरक्षण को लेकर भविष्य में भी सख्त रुख जारी रहेगा।
हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ता को यह अनुमति भी दी कि वह हरियाणा और पंजाब में हरित क्षेत्र संरक्षण से जुड़ी पहले से लंबित जनहित याचिका में हस्तक्षेप कर सकता है।
हाल ही में हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार को फटकार लगाते हुए कहा था कि राज्य का वन क्षेत्र कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का केवल 3.65 प्रतिशत रह गया है। अदालत ने इसे गंभीर पर्यावरणीय खतरे का संकेत बताया था।
इसके अलावा 1 अप्रैल 2026 को हाईकोर्ट ने एक अहम आदेश जारी करते हुए कहा था कि हरियाणा में किसी भी प्रजाति और किसी भी उम्र के पेड़ को काटने से पहले अदालत की अनुमति लेना अनिवार्य होगा।
इस आदेश का असर कई विकास परियोजनाओं पर भी पड़ा है। जीरकपुर-पंचकूला बाईपास परियोजना के लिए प्रस्तावित करीब 5 हजार पेड़ों की कटाई फिलहाल रोक दी गई है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि “हरियाणा वृक्ष संरक्षण अधिनियम, 2026” लागू होता है तो इससे शहरों और गांवों में तेजी से घटते हरित क्षेत्र को बचाने में बड़ी मदद मिलेगी। साथ ही पर्यावरण संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण और जलवायु संतुलन को भी मजबूती मिलेगी।
Akhil Mahajan